रविवार, 7 मई 2017

खजानों को चोरों से नहीं पहरेदारों से धोखा है

आम आदमी पार्टी और दिल्ली सरकार आज ऐसे विवाद में फंसी है जो उसके अस्तित्व पर ही सवाल खड़े कर रही है भ्रष्टाचार के खिलाफ मशाल लेकर हुए आंदोलन और फिर पार्टी के गठन के मूल भाव को ही चुनौती मिलती दिख रही है भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ी आप अब भ्रष्टाचार के आरोपों से जूझ रही है आरोप लगाने वाले कोई और नहीं आप के ही एक बड़े मंत्री है जो सीधे आप संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री पर दो करोड़ रिश्वत लेने का आरोप लगा रहे हैं

भारत माता की जय,,,, वंदे मातरम और इंकलाब जिंदाबाद जैसे नारे गूंजे थे जब एक 70 बरस के अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार भारत छोड़ो अभियान छेड़ा था.... जंतर मंतर का ये मंच गवाह बना था उस आंदोलन का जो देश की सत्ता को डगमगाने के लिये काफी था...

''ए खाक नशीनो उठ बैठो वो वक़्त करीब आ पंहुचा है
जब तख़्त गिराए जायेंगे जब ताज उछाले जायेंगे
अब टूट गिरेगी जंजीरे अब जन्दानों की खैर नहीं
जो दरिया झूम के उठे है तिनकों से ना टाले जायेंगे...''

फैज की ये नज्म उस वक्त हवाओं में गूंजती नजर आई थी... और ये सब हुआ था देश में फैली भ्रष्टाचार की जड़ों को उखाड़ फेंकने के लिये...

ये तो सच है कि जब जब अधिकारों को लेकर आवाज उठी है एक नये आंदोलन की शुरूआत हुई है भ्रष्टाचारियों की वजह से जब देश के लोगों का हक मारा जाने लगा तो अन्ना के जनलोकपाल आंदोलन के साथ देश के कोने कोने से लोग जुड़े... आंदोलन के साथी रहे लोग जब आंदोलन को आगे बढ़ाने के बारे में सोचने लगे तो अन्ना भले ही साथ नहीं चले लेकिन आवाज जरूर साथ रही कि भ्रष्टाचार का अंत होना चाहिए....राजनीति क्या है ये समझने के लिये और देश को बदलने के लिये साथ आये लोगों को अन्ना ने सुझाव भी दिए कहा भी कि ये कीचड़ है और इसके अंदर जाकर इसकी गंदगी से बचकर रहना मुमकिन नहीं....

26 नंवबर 2012 को आम आदमी पार्टी बनी... दावा किया गया कि सड़क से उठकर जो आम आदमी सत्ता तक पहुंचेगा वो भ्रष्टाचारियों का काल होगा... भ्रष्टाचार के खिलाफ न सिर्फ आवाज उठेगी बल्कि कार्रवाई भी होगी और ऐसी कार्रवाई जो पूरे देश के लिये मिसाल होगी

दिल्ली की सत्ता अपने हाथ में रखकर आप सरकार ने दो साल में और कुछ किया हो या न हो लेकिन आरोपों की एक पूरी फेहरिस्त जरूर उनके खिलाफ लिखी जा रही है.. पहले विपक्षी फिर बागी और अब अपने ही मंत्री आरोप लगाकर आप को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं भ्रष्टाचार के आरोप कितने सही है ये तो जांच बताएगी लेकिन आज फिर अन्ना की वो बात याद आ रही है जो जनलोकपाल आंदोलन के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कही थी

''खजानों को चोरों से नहीं पहरेदारों से धोखा है इस देश को सिर्फ दुश्मन से नहीं इन गद्दारों से धोखा है'

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