आम आदमी
पार्टी ने कुमार विश्वास को
मना कर और अमानतुल्ला खान को
पार्टी से निकाल कर घमासान
शांत भले ही कर दिया हो लेकिन
खुद आप इस कार्रवाई से सवालों
के घेरे में आ गई है सवाल कई
है जिनमें से एक ये भी है कि
जब पार्टी के आदेश का उल्लंघन
दो नेताओं ने किया तो सजा एक
को ही क्यों मिली?
आम आदमी
पार्टी में नेताओं का पद और
कद कितना मायने रखता है ये अब
और खुलकर सामने आ गया है...
तीन दिन से जारी
अमानतुल्ला वर्सेस कुमार
विश्वास जंग का अंजाम क्या
हुआ ये तो सामने आ गया लेकिन
इसके मायने क्या है ये आंकलन
अभी जारी है...
आम आदमी पार्टी
ने कुमार विश्वास की बात मानकर
अमानतुल्ला खान को पार्टी से
बाहर का रास्ता दिखा दिया और
साथ ही उन्हें इनाम में राजस्थान
यूनिट के प्रभारी का पद भी दे
दिया....
चलिये कुमार
पार्टी में है ये तो समझ आता
है लेकिन पिछले तीन दिन से जो
चल रहा था उसे समझने में थोड़ी
मेहनत करनी पड़ेगी...
शुरुआत अमानतुल्ला
खान से करते है...
कुमार को बीजेपी
एजेंट कहकर बवाल खड़ा करने
वाले अमानतुल्ला ने अगर कुछ
गलत कहा था तो क्यों मनीष
सिसोदिया ने तल्खी दिखाते
हुए कुमार विश्वास को भी मीडिया
में बयानबाजी करने और वीडियो
जारी करने के लिये लताड़ा...
पीएसी में मनीष
के मुताबिक कोई खुश नहीं था
कुमार के we
the nation वीडियो से
जिसमें केजरीवाल भी शामिल थे
ये तो कुमार
विश्वास भी समझ गये थे कि पार्टी
अमानतुल्ला से ज्यादा शायद
उनसे नाराज थी...
जिस वीडियो और
इंटरव्यूह की बात मनीष ने की
वो अमानतुल्ला के बयानों के
बराबर तोला गया और यही बात
कुमार को नागवार गुजरी...बयानबाजी
की मनाही के बाद भी कुमार मीडिया
के सामने आये और फिर अपना आखिरी
दांव खेला...
कुमार के बड़ा
फैसले लेने के अल्टीमेटम के
बाद भी आप कुछ पिघलती तो दिखाई
नहीं दी...
कुछ ही देर बाद
जब मनीष फिर से सामने आये तो
कहा कि कुमार किसे फायदा पहुंचा
रहे ये सब जानते हैं यानि जो
बात अमानतुल्ला खुलकर कह रहे
थे वो बात मनीष ने अपने अंदाज
में दोहरा दी...
तो क्या आप
ने भी ये मान लिया था कि कुमार
बीजेपी के इशारे पर उन्हें
फायदा पहुंचाने के लिये ये
सब कर रहे हैं....
अगर ऐसा था तो
फिर क्यों कुमार को मनाने के
लिये नेताओं का जमावड़ा उनके
घर लगा...
क्या आप ये भांप
गई थी कि कुमार का जाना पार्टी
की टूट की नींव होगा..खैर
शाम से लेकर आधी रात की कवायद
रंग लाई बंद कमरों की बैठकों
में कुमार से समझौता भी हो गया
लेकिन ये साफ नहीं हुआ कि जो
काम अमानतुल्ला और कुमार दोनों
ने किया उसके लिये एक को सजा
और दूसरे को इनाम क्यों मिला....
कुमार विश्वास
ने पीएसी की बैठक से बाहर आ कर
कहा कि अमानत को सजा ये बताने
के लिये है कि शीर्ष नेतृत्व
के खिलाफ कुछ सुना नहीं जाएगा...
कवि कुमार
कह गये कि शीर्ष नेतृत्व पर
बयानबाजी बर्दाश्त नहीं
होगी....मैसेज
सिर्फ अमानतुल्ला के लिये
नहीं था उन तमाम आप कार्यकर्ताओं
के लिये भी था जो शायद अब तक
ये सोच रहे थे कि आम आदमी पार्टी
आम लोगों की पार्टी है यहां
सब बराबर है...
शीर्ष नेतृत्व
का मतलब अरविंद केजरीवाल,
मनीष सिसोदिया
कुमार विश्वास और उनके जैसे
टॉप नेता है तो फिर कैसे आप
अलग है क्यों न ये कहा जाये कि
यहां भी हाईकमान कल्चर हावी
है.....
क्यों न ये कहा
जाये कि आम आदमी पार्टी देश
की दूसरी राजनीतिक पार्टियों
की कतार का एक आम हिस्सा ही है
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