नोटबंदी को लेकर सभी के मन में कई सवाल हैं ये सिर्फ अपनी जेब के नोट बदलने तक सीमित नहीं है इसके जरीये इकॉनोमी की हालत बेहतर भी हो सकती है और बड़ा झटका भी लग सकता है सरकार तो कहती है कि नोटबंदी से किसी को नुकसान नहीं होगा बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में सुधार होगा लेकिन क्या वाकई नोट पर चोट से नफा होगा क्या किसी को किसी तरह का नुकसान भी हो सकता है ?
नोटबंदी का असर तो दिखाई दे रहा है नए नोट बाजार में आ गये हैं और देश की इकॉनोमी का हिस्सा भी बन गये है नोटबंदी के असर को कई तरह से जांचा परखा जा रहा है बात काले धन को खत्म करने की करें तो दावा तो यही है कि काला धन पूरी तरह इसके जरिये खत्म किया जा सकता है लेकिन क्या वाकई काला धन खत्म होगा इसका आंकलन किया जा रहा हैकालेधन पर चोट
भ्रष्टाचार और काला धन दोनों आपस में जुड़े हैं कालेधन से भ्रष्टाचार और बढ़ता है तो भ्रष्टाचार करने के लिये कालेधन की जरूरत होती है नोटबंदी के बाद काला धन कम होगा या इसके नुकसान इकॉनेामी को और उठाने होंगे इस पर कई एक्सपर्टस की अलग अलग राय है... कई एजेंसियों ने नोटबंदी के कालाधन पर असर का आंकलन किया और इसके नफा नुकसान को जानने की कोशिश की
अनुमान है कि
- 500 और 1000 रुपए की नोट बंदी से कालेधन में कमी आएगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी हालांकि इसका नुकसान भी हो सकता है क्योंकि अगर मौजूदा सिस्टम में सुधार नहीं किए जाते हैं तो भ्रष्ट व्यवस्था के हिस्सेदार भ्रष्टाचार के नए तरीके खोज लेंगे
एक्सपर्ट्स ये भी मानते हैं कि
- भ्रष्टाचार कम होने से लूटखसोट से छुटकारा मिलेगा लेकिन संभावना इसकी भी है कि व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाकर नुकसान की भरपाई के लिए किसी और नये तरीके से भ्रष्टाचार को बढ़ाया जाए
इसमें कोई शक नहीं कि कालाधन पर नोटबंदी सीधा वार है लेकिन कालाधन दोबारा इकट्ठा न हो इसके लिये सरकारी मशीनरी का दुरूस्त होना जरूरी है
जालीनोट निकलेंगे इकोनॉमी से
नोटबंदी ने 500 और 1000 के नोट बंद किए इसका एक फायदा ये भी है कि जाली नोट अर्थव्यवस्था से बाहर हो जाएंगे... जाली नोटों का काला कारोबार करने वालों पर नोट की चोट भारी पड़ सकती है लेकिन ये फिर इकॉनोमी का हिस्सा न बने इसके लिये और कड़े कदम उठाने की जरूरत है
जाली करेंसी का काला कारोबार जोर शोर से चल रहा था और इकॉनोमी की कमर इससे टूट रही थी नोटबंदी ने अर्थव्यवस्था को इससे निजात दिलाने का मौका दिया
- इसमें कोई शक नहीं कि 500 और 1000 रुपए की नोट बंदी से जाली नोटों का चलन बंद हुआ। आतंकवाद और नक्सलवाद की फंडिंग पर सीधा वार हुआ लेकिन एक्सपर्टस ये भी मानते हैं कि अगर भविष्य में सरकार कालाधन और नकली नोटों पर लगाम लगाने में नाकामयाब होती है तो आतंकवादियों और नक्सलवादियों को दोबारा से फंडिंग शुरू हो सकती है
जाली नोटों पर लगाम लगने से जम्मू-कश्मीर में शांति कायम हुई। नशे और ड्रग्स के कारोबार पर लगाम लगी है लेकिन अगर देाबारा फंडिंग शुरू हुई तो उनको सिर उठाने का फिर से मौका मिल सकता है।
नोटबंदी से जालीनोटों की सफाई होने का दावा किया जा रहा है लेकिन ये भी सच है कि जाली का कारोबार करने वाले फिर कोशिश करेंगे इससे मुनाफा कमाने की सरकार को इस ओर भी ध्यान देने की जरूरत है
बैंक कैश पर असर
कालाधन इसलिये खराब है क्योंकि एक बड़ी रकम सर्कुलेशन में नहीं आ पाती...अब नोटबंदी ने बैंकों को इतना कैश दे दिया है कि उन पर एक बड़ी जिम्मेदारी आ गई है पूरे देश से इकट्ठा हुआ सालों का जमा पैसा अब सर्कुलेशन में आ सकता है
- कालेधन पर लगाम लगने से बैंकों के पास जमा होने वाले पैसे में वृद्धि हुई है। बैंकों के पास अब तक करीब छह लाख करोड़ रुपए जमा हो गया है हालांकि इससे कैश की लिक्विडिटी कम होने से कारोबार प्रभावित होने की संभावना है। अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त हुई।
आशंका इस बात की भी है कि कई महीने और इसी तरह अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी रह सकती है जीडीपी में दो फीसदी तक कमी होने का अनुमान लगा भी लगाया जा रहा है और डर इस बात का भी है कि हालात जल्दी नही सुधारे गए तो बेरोजगारी भी बढ़ सकती है लेकिन तर्क ये भी है कि अब बैंक लोन सस्ते हो सकते है क्योंकि
- बैंकों के पास ज्यादा पैसा होने से व्यक्तिगत और बिजनेस के लिए कर्ज लेने वालों को कम ब्याज पर लोन मिलेगा
लोन का ब्याज कम हुआ तो नए उद्योग धंधे पनप सकते हैं और रोजगार के अवसर भी बढ़ने का अनुमान है
हालांकि इससे भी इंकार नहीं किया जा सकता कि ऐसा होने में काफी वक्त लेगेगा
फिलहाल
- कारोबार में मंदी आने से सरकार के राजस्व में कमी आ सकती है। पब्लिक को जमा पर ब्याज भी कम मिलेगा।
दरअसल देश की अर्थव्यवस्था को पहली बार इतने बड़े स्तर पर नोटबंदी से गुजरना पड़ रहा है इसके असर को परखने और आंकलन करने की कोशिश तो कई एजेसियां कर रही है लेकिन असली तस्वीर धीरे धीरे ही साफ हो पाएगी और अचछी बात ये है कि सरकार हर परिस्थिति के लिये तैयार होने का दावा कर रही है.
जीडीपी पर क्या होगा असर ?
जीडीपी किसी देश की अर्थव्यवस्था को समझने का सबसे अच्छा तरीका है जीडीपी यानि ग्रोस डोमेस्टिक प्रोडक्ट या सकल घरेलू उत्पाद.. इसे देश के उत्पादन और उसके मूल्य से आंका जाता है जीडीपी बढ़ने का मतलब है कि देश तरक्की पर है नोटबंदी के बाद जीडीपी पर असर पड़ना स्वाभाविक है लेकिन ये किस स्तर पर होगा ये अर्थव्यवस्था को हो रहे नफा नुकसान को बयां करेगा...
हमारे देश में जीडीपी को बढ़ाने के कई कदम उठाये जाते हैं लेकिन माना जाता है कि कालाधन जब इकॉनोमी में आता है तो उसे दीपक की तरह खोखला करता रहता है जीडीपी बढ़ती नहीं और महंगाई बेहिसाब बढ़ती जाती है नोटबंदी कालेधन पर चोट कर रही है लेकिन इसका असर जीडीपी पर भी दिखाई देगा... अब तक जो आंकलन हुआ है उससे ये अनुमान लगाया जा रहा है कि
- नोटबंदी से होने वाली समस्या खत्म होने के बाद अर्थव्यस्था पहले से भी अच्छी हो सकती है। एक-दो साल बाद जीडीपी में वृद्धि हो सकती है हालांकि अर्थशास्त्री ये भी कह रहे हैं कि फायदे से पहले इसका नुकसान सामने आएगा
- मौजूदा समय में व्यापार में कमी आई है। फैक्ट्रियों में उत्पादन घटा है। अगर लंबे समय तक चला तो अर्थव्यवस्था पटरी पर लाने में मुश्किल होगा।
अर्थशास्त्री ये जरूर कह रहे हैं कि लांग टर्म में नोटबंदी जीडीपी बढ़ाने में मदद करेगी क्योंकि रूका पैसा बाजार में किसी न किसी रूप में इस्तेमाल होगा... सरकार का रेवेन्यू बढ़ेगा और इकॉनोमी सुधरेगी लेकिन आशंका ये भी है कि ज्यादा समय अगर लगा तो व्यापारियों को नुकसान हो सकता है।
नोटबंदी का असर लगभग हर सेक्टर पर पड़ा है प्रॉपर्टी का बाजार हो या आम लोगों की जिंदगी इससे हर कोई प्रभावित है जाहिर है प्रभावित हैं तो इसके नफा नुकसान सभी को झेलने भी होंगे
बाजार में नकद कम है और बैंकों के बाहर लंबी लाइनें अब तो नोट एक्सचेंज होना भी बंद हो गया है ऐसे में व्यापार मंदा है लोगों के पास कैश की कमी होने से बाजार में माल कम बिक रहा है छोटी मोटी चीजों के साथ बड़े बाजार पर भी असर साफ दिख रहा है प्रॉपर्टी खरीदने वाले जो पहले ही कम थे अब और कम होने की आशंका है हालांकि इसे गहराई से समझने की कोशिश करें तो अनुमान लगाया जा रहा है कि
- प्रॉपर्टी 30 फीसदी तक सस्ती हो सकती है। लोगों को मकान खरीदने में सहुलियत होगी। ब्लैकमनी के तौर पर दी जाने वाली राशि नहीं देनी होगी।
हालांकि जिन्होंने पहले से ही प्रॉपर्टी में निवेश किया है। ये निवेश उन्होंने कर्ज लेकर किया है। मौजूदा समय में प्रॉपर्टी सस्ती होने पर उनको कर्ज चुकाने में दिक्कत आ सकती है। जिससे बैंकों का एनपीए बढ़ने का खतरा बढ़ सकता है।
एक फायदा इसका ये भी माना जा रहा है कि रियल एस्टेट में कालेधन का प्रचलन कम होगा। कालेधन पर लगाम लगेगी और रियल एस्टेट की बजाय दूसरे सेक्टर में निवेश बढ़ेगा। हालांकि इससे
रियल एस्टेट का कारोबार मंदा होगा। कंस्ट्रक्शन से जुड़े कारोबार जैसे स्टील, सीमेंट, प्लाईउड कारोबार पर असर पड़ेगा।
प्रोपर्टी के बाजार पर नजर रखने वालों को बहुत जल्द बहुत ज्यादा उम्मीद नजर नहीं आ रही लेकिन बैंकों से लोन का ब्याज कम होना आम लोगों के लिये अच्छी खबर हो सकता है बैंक अपने यहां जमा धन को सस्ती ब्याज दरों पर देने को तैयार होंगे और ये पैसा आम लोगों के सपनों के आशियाने को खरीदने में मदद कर सकता है लेकिन देखना होगा कि प्रॉपर्टी बाजार नोटबंदी का सकारात्मक असर होता है या नहीं इसके अलावा बात करें तो अब
- अन प्रोडक्टिव धन की उपयोगिता बढ़ेगी। घरों की बजाय बैंकों में पैसा जमा हुआ है। महिलाओं की बचत के पैसे का ब्याज मिलेगा। लेकिन डर इस बात है कि बैंकों पास पैसा ज्यादा जमा हो जाएगा। बैंकों पर इस पैसे के उपयोग करने का दबाव बनेगा। ब्याज देने में मुश्किल खड़ी होगी।
यानि मुश्किलें बैंकों की कम नहीं होगी उनकी जिम्मेदारी अब और बढ़ जाएगी कुछ लोग इसलिये परेशान थे कि शादियों के लिये उन्हें पैसा नहीं मिल रहा लेकिन फायदा ये भी है कि इससे
शादियों में फिजूलखर्च में कमी आई है। लग्जरी सामानों और गैर जरूरी सामानों पर खर्च न के बराबर हो रहा है। लोगों की बचत में बढ़ोतरी होगी। लोगों को सहूलियत होगी और उनकी कमाई उन्हें अच्छे रिटर्न देगी लेकिन शादी समारोह से जुड़े कारोबारियों बैंड बाजा, ज्वैलर्स, टेंट वालों, फूल वालों को नुकसान हो सकता है। लग्जरी सामानों के बिजनेस ठप पड़ सकते हैं।
किसी का फायदा किसी और का नुकसान करा सकता है कई लोगों को डर है कि उनके जमे जमाए बिजनेस न ठप हो जाए तो कुछ ये भी मान रहे हैं कि ज्यादा पारदर्शी व्यवस्था होने से सभी को फायदा होगा.


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