दिल्ली
की हवा में जहर घुला है जो धीरे
धीरे सांस से अंदर जाकर लोगों
के शरीर को बीमारियों का घर
बना रहा है आखिर कौन है दिल्ली
की जहरीली हवा का जिम्मेदार?
सांस लेना क्यों मुश्किल है मेरे शहर में...... दिल्ली में क्यों छाई है दम घोंटने वाली धुंध.... आखिर क्या है वजह है कि दिल्ली में हर शख्स बीमार सा है ?
दिवाली पर पटाखे फोड़ने की वजह से भी जहरीली गैसों की मात्र बहुत बढ़ जाती है. पटाखे वातावरण में करीब 11 प्रतिशत प्रदूषण फैलाती है. दिवाली के दिन पीएम 2.5 का स्तर अपने तय मानक 60 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर से 42 बार ज्यादा दर्ज किया गया था.
आंकड़े जो कहानी कह रहे हैं वो खतरनाक होती दिल्ली की हवा को बयां कर रही है लेकिन क्या पड़ोसी राज्य इस हवा को और जहरीला बना रहे हैं ? केजरीवाल सरकार के इस दावे की हकीकत यही है... पड़ोसी राज्य नहीं दिल्ली के अंदर सालों से प्रदूषित हो रही हवा इसकी जिम्मेदार है जिसके बारे में सोचने का समय किसी के पास नहीं... ताज्जुब इस बात का है कि अब भी इमरजेंसी मेजर ही सोचे जा रहे हैं लंबे समय के लिये सॉल्यूशन पर किसी का ध्यान नहीं....
सांस लेना क्यों मुश्किल है मेरे शहर में...... दिल्ली में क्यों छाई है दम घोंटने वाली धुंध.... आखिर क्या है वजह है कि दिल्ली में हर शख्स बीमार सा है ?
खतरनाक है ये हवा... और बीमारियों को दावत देने को मजबूर हैं लोग लेकिन ये हाल हुआ क्यों? क्या सिर्फ फसलों के अवशेष जलाने से ही दिल्ली की हवा जहरीली हो गई?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता अचानक खराब नहीं हुई पिछले कुछ सालों से ये लगातार खराब हो रही है. और इसकी- एक बड़ी वजह
तेजी से बढ़ता शहरीकरण है...
- डीजल इंजन...
- कोयले से
चलने वाले बिजली के प्लांट
और
- इंडस्ट्री
से निकलने वाली जहरीली गैसें
हवा में लगातार जहर घोल रही
है
- एक वजह खेतों
में फसलों की पराली जलाने और
- लकड़ी या
कोयले के चूल्हों से निकलने
वाले धुएं को भी माना जाता
है. लेकिन
इसके साथ ही
- सड़कों
की धूल से सबसे ज्यादा 38
प्रतिशत
प्रदूषण फैलता है.
- आईआईटी कानपुर
के मुताबिक,
मलबा-धूल
पीएम 2.5 और
पीएम 10 प्रदूषण
के बड़े वाहक हैं.
यही नहीं डीजल से चलने वाली गाड़ियों की बात करें तो दिल्ली में लगभग 90 लाख से ज्यादा वाहन पंजीकृत हैं जबकि रात 10 बजे के बाद एक लाख से ज्यादा ट्रक राजधानी में प्रवेश करते हैं और इनसे ज्यादा धुआं निकलने से प्रदूषण ज्यादा फैलता है. ये वाहन करीब 25 प्रतिशत प्रदूषण फैलाते हैं.
दिवाली पर पटाखे फोड़ने की वजह से भी जहरीली गैसों की मात्र बहुत बढ़ जाती है. पटाखे वातावरण में करीब 11 प्रतिशत प्रदूषण फैलाती है. दिवाली के दिन पीएम 2.5 का स्तर अपने तय मानक 60 माइक्रोग्राम पर क्यूबिक मीटर से 42 बार ज्यादा दर्ज किया गया था.
आंकड़े जो कहानी कह रहे हैं वो खतरनाक होती दिल्ली की हवा को बयां कर रही है लेकिन क्या पड़ोसी राज्य इस हवा को और जहरीला बना रहे हैं ? केजरीवाल सरकार के इस दावे की हकीकत यही है... पड़ोसी राज्य नहीं दिल्ली के अंदर सालों से प्रदूषित हो रही हवा इसकी जिम्मेदार है जिसके बारे में सोचने का समय किसी के पास नहीं... ताज्जुब इस बात का है कि अब भी इमरजेंसी मेजर ही सोचे जा रहे हैं लंबे समय के लिये सॉल्यूशन पर किसी का ध्यान नहीं....
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