मंगलवार, 28 जुलाई 2015

कलाम थे कमाल

एक थे कलाम... कमाल के कलाम... उनका जीवन एक किताब की तरह है ऐसी किताब जिसमें हर किसी के लिये कुछ न कुछ जरूर है एक अच्छा इंसान बनने के नुस्खे,, एक बेहतरीन टीचर बनने के गुण, पढ़ाई में अव्वल रहने का मंत्र और जिंदगी जीने के तरीके से लेकर राजनेता का प्रेरणादायक व्यक्तित्व कैसा हो ये परिभाषा भी कलाम के बारे में हर कोई जानता है देश विदेश हर जगह शायद ही कोई ऐसा हो जिसने उनके बारे में न सुना हो एक छोटी सी श्रंद्धाजलि के रूप में आपको आज दिखाते हैं वो अनसुने किस्से कहानियां जो घटी तो कलाम की जिंदगी में थी लेकिन जिसका असर हम सबकी जिंदगियों पर हो सकता है


1- कलाम साहब की सादगी उनकी पहली झलक से ही झलकती थी सादा जीवन और सोच बड़ी इसकी मिसाल थे वो,,,  बनारस के बीएचयू के एक समारोह के दौरान कलाम की एक छोटी सी बात ने उनके बड़े दिल का परिचय दे दिया था इस कार्यक्रम में  जो कुर्सी उनके लिये रखी गई थी उस पर उन्होंने बैठने से इंकार कर दिया,,, और वो इसलिये क्योंकि उनके लिए निर्धारित की गई कुर्सी वहां रखी बाकी कुर्सियों से आकार में बड़ी थी,,, उन्हें खुद को बड़ा दिखाने का शौक नहीं था,, बस लोगों की सोच को बड़ा करने के लिये वो काम करते रहे 

2-राष्ट्रपति थे कलाम लेकिन इस पद की गारीमा के साथ कभी समझौता नहीं किया,,, एक वाक्या मई 2006 में हुआ था जब राष्ट्रपति कलाम का सारा परिवार उनसे मिलने दिल्ली आया. कुल मिला कर 52 लोग थे जो आठ दिन तक राष्ट्रपति भवन में रुके और उसी दौरान अजमेर शरीफ भी गए. उनके जाने के बाद कलाम ने अपने अकाउंट से तीन लाख बावन हजार रुपए का चेक काट कर राष्ट्रपति कार्यालय को भेजा. उनका पूरा खर्च कलाम साहब ने अपने एकाउंट से भरा जबकि ऐसा करना उनके लिये जरूरी नहीं था

3- ऐसा ही कुछ नवंबर 2002 में रमजान के महीने में भी हुआ जब कलाम के इफ्तार के लिए निर्धारित राशि से आटे, दाल, कंबल और स्वेटर का इंतेजाम किया गया और उसे 28 अनाथालयों के बच्चों में बांटा गया. इसके अलावा उन्होंने अपनी तरफ से भी एक लाख रुपए का चेक दिया. बच्चों के प्यारे थे कलाम और बच्चों के लिये उन्होंने पूरी जिंदगी काम किया

4- राष्ट्रपति रहते हुए भी एपीजे अब्दुल कलाम कभी अपने दफ्तर के अंदर सिमट कर नहीं रहना चाहते थे लोगों के बीच रहकर काम करने के आदि रहे कलाम भारत के सबसे सक्रिय राष्ट्रपति थे. अपने पूरे कार्यकाल में उन्होंने 175 दौरे किए. और आपको ये सुनकर हैरानी होगी कि इनमें से सिर्फ सात विदेशी दौरे थे. भारत के अलग अलग हिस्सों में वो लगातार घूमते रहे और हर बार उनके संदेशों से लोगों को प्रेरणा मिलती थी इस दौरान वो लक्ष्यद्वीप को छोड़ कर भारत के हर राज्य में गए.

5-  राष्ट्रपति बनने के बाद जब पहली बार कलाम केरल पहुंचे तो यहां भी एक खास काम उन्होंने किया,,, केरल की अपनी पहली यात्रा के दौरान राजभवन में सड़क किनारे बैठने वाले एक मोची और एक छोटे से होटल के मालिक को मेहमान के तौर पर उन्होंने आमंत्रित किया था. जमीन से जुड़े होने की शायद यही पहचान होती है

6-  डॉ. कलाम बच्चों और युवाओं के बीच रहकर अपने अनुभवों को साझा करते रहे इस उम्मीद में कि जो मुश्किलें उनके जीवन में आई वो किसी और को न झेलनी पड़े,,, एक पेपर बेचने वाले से लेकर देश के राष्ट्रपति बनने तक के सफर में कई मुश्किलों का सामना उन्होंने किया लेकिन कभी भी हिम्मत और उम्मीद का हाथ नहीं छोड़ा,,, पूरी दुनिया उन्हें भारत का मिसाइल मैन कह कर बुलाती हैं। लेकिन उनके साथ रहने वाले कुछ सहयोगी बड़े प्यार से उन्हें ‘वेल्डर ऑफ पिपुल’ भी कहते हैं। यही नहीं उनके परिवारवाले और बचपन के कुछ दोस्तों ने उनका नाम आजाद भी रखा,,,  

7- डॉ कलाम की सोच दूरदर्शी थी,,, विज्ञान की दुनिया में उनका खास मुकाम है और हमेशा रहेगा,, भारत के मिसाइल मैन को देश और दुनिया हमेशा उनके योगदान के लिये याद रखेगी लेकिन सबके बीच एक कलाम और थे जिनका दिल किसी बच्चे की तरह साफ और पाक था,,, उनकी दया भावना भी कमाल थी,,,, एक बार कलाम को किसी ने एक इमारत की दीवार की रक्षा के लिए उस पर टूटा कांच लगाने का सुझाव दिया लेकिन कलाम ने उस सुझाव को साफ नकार दिया उन्होंने कहा कि ऐसा करना पक्षियों के लिए नुकसानदेह साबित होगा।

8- काम के बोझ से दबे अपने एक साथी के लिये भी कलाम ने ऐसा कुछ किया जो वो हमेशा याद रखेगा,,, डीआरडीओ में जब कलाम काम कर रहे थे तो इसी दौरान उनके नीचे काम करने वाला एक सहयोगी काम के दबाव की वजह से   अपने बच्चों को प्रदर्शनी में नहीं ले जा सके थे तो कलाम खुद उनके बच्चों को लेकर गए। अपने सहयोगियों के साथ उनका व्यवहार परिवार के सदस्यों जैसा था असली टीम वर्क क्या होता है ये भी कलाम अपने जीवन के जरीये बता गये

9- आम तौर पर एक इंसान सारी जिंदगी की कमाई अपने बाद अपने परिवारवालों के लिये जोड़ता रहता है इसी काम में पूरी जिंदगी निकल जाती है लेकिन डॉ कलाम के लिये कोई एक परिवार नहीं पूरा देश उनका परिवार था इसलिये उन्होंने कभी अपने या परिवार के लिए कुछ बचाकर नहीं रखा. राष्ट्रपति पद पर रहते ही उन्होंने अपनी सारी जमापूंजी और मिलने वाली तनख्वाह एक ट्रस्ट के नाम कर दी. प्रोवाइडिंग अर्बन एमिनिटीज टू रुरल एरियाज ..यानी PURA नाम का ये ट्रस्ट देश के ग्रामीण इलाकों में बेहतरी के लिए काम में जुटा हुआ है.

10 डॉ कलाम पैसों में नहीं विचारों में निवेश करने की सलाह देते रहे,,, अपने और अपने परिवार के लिये कभी कुछ जोड़ कर नहीं रखा,,, इसी पर एक बार अमूल के संस्थापक और देश में श्वेत क्रांति लाने वाले डॉ वर्गीज कुरियन ने डॉ कलाम से पूछा ...तो उनका जवाब था 'चूंकि मैं देश का राष्ट्रपति बन गया हूं, इसलिए जबतक जिंदा रहूंगा सरकार मेरा ध्यान आगे भी रखेगी ही. तो फिर मुझे तन्ख्वाह और जमापूंजी बचाने की क्या जरूरत. अच्छा है कि ये भलाई के काम आ जाएं.


11- डॉ कलाम...जैसा कोई दूसरा होना बेहद मुश्किल है उनकी खासियत में से एक ये भी था कि वो दूसरों की मेहनत और खूबियों को तहेदिल से सराहते थे अपनी बातों के अलावा वो अपने हाथों से थैंक्यू कार्ड बनाकर ऐसे लोगों को भेजा करते थे. 

12 डॉ कलाम जब राष्ट्रपति थे. उस दौरान नमन नारायण नाम के एक कलाकार ने उनका स्केच बनाया और उन्हें भेजा. नमन के पास जब राष्ट्रपति डॉ कलाम का हाथ से बना थैंक्यू कार्ड और संदेश पहुंचा...तो वो भौंचक्के थे. उन्हें उम्मीद नहीं थी कि देश के महामहिम इस तरह दोस्ताना अंदाज में उन्हें शाबाशी देंगे

13- साल 2002 की बात है. डॉ कलाम का नाम अगले राष्ट्रपति के रूप में तय हो चुका था. उसी दौरान एक स्कूल ने उनसे छात्रों को संबोधित करने की गुजारिश की. बिना सुरक्षा तामझाम के डॉ कलाम उस कार्यक्रम में शरीक हुए. 400 छात्रों के सामने वो भाषण देने के लिए खड़े हुए ही थे कि बिजली गुल हो गई. आयोजक जबतक कुछ सोचते...डॉ कलाम छात्रों के बीच पहुंच गए...और बिना माइक के अपनी बात रखी और छात्रों के सवालों का जवाब दिया.

14 डॉ एपीजे अब्दुल कलाम अपने जीवन को बहुत अनुशासन में जीना पसंद करते थे. शाकाहार और ब्रह्मचर्य का पालन करने वालों में से थे. कहा जाता है कि वो कुरान और भगवद् गीता दोनों का अध्ययन करते थे और उनकी गुड़ बातों पर अमल किया करते थे.

15 डॉ कलाम की खूबियों और उनसे जुड़े प्रेरक किस्से तो बहुत है लेकिन एक बात का उन्हें हमेशा अफसोस रहा,,, एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इसका जिक्र भी किया उन्होंने कहा कि वो अपने माता पिता को उनके जीवनकाल में 24 घंटे बिजली उपलब्ध नहीं करा सके. ये बात उन्हें कभी कचोटती है इस कार्यक्रम में उन्होंने बताया कि उनके पिता जैनुलाब्दीन 103 साल तक जीवित रहे और मां आशियाम्मा 93 साल तक जीवित रहीं. घर में सबसे छोटा होने के कारण कलाम को घर में ज्यादा प्यार मिला. उनके घर में लालटेन से रोशनी होती थी और वो भी शाम को सात बजे से लेकर रात नौ बजे तक. उनकी मां को कलाम की प्रतिभा पर भरोसा था इसलिए वो कलाम की पढ़ाई के लिए एक स्पेशल लैंप देती थी जो रात तक पढ़ाई करने में कलाम की मदद करता था.

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अपने माता पिता के लिये भले ही डॉ कलाम बिजली का इंतजाम न कर पाये हो लेकिन अपने भाई एपीजे एम मरईकयार को तमिलनाडु के रामेश्वरम में उनके घर पर 24 घंटे बिजली की सुविधा उन्होंने दी कलाम साहब ने खुद बताया कि वो अपने भाई को 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के लिये प्रयास करते रहे और भले ही पावर कट हो लेकिन उसके लिये भी उन्होंने एक सोलर पैनल लगवाया दिया जिससे बिजली की कमी कभी न हो

17 पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे.अब्दुल कलाम को हिन्दी नहीं बोल पाने का काफी अफसोस था,और उनका मानना था कि इस वजह से वो अपना संदेश देश के हर बच्चे तक नही पहुंचा पा रहे। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा में एक बार वो बच्चों से मिलने पहुंचे लेकिन यहां वो बच्चों से बात नहीं कर पा रहे थे क्योंकि  वहां कुछ बच्चे अंग्रेजी नहीं जानते थे। कलाम को इस दौरान लगा कि उनके सम्बोधन को लोग बेहतर तरीके से नहीं समझ पा रहे है तो उन्होंने वहां मौजूद लोगों को अनुवाद करने को कहा। अनुवाद से खुश होने पर उन्होने शाबासी भी दी। लेकिन इस बात पर अफसोस भी जाहिर किया कि हिंदी न बोल पाने की वजह से वो  देश भर के बच्चों को अपना सन्देश नही पहुंचा पाते।

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अपने आखरी सफर में कलाम ने तीन मुद्दों पर अपने सहयोगियो से चर्चा की। सबसे पहले- डॉ. कलाम पंजाब में हुए हमलों को लेकर काफी फिक्रमंद थे। बेकसूरों की जान जाने की वजह से वे दुखी थे। आईआईएम शिलॉन्ग में उनके लेक्चर का टॉपिक था- क्रिएटिंग ए लिवेबल प्लेनेट अर्थ। उन्होंने इसे पंजाब में हुए हमलों से जोड़कर सोचा और कहा- ऐसा लगता है कि पॉल्यूशन की तरह इंसान भी इस धरती पर मौजूद जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं। साथ ही ये भी डिस्कस किया कि कैसे हिंसा, पॉल्यूशन और इंसानों की बेलगाम हरकतों के कारण एक दिन ये पृथ्वी हमसे छूट जाएगी। डॉ. कलाम ने कहा- शायद 30 साल में ये रहने लायक नहीं बचेगी। अपने आखिरी सफर में भी कलाम को भविष्य की चिंता थी उन्होंने कहा कि आखिर इंसान का फ्यूचर इसमें छुपा है और अपनी धरती के लिये सबको कुछ करना चाहिए

19 डॉ. कलाम कितने विनम्र थे इसका उदाहरण वो अपने आखिरी सफर में भी दे गये जिस कार में वो शिलांग जा रहे थे उसके साथ 6 से 7 कारों का काफिले था उनके आगे एक ओपन जिप्सी चल रही थी। उसमें तीन जवान थे। दो जवान बैठे थे। एक जवान हाथ में गन लेकर खड़ा था। एक घंटे के सफर के बाद डॉ. कलाम ने सवाल किया- वो जवान खड़ा क्यों है?  थक जाएगा। ऐसा करना तो सजा जैसा है। उन्होंने वायरलेस से मैसेज भेजने को कहा लेकिन उनका मैसेज उस जवान तक पहुंचा नहीं,,, आखिरकार जब बात नहीं बनी तो उन्होंने कहा कि मैं उससे मिलकर शुक्रिया अदा करना चाहता हूं।  क्योंकि वो मेरे लिये इतना कष्ट उठा रहा है बाद में आईआईएम शिलॉन्ग पहुंचकर उन्होंने उस जवान को बुलाया और पूछा- क्या तुम थक गए हो? क्या तुम कुछ खाना चाहोगे? मैं माफी चाहता हूं कि तुम्हें मेरी वजह से इतनी देर खड़े रहना पड़ा। ...इस बात से जवान को काफी ताज्जुब हुआ। वो कुछ बोल नहीं पाया। उसने इतना ही कहा- सर, आपके लिए तो 6 घंटे भी खड़े रहेंगे। ’’

20 डॉ कलाम अकसर कहा करते थे, “तुम यंग हो-तय करो कि दुनिया तुम कैसे याद रखेगी। एक बार उनके पर्सनल असिसटेंट ने उनसे ही सवाल किया उन्होंने पूछा “पहले आप बताइए कि आप किस तरह याद किया जाना पसंद करेंगे। प्रेसिडेंट, साइंटिस्ट, राइटर, मिसाइल मैन, इंडिया 2020, टारगेट 3 बिलियन या कुछ और...।” कलाम ने इन ऑप्शन से उलट जवाब दिया उन्होंने कहा, “टीचर- मैं टीचर के रूप में याद किया जाना पसंद करूंगा।” सच ही तो है जिंदगी भर कितने ही पदों प रहे और हटे लेकिन आखिरी सांस तक वो टीचर रहे ये पद उन्होंने कभी छोड़ा नहीं और आज लोग उनके जीवन और उन्हें व्यक्तित्व से सीख ले रहे हैं,,,,उनकी कही बातों पर अमल करना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी,,,   





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