सोमवार, 19 अगस्त 2013

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 28

कहीं सुना था लड़कियां थोड़ी सी पागल होती है अपने साथ साथ अपने अपनो के हिस्‍से के सपने भी देख लेती है और चाहती है कि वो उसे पूरा करें,,, जो वो समझती है वो दूसरा भी समझे,, जो उम्‍मीद करती है उसे वो पूरा करें पर ऐसा हमेशा संभव नहीं होता,,,,,ये बात जब समझ आती है तो दुख होता है,, तकलीफ होती है लेकिन इसमें गलती किसकी है,,, शायद किसी की नहीं,,

कशिश को जो परेशान कर रहा था वो कुछ कुछ ऐसा ही है वो सागर में शायद अंश को ढूंढ रही है शायद वो चाहती है कि जैसी दोस्‍ती अंश के साथ उसकी है वैसी सागर के साथ हो जाये लेकिन दो लोग एक जैसे कैसे हो सकते है,, दो रिश्‍ते एक तरह के कैसे हो सकते है,, हर इंसान की अपनी पहचान है, अपना वजूद है,, अपनी खासियत है जिसे जानना जरुरी है पर कशिश को शायद कुछ वक्‍त चाहिए था ये तय करने के लिये कि उसे आखिर चाहिए क्‍या,,, शायद इसलिये वो सब से दूर इस अंजान शहर में आने को तैयार हो गई थी ऑफिस की कांफ्रेंस तो शायद उसके एक बहाना था, वो चाहती तो मना भी कर सकती थी पर उसने हां कहा, क्‍योंकि वो चाहती थी कि कुछ वक्‍त ऐसी जगह गुजारे जहां कोई उसे जानता न हो,, वो बस अपने आप से बात कर सके।

अंश समझ रहा था ये,,, कशिश को उससे ज्‍यादा जानता था,, ये जानता था कि उसे ऐसा क्‍यों लग रहा है,, पर अंश नहीं चाहता था कि कशिश परेशान रहे वो चाहता था कि वो खुश रहे,, जिंदगी को हर पल जिये जैसा कि वो हमेशा करती आई है पर ऐसा करने के लिये उसे खुलकर कशिश से बात करनी थी और वो,,, कुछ कहने को तैयार नहीं थी

अंश कशिश के पास गया और आसमान की तरफ देखकर बोला देखो चांद के सबसे पास जो तारा है,, ये तारा हमेशा चांद के सबसे पास रहता है लेकिन कभी उसे छू नहीं सकता,, आसमान के बाकी तारों से ज्‍यादा अच्‍छी कि‍स्‍मत इसी तारे की होती है क्‍योंकि ये सबसे पास से उसे देख सकता है उसे महसूस कर सकता है,, हम सब इसी तारे की तरह है हमें लगता है जिंदगी में हमें वो नहीं मिला जो चाहिए था,, या फिर मिला लेकिन वैसा नहीं जैसा सोचा था,, चांद और तारे की दूरी से अंदाजा लगाते है कि बस खुशियां इतनी दूर ही रहती है हमसे,, कभी पूरी खुशी नहीं मिल पाती,,, पर अगर सोच को थोड़ा बदल दिया जाये तो ये वही तारा है जो लोगों को राह दिखाता है समुद्र में, जगंल में जब लोग रास्‍ता भटक जाते है तो दिशा यही तारा दिखाता है यही तो बताता है किस दिशा में उनकी मंजिल है फि‍र ये क्‍यों न कहें कि जो होता है अच्‍छा ही होता है,, हमारी जिंदगी में किसी का आना या जाना सबका कुछ न कछ मतलब होता है ये हमारे सफर का हिस्‍सा है कोई ज्‍यादा देर साथ रहता है तो कोई बस कुछ पल साथ रहकर चल देता है लेकिन हर मुकाम पर जो भी होता है उसका असर दूर तक रहता है और वो जरुरी भी होता है क्‍योंकि हर शख्‍स जो आपसे जुड़ा है उससे कुछ न कुछ ऐसा मिलता है जो आपकी सोच का दायरा बढ़ाता है या कभी कभी उसे बदल भी देता है और जब सोच बदलती है तो जीने का अंदाज भी बदल जाता है फि‍र वही रास्‍ता जो कभी लंबा लगता था सुहाने सफर की तरह हो जाता है वही बोरिंग जिंदगी इंटरस्टिंग बन जाती है

अंश ने कशिश की आंखों में आंखों डालकर देखा और कहा जिंदगी के हर मोड़ पर हमारे पास दो रास्‍ते होते है एक खुशी का और दूसरा गम का,, बस फैसला करना होता है कि चाहिए क्‍या।

कशिश समझ गई थी कि अंश उससे क्‍या कहना चाह रहा है और शायद उसकी परेशानी भी कुछ कम हो गई थी,, शायद उसके लिये ये जरुरी था कि कोई उससे ये बात कहें,,,और अंश से बेहतर ये कौन कर सकता था

अंश ने कशिश से कहा कि बस जिंदगी को जी लो, प्रोब्‍लम्‍स सबकी लाइफ में होती है उसे इतना सीरीयसली नहीं लेना चाहिए और साथ ही अंश ने कशिश को याद भी दिलाया कि वो याद रखें कि वो खुद क्‍या है उसकी शरारतें और उसकी बदमाशियां कभी खत्‍म नहीं होनी चाहिए।

कशिश ने अंश से सिर्फ इतना कहा चलो अंश अब बारिश खत्‍म हो गई बहुत थक गई हूं सोना चाहती हूं

अंश और कशिश वापस होटल लौट आए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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