रविवार, 11 अगस्त 2013

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 26

अंश को यहां ऊटी में देखकर वो हैरान था, और अंश के पास जाकर उससे पूछा कि तुम यहां कैसे? अंश अपने पुराने साथियों को देखकर काफी खुश हो रहा था,, अच्‍छा है कि अनजान शहर में कोई जाना पहचाना मिल जाये तो,,, अंश को उन्‍हें देखकर एक ही ख्‍याल आया वो कशिश के बारे में पूछने वाला था,, लेकिन उससे पहले ही बात शुरु हो गई कि वो दौर कितना अच्‍छा था जब सब साथ में काम करते थे,, कशिश की बात निकली तो अंश ने भी याद करना शुरु किया,, हां,, कशिश की बदमाशियों में पूरा दिन कैसे बीत जाता था पता ही नहीं लगता था,, अंश अपनी धुन में कशिश की शरारतों को याद कर रहा था तभी वहां मौजूद टीम के दूसरे मैंमरबर्स में से एक लड़की बोली, आप लोग कशिश मैम की बात कर रहे है क्‍या वो ऐसी थी?
अंश को थोड़ा शॉक लगा,, कशिश के साथ रहने वाले तो सब जानते है कि वो ऐसी ही खुराफाती है फि‍र उसने ऐसा क्‍यों कहा,,, अंश ने पूछ ही लिया,, क्‍यों आपको क्‍या लगा कि कशिश कैसी है,,,,,,,

उसने कहा, पता नहीं उनको जानने का कभी मौका ही नही मिला वो तो बहुत चुपचाप, सीरीयस रहती है अपना काम करती रहती है एक साल से मैंने कभी उन्‍हें खुलकर हंसते हुए नहीं देखा,,,

अंश को यकीन नहीं हो रहा था कि जिस कशिश ने उसे हंसना सिखाया,, हर दिन, हर पल को जीना सिखाया,, नामुमकिन को मुमकिन करना सिखाया वो इतनी खामोश हो गई थी,,, उसकी खुराफातें कहां खो गई थी,,,

ये सब सोचते हुए अंश को समझ नहीं आ रहा था कि वो क्‍या कहे उसने पूछा कशिश ऐसे कैसे हो गई,, और जवाब मिला कि तुम खुद ही उससे पूछ लो,, वो भी यहां आई है ,,,,,,,,,,,

अंश ये सुनकर बहुत खुश हो गया अब तो बस उसे कशिश से मिलना था उसने कशिश के बारे में पूछा तो पता चला कि वो कहीं बाहर गई है अंश उसका बेसब्री से इंतजार कर रहा था,, सोचा आज उसे सप्राइस करेगा पर तभी होटल के रिस्‍पशन से अंश को फोन आया।

दरअसल अंश इसी होटल का मैनेजर है,, उसके पास फोन आया कि जो कार कशिश को लेकर सनसेट प्‍वाइंट गई थी वो वापस लौटते हुए खराब हो गई है अब दूसरी भेजनी होगी,, अंश ने कहा ठीक है दूसरी भेज दो,,,,

पर अब उससे रहा नहीं गया उसे लगा अनजान जगह पर कशिश परेशान हो रही होगी,, और रात भी होने लगी थी, पहाड़ों में अंधेरा गहरा होता है और मौसम खराब होने की भी संभावना थी,,, अंश खुद भी अपनी कार लेकर निकल पड़़ा,,,

कशिश से मिलने की बैचेनी थी या उसके बारे में जानने की जल्‍दी,, अंश आज फास्‍ट ड्राइव कर रहा था,,, चार साल बाद उसे देखने और डेढ साल बाद उसकी आवाज सुनने की जल्‍दबाजी में दो बार कार का बैलेंस खोते खोते बचा।

ठंड बढ़ रही थी और अंधेरा भी घुमावदार सड़क पर ट्रेफि‍क ज्‍यादा नही था,, इस वक्‍त पहाड़ों पर उपर जाने वाले नहीं नीचे आने वालों की तादाद ज्‍यादा होती है अंश को थोड़ा गुस्‍सा भी आ रहा था कि जब कशिश अपनी टीम के साथ दिल्‍ली से यहां तक आई है तो अकेले क्‍यों गई,, किसी को तो साथ लेकर जाना चाहिए था,, अनजान जगह और अनजान लोगों के साथ रिस्‍क लेना कहां कि समझदारी है। पर अंश शायद समझ गया था कि कशिश तो ऐसी ही है थोड़ी सी पागल, कब क्‍या करती है किसी को नहीं पता,, अंश ये सोचकर थोड़ा मुस्‍कुराया भी कि ऐसी खुराफात सिर्फ कशिश ही कर सकती है और उसके ऑफि‍स के लोगों को लगता है कि वो अब खुराफाती नहीं है।

दूर उपर पहाड़ी के एक मोड़ से अंश को सड़क के एक कोने पर खड़ी एक कार दिखाई दी उसका बोनट खुला हुआ था और ड्राइवर शायद कार ठीक करने की कोशिश कर रहा था,, अंश की सांस में सांस आई,, वो उसी के होटल की कार थी मतलब कशिश अब बस कुछ पल ही दूर थी।

अंश ने अपनी कार उस कार के पीछे लगा दी,, तेजी से कार का दरवाजा खोला और ड्राइवर से बात करने लगा क्‍या हुआ कैसे खराब हो गई गाड़ी?

ड्राइवर ने बताया कि उसे कुछ समझ नहीं आ रहा, शायद इंजन ब्रेक डाउन है,, अंश को लगा कि कशिश अगर कार में होगी तो उसकी आवाज सुनकर जरुर बाहर आ जाएगी लेकिन काफी देर इंतजार करने के बाद भी ऐसा कुछ हुआ नहीं।

कशिश की कोई आहट न देख अंश ने ड्राइवर से पूछा वो मैडम कहां है?

ड्राइवर ने कहा वो वहां है सामने उस बड़े पत्‍थर पर बैठी है, उन्‍होंने कहा जब ठीक हो जाए तो बुला लेना।

अंश ने मुड़कर देखा,, सड़क के दूसरी ओर एक बड़े से पत्‍थर पर कशिश बैठी थी और दूर आसमान में टकटकी लगाए कुछ ढूंढ रही थी शायद,,

अंश कशिश के पास गया और बोला,, क्‍या ढूंढ रही हो कशिश चांद तो बादल के पीछे छुपा है !


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