दिल्ली
से फ्लाइट कोयंब्टूर के लिये
थी और उसके बाद ढाई घंटे सड़क
रास्ते से जाना था,,
कशिश
ने सागर को बाय बोलने के बाद
अपनी फ्लाइट ली। उसके ऑफिस
के लोग उसके साथ थे लेकिन फिर
भी कशिश ज्यादा किसी से बात
नहीं कर रही थी,,
पता
नहीं आज क्या बात थी कशिश
बहुत शांत थी फ्लाइट की खिड़की
से बाहर बादलों को देखना,,
नीचे
मैप जैसी ग्रीनरी और बच्चों
के खिलौने जैसी इमारतें देखकर
वो हमेशा खुश होती थी पर आज
उसके दिल दिमाग में कुछ नहीं
चल रहा था सब कुछ जैसे रुक सा
गया था,,,
सागर
से दूर जाने को लेकर भी वो कुछ
रिएक्ट नहीं कर रही थी। बस
चुपचाप अपने आई पोड पर सांग
सुनते हुए अपने ख्यालों में
गुम अपनी सीट पर बैठी रही।
पूरी फ्लाइट में किसी से कोई
बात नहीं की और कोयंब्टूर
पहुंचने के बाद भी बस उसकी
आवाज तभी सुनाई दी जब उसने
सागर को फोन कर बताया कि वो
पहुंच गई है कशिश की आवाज सुनकर
सागर भी परेशान था लेकिन फिर
भी कशिश ने उससे सिर्फ इतना
ही कहा कि वो बहुत थक गई है और
बाद में बात करेगी।
ऊटी,
कर्नाटक
और तमिलनाडु के बार्डर पर बसा
एक छोटा सा शहर,,,
नीलगिरी
पहाड़ों के बीच बसे इस शहर की
खूबसूरती भी कशिश को इम्प्रेस
करने में नाकामयाब हो रही थी,,
ऊटी
को क्वीन ऑफ हिल्स कहा जाता
है यहां के नजारे इतने सुंदर
है कि कोई इनकी तारीफ किए बिना
रह नहीं पाता। कशिश क े साथ
ट्रेवल कर रहे उसके कुलिग पहले
से बहुत एक्साइटेड थे और अब
जब यहां पहुंच गये तो कैमरे
और मोबाइल फोन में इस खूबसूरती
को उतारकर अपने साथ ले जाने
की तैयारी कर रहे थे।
पर
पहाड़ों की ठंडी हवा,,
पेड़
पौधों की हरी चादर,,
साफ
हवा और नीला आसमान सब कशिश के
लिये जैसे बेमानी था उसे देखकर
ऐसा लग रहा था जैसे उसकी दुनिया
बेरंग हो,,
खैर
होटल आ गया था,,
चेक
इन करने के बाद सब अपने रूम
में चले गये। उस वक्त दोपहर
के 2
बज
रहे थे
थोड़ी
देर आराम करने के बाद कशिश
होटल की लॉबी में आई और रिस्पेशन
से पूछा कि यहां से सनसेट
प्वाइंट कितनी दूर है,,
जवाब
मिला 1
घंटा,,
कशिश
ने एक कैब मंगाने के लिये कहा
और अकेले ही सनसेट प्वाइंट
रवाना हो गई।
कशिश
के साथ आए बाकी लोग होटल के
कैफेटेरिया में थे उनमे से
एक की नजर वहीं कुछ खड़े एक
शख्स पर पड़ी,,,
ये
शख्स कुछ जाना पहचाना लग रहा
था। कोई पुराने साथी जैसा,,,,
कुछ
पल पहचानने की कोशिश के बाद
आखिरकार साफ हुआ कि ये तो अंश
है,,,
वो
हैरान रह गया अंश यहां ??
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