मंगलवार, 2 जुलाई 2013

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 19

अंश चला गया,,,,और कशिश वहीं खड़ी उसे जाते हुए देख रही थी,,अपनो से बिछड़ने में तकलीफ सबसे ज्‍यादा होती है, उसी पल से कशिश को अंश के न होने का एहसास होना शुरु हो गया था। वैसे तो अंश दूर रह कर भी हमेशा कशिश के साथ था। दोनों की दोस्‍ती की यही खासियत थी,,, न कुछ कहने की जरुरत थी न कुछ पूछने की,,, बस एहसास बातें करते थे,,, न हो कर भी हमेशा आस पास रहने का एहसास,,, जब कमजोर हुए तो दोस्‍ती की खुशबु से ताकत का एहसास,,,, हर खुशी, हर एक्‍साइटमेंट को दूसरे से दिल ही दिल में बांटने का एहसास,, ऐसी दोस्‍ती करीब रहने की मोहताज नहीं होती लेकिन फि‍र भी जो इतना खास हो वो हर खास चीज में साथ होना जरुरी हो जाता है।
उधर शायद अंश का भी यही हाल था न चाहते हुए भी उसे जाना पड़ रहा था। पहली बार उसे जाने में इतना दुख हो रहा था, कदम इतने भारी लग रहे थे कि जाना मुश्किल हो रहा था,, पर रुकना मुमकिन नहीं था अंश को जाना ही था चाहे या न चाहे,,,,,,,,,,,,,,,अंश को लग रहा था कि जैसे वो कुछ पीछे छोड़ जा रहा है ऐसा जो उससे जुड़ा है पर अब पीछे छूट रहा है।
अंश चला गया,, रास्‍ते भर अंश उन पलों को याद कर रहा था जो उसने कशिश के साथ गुजारे थे,,, वो मस्‍ती, वो हंसी,,, वो शरारतें,,, वो एक दिन जब अंश का जन्‍मदिन मनाने के लिये दोनों पूरा दिन साथ थे,, क्‍यों इस रिश्‍ते की दोनों की जिंदगी में इतनी अहमियत थी वो अब तक समझ नहीं पा रहे थे,,, बस ये पता था कि कुछ तो ऐसा है जो हमेशा दोनों को साथ रख सकता है चाहे वो साथ हो या न हो।



वैसे किसी की आपकी जिंदगी में क्‍या अहमियत है ये तभी समझ आता है जब वो दूर होता है कशिश के दिल के कोने में कुछ खाली हो गया था,, ऐसा खालीपन जिसे उसकी शादी की खुशियां भी भर नहीं पा रही है हर वक्‍त एक इंतजार रहता था उसे कि अंश उसे फोन करेगा या फि‍र कुछ तो खबर उसकी मिल ही जाएगी,, पर अंश अपने घर की उस परेशानी में उलझ गया था,, कशिश ने कई बार उसे फोन किया लेकिन नंबर लग नहीं रहा था,, थोड़ी टेंशन भी थी क्‍योंकि अंश कुछ बताकर नहीं गया था कि आखिर परेशानी थी क्‍या।



अब तो कशिश भी समझ रही थी कि उसे इस वक्‍त अंश को अकेला ही छोड़ देना चाहिए शायद,,,,,,,,,,,कशिश अपनी शादी की तैयारियों में बिजी हो गई। घर मेहमानों से भर गया था जैसे जैसे दिन नजदीक आ रहा था रस्‍मों रिवाजों के बीच समय कैसे भाग रहा था कुछ पता नहीं चला। पर अब भी कशिश इस सब के बीच अंश को ढूंढ रही थी,,,,,,,,,,,,,

शादी को बस एक दिन बचा था कशिश अब तक मान चुकी थी कि अंश कुछ बड़ी परेशानी में है इसलिये वो फोन तक नहीं कर पाया और शादी में शामिल होने का तो अब कोई सवाल ही नहीं उठता,,,, उसने मान लिया था कि उसका सबसे प्‍यारा दोस्‍त उसकी जिंदगी के इस सबसे बड़े दिन पर उसके साथ नहीं रहने वाला,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 

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