बुधवार, 22 मई 2013

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 18


आंसू क्‍यों था अंश भी इससे अनजान था। पर अंश ऐसे किसी ख्‍याल को अपने बीच आने नहीं देना चाहता था जिससे उसके और कशिश के बीच की दोस्‍ती पर कोई असर पड़े। उसने सोचा कि ये सब सोचने से अच्‍छा है कि वो भी कशिश का वैसे ही साथ दे जैसे कशिश ने उसका दिया।
दोस्‍त की खुशी में जो खुश हो वही तो सच्‍चा दोस्‍त होता है ना,,, अंश भी अब उतना ही अच्‍छा दोस्‍त बनने की कोशिश कर रहा था जितनी कशिश उसकी थी। कशिश से पूछा कौन है वो, तुमने कभी बताया ही नहीं,, हां अंश, वो कभी ऐसी कोई बात निकली नहीं ना और वैसे भी वो यहां था नहीं छह महीने से यूएस में था,,, अच्‍छा नाम तो बताओ,, अंश ने कशिश से पूछा,,,
ओह सॉरी,, मैंने अब तक नाम नहीं बताया ना,, उसका नाम सागर है,,,
सागर और मैं कॉलेज के समय से साथ है अच्‍छे दोस्‍त है वो मेरी हर बात जानता है उससे कुछ कहने या बताने की जरुरत नहीं पड़ती। अभी कशिश बोल ही रही थी कि अंश ने उसे टोक दिया,, इतना अच्‍छा है वो तो शादी के लिये हां कहने में पांच साल क्‍यों लगा दिये कशिश,,,
एक मिनट के लिये कशिश भी सोच में पड़ गई वो अंश की आंखों में देखने लगी,, शायद कुछ ढूंढ रही थी,,,,
तभी अंश का फोन बजना शुरु हो गया दोनों की बात वहीं रुक गई अब तो घर जाने का टाइम भी हो गया था। अंश पूरे टाइम कैब में फोन पर ही बात करता रहा और कशिश ये सोचती ही कि अंश ने ऐसा क्‍यों कहा।
इस सवाल का जवाब अब सिर्फ अंश को नही कशिश को खुद को भी देना था। सवाल आज फि‍र खड़ा था वही सवाल जिसका जवाब ढ़ूढने से बच रही थी कशिश,,, अपने आप से कई बार सवाल किया था उसने कि सागर ही क्‍यों,,, लेकिन इस सवाल के जवाब से पहले सागर का एक सवाल आता था कि मैं क्‍यों नहीं??,,,, बस तभी कशिश का सवाल कहीं दब जाता था।
दिन यूं ही गुजर रहे थे कशिश का सारा समय सागर के साथ गुजरने लगा और अंश भी आकृति के साथ बिज़ी था। प्‍यार के चक्‍कर में दोस्‍ती कहीं खो रही थी शायद,,, या फि‍र दोनों शायद अपने प्‍यार में ही दोस्‍त को तलाश रहे थे एक ऐसा दोस्‍त जो उनके साथ हमेशा रह सके,,,एक ऐसा दोस्‍त जो उसे छोड़कर कभी जायें ना,,, जिसके जाने का दुख न हो,,, जिसका इंतजार न करना पड़े,,,
कशिश और अंश दोनों अपनी जिंदगी में मस्‍त हो गये,, दोनों के घरों में शादी की बातें, तैयारी सब चलने लगी। अंश की शादी की तारीख आठ महीने बाद की निकली लेकिन कशिश की हां के बाद सागर और इंतजार करना नहीं चाहता था इसलिये शादी अगले महीने ही फि‍क्‍स कर दी गई। बस एक महीना था शादी की सब तैयारी करने में। कशिश ने ऑफि‍स से कुछ दिन की छुट्टि ले ली। लेकिन जाने से पहले अंश को धमकी भी दी कि अगर वो शादी की सारी रस्‍मों में मौजूद नहीं रहा तो जिंदा रहना भी कशिश मुश्किल कर देगी। हां अभी भी कशिश की खुराफात कम नहीं हुई थी अब तो वो और बढ़ने लगी थी क्‍योंकि सागर उसकी हर शैतानी में हमेशा उसके साथ रहता था शायद इसीलिये कशिश को शादी करने में कोई प्रोबलम नहीं थी उसने यही सोचा कि जिंदगी ऐसे ही हंसते खेलते गुजर जाएगी।
छु‍ट्टी और शॉपिंग की वजह से अंश और कशिश की बात अब बहुत कम होने लगी बस दिन के एक बार दो मिनट बस इतना हो जाये तो बहुत था। कशिश की शादी से ठीक एक हफ्ते पहले अंश के घर से फोन आया कुछ परेशानी थी जिसकी वजह से उसे घर जाना पड़ रहा था उसने कशिश को बताया लेकिन कशिश कुछ सुनने को तैयार नहीं थी,, उसने बस अंश से कहा कि तुम नहीं जा सकते,, इस वक्‍त,,, कैसे जा सकते है,,, मेरी शादी है और,,,
अंश ने उसे समझाने की कोशिश करने लगा कि उसका जाना जरुरी है,,, कशिश भी जानती तो थी कि कुछ जरुरी होगा तभी अंश ऐसे अचानक जा रहा है पर उसे कुछ अच्‍छा नहीं लग रहा था उसने अंश से कहा, ठीक है चले जाना पर पहले मुझसे मिल कर जाना,,,
अंश ने कशिश को मिलने के लिये बुलाया,,, शाम का वक्‍त्‍ा था,, उस दिन मौसम बारिश का भी था बस जैसे बूंदे बरसने ही वाली थी। अंश और कशिश जैसे ही मिले कशिश शुरु हो गई क्‍यों जा रहे हो अंश,, मत जाओ,, अंश मुस्‍कुरा कर बोला जाना पड़ रहा है वरना इस वक्‍त तुम्‍हें यहां छोड़ कर जाना नहीं चाहता था,, अच्‍छा बताओ तो हुआ क्‍या है घर में सब ठीक है ना,, कशिश ने पूछा
हां सब ठीक है बस मेरी जरुरत है मां को इसलिये,, कुछ काम निपटाने है जाना ही होगा। अंश ने कहा
कशिश ने अंश को जाने की इजाजत तो दे दी लेकिन उससे एक वादा लिया कि जैसे ही उसका काम खत्‍म हो जाएगा वो वापस लौट आएगा। अंश ने भी वादा किया कि वो कुछ भी करके कम से कम शादी के दिन तो आ ही जाएगा। अंश के जाने का समय हो रहा था और यहां से दोनों के अलग होने का भी। दो दोस्‍त एक बार फि‍र दूर जा रहे थे,,, कशिश ने मुस्‍कुरा कर अंश से हाथ मिलाया और उससे जल्‍दी आने का वादा किया,, भगवान की टांइमिंग भी कभी कभी कमाल होती है बूंदो को शायद इसी पल का इंतजार था बादलों से छूटकर बारिश की बूंदें बरसने लगी शायद इसलिये ताकि अंश और कशिश के आंख से जो बूंदे बरसने लगी थी उसे दोनों देख न पाये।












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