अंश और कशिश पूरी मेहनत से अपनी डेडलाइन से पहले काम करने की कोशिश में लगे थे,,, दोनों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी,,, बस यही चाहते थे कि ये काम समय पर पूरा हो जाए। दिन गुजरने के साथ टेंशन बढ़ तो रहा था लेकिन एक दूसरे को इसका एहसास होने नहीं दे रहे थे। बस एक लक्ष्य दिखाई दे रहा था।
एक दिन अचानक कशिश ने अंश को फोन किया,, उस वक्त रात के गयारह बच रहे थे,,,, अंश थक हार कर अपने घर पर आराम से सो रहा था। फोन की घंटी से उठा,,, देखा तो कशिश का फोन था,,, अंश ने फोन उठाने से पहले टाइम देखा,, रात के गयारह बजे कशिश क्यों फोन कर रही है,,, थोड़ी सोच में पड़े अंश ने फोन उठा लिया।
हां कशिश बोलो क्या हुआ,,,, अंश ने कहा,,, कशिश की आवाज से वो बहुत घबराई हुई लग रही थी,,,, अंश भी टेंशन में आ गया, पूछा,,, क्या हुआ कशिश कोई प्रोबलम है क्या , कुछ बोलो तो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
घबराई हुई आवाज में कशिश ने कहा,, अंश तुम्हें अभी ऑफिस आना होगा,,, जल्दी,,,,, कशिश बात क्या है,,, हुआ क्या है,,,, कुछ कहो तो,,, अंश बस तुम आ जाओ,,, अभी,,,,,, ये कहकर कशिश ने फोन रख दिया।
अंश को कुछ समझ नहीं आया पर उसे ये लग रहा था,, कि कुछ गड़बड़ तो जरुर है,,, फटाफट तैयार होकर जैसे तैसे अंश ऑफिस पहुंचा,,,
रात के 12 बजे रहे थे ऑफिस में कोई नहीं था,, पूरा ऑफिस खाली था,, कुछ अजीब सा अंश को लग तो रहा था लेकिन समझ नहीं आ रहा था कि आखिर हो क्या रहा है,, उसने फिर कशिश को फोन किया,, लेकिन कशिश ने फोन उठाया नहीं,,,
अंश अब उस कैबिन के बाहर पहुंच चुका था जहां वो दोनों काम करते थे,,, जैसे ही अंश ने गेट खोला,, सामने कशिश खड़ी थी जो मुस्कुरा रही थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, अब तो अंश को कुछ समझ नहीं आया आखिर हो क्या रहा है,,, अंश ने कशिश से पूछा,, क्या हुआ,,, तुम ठीक हो,, मुझे यहां इस वक्त क्यों बुलाया,,,
कुछ देर तक कशिश यूंही अंश को देखकर मुस्कुराती रही,, उसे बहुत मजा रहा था,,,, और अंश को टेंशन हो रही थी,,, अंश ने फिर से पूछा,, बात क्या है कशिश क्यों बुलाया मुझे?
इस बार कशिश ने बोलना शुरु किया,,, अंश दरअसल ये बात सुनकर शायद तुम्हें अच्छा न लगे पर बोलना जरुरी था इसलिए तुम्हें इस वक्त यहां बुलाना पड़ा,,, अंश बड़े ध्यान से कशिश की बात सुन रहा था,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
कशिश ने कहा अंश इससे पहले की मैं कुछ कहूं तुम्हें कुछ दिखाना है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,अंश ने हैरानी से देखा,,,,,
कशिश जहां खड़ी थी वहां से थोड़ा दूर हट गई,,,,, अंश ने अब जो देखा उसने उसके होश ही उड़ा दिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।
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