बुधवार, 3 अक्टूबर 2012

न तुम जानो, न हम पार्ट 9


चल कहीं दूर निकल जायें,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

बैचेन थी नियति को क्‍या कहूं,,,, फि‍र सोचा उसे सब बता देना चाहिए नहीं तो कल सुबह वो सचमुच मुझे सिद्धार्थ सर के साथ भेज देगी,,,, जो हम दोनों के लिए आसान नहीं होगा,,,, मैंने नियति को बुलाया,,,, एक रूम में जाकर,,, मैंने उसे सब बता दिया,,,, पूरी कहानी चुपचाप नियति सुनती रही,,,, उसे भी समझ नहीं आ रहा था कि ये सब कब हुआ,,, और इतने वक्‍त तक उसे क्‍यों पता नहीं चला कि जिस लड़की की बात सिद्धार्थ ने उसे चार साल पहले बताई थी वो जिया ही थी,,,, दरअसल नियति ये तो जानती थी कि उसके रिंकू भइया यानि सिद्धार्थ ने दिल्‍ली किसी लड़की की वजह से छोड़ी और चंडीगढ़ आकर रहने लगे लेकिन उसे उस लड़की का नाम,, पता,, कुछ मालूम नहीं था,,, अब जिया की कहानी ने मिसिंग लिंक को जोड़ दिया था,,, नियति की समझ में सब आ गया उसने जिया को वहीं रूकने के लिए कहा,,, और जैसे ही बाहर निकली कमरे के दरवाजे के एक कौने पर सिद्धार्थ खड़ा था,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सिद्धार्थ ने नियति और जिया की सारी बातें सुन ली थी,,,, अब तो सिद्धार्थ भी ये जान गये थे कि जिया सिर्फ अपने पापा की ट्रांसफर की वजह से लंदन नहीं गई थी,,,,,, सिद्धार्थ,, को देखकर नियति वहां से चली गई,,, उसे समझ आ गया था कि अब उसे कुछ करने की जरूरत नहीं है,,,,,,जिया जानती है सिद्धार्थ की हकीकत और सिद्धार्थ को भी जिया के दिल का हाल मालूम है,, अब फैसला इन दोनों को करना है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
उसी रात नियति का संगीत था,,, सब लोग झूम रहे थे शादी की खुशियां मना रहे थे पर उस भीड़ में भी तन्‍हा थे जिया और सिद्धार्थ,,,,,,, दोनों के दिल दिमाग में हलचल मची थी,,,, भावनाओं का ऐसा सैलाब उठ रहा था जिसे रोक पाना नामुमकिन था,,,, जिया उस भीड़ से अलग हटकर बाहर पार्क में बने एक ब्रिज पर खड़ी थी,,,,,,,,,,,,, सोच रही थी कि अब आगे क्‍या होगा,,,,, सिद्धार्थ उसे ढ़ूढता रहा उससे बात करनी जरूरी थी,,,, आखिर किसी को तो पहल करनी ही थी सिद्धार्थ ने तय किया कि वो जिया के साथ जरूर जाएगा इसी बहाने शायद मौका मिल जाये उससे बात करने का,,,,, फि‍लहाल तो जिया को अपने साथ जाने के लिए राजी करना सिद्धार्थ का पहला काम था,,, पर वो है कहां,,,,,,,,, सब जगह ढूंढा और आखिर जिया दिखाई दी,,,, चांद की रोशनी में जिया एक ब्रिज पर खड़ी थी,,,, आस पास फूलों के रंग और खुश्‍बू जैसे परफेक्‍ट सेटअप था दोनों के लिए,,,,,,,,,,,,,,,अब तो बात करनी पड़ेगी,,,,,,,,,,,,,,,,,,ये सोचकर सिद्धार्थ जिया के पास आया और उससे कहा तुम कहां चली गई थी,,,,,,,,,जिया ने मुड़कर देखा तो वो सामने खड़े थे,,,, क्‍यों गई थी तुम,,,,,,,,,,,,,,जिया के पास कोई जवाब नहीं था उसने कहा मेरा जाना जरूरी था,,,,,,,,,,,,,,,,शायद यही सही था,,,,,,सिद्धार्थ को लगा शायद ये सही वक्‍त नहीं है ये बात करने का तो उसने बात बदल दी,,,,,,, खैर छोड़ो ये बताओं अभी क्‍या कर रही हूं,,,,,,,,,बातों से बातें निकली और दोनों बातें करने लगे,,, बात करते करते कब वक्‍त गुजर गया पता ही नहीं चला,,,, बातों बातों में सिद्धार्थ ने जिया को राजी भी कर लिया अपने साथ शॉपिंग पर चलने के लिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।


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