पहली पहली बार हैं,,,,,
जिया और सिद्धार्थ के बीच इतने सालों में जो नहीं हुआ था वो
अब हो रहा था,,, दोनों के लिये ये किसी सपने के सच होने जैसा था,,,, अपने ख्यालों
में एक दूसरे से बात करते थे लेकिन अब सच में एक दूसरे से बात कर रहे थे,,,, संगीत
की धुनों को सच में इंजॉय कर रहे थे दोनों,,, दोनों को इंतजार था सुबह होने का,,,,
जब दोनों साथ होंगे,,, अकेले,,,,,,,लेकिन उससे पहले ये रात भी खूबसूरत लग रही
थी,,,, अब तो नियति की शादी की खुशी का रंग दोनों पर दिख रहा था जिस खुशी की तलाश
इतने सालों से थी वो सामने थी,,, कोई शक,,,, कोई शिकवा जिंदगी से दूर दूर तक नहीं
था,,, बस इस पल को जी भर का जी रहे थे,,,, एक दूसरे की आंखों में खोकर दुनिया को
भूल गये थे बस सामने थी सुनहरे सपनों की नगरी,,, जहां से आगे सिर्फ खुशियां नजर आ
रही थी,,,, ऐसा इसलिए था क्योंकि दोनों जानते थे कि सच क्या है,,, वो सच जो उनकी
जिंदगी को बदलने के लिए काफी था,,,
रात की चांदनी कब सुबह की लाली में बदल गई इसका अंदाजा भी
दोनों को नहीं लगा,,, अपने सपनों की दुनिया में खोए दोनों ने सुबह की पहली किरण के
साथ नये दिन की शुरूआत की। दोनों निकल पड़े जिया के लिए शॉपिंग करने। कितना अच्छा
लगता है जब सब कुछ पहली बार होता है दोनों एक दूसरे की पंसद से अंजान थे लेकिन फिर
भी सिद्धार्थ क कोशिश कर रहे थे कि वो जिया की मदद कर दें ड्रेस सिलेक्ट करने
में।
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