दो
साल पहले दिल्ली विधानसभा
चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज
करने वाली आम आदमी पार्टी की
हालत क्या इतनी खराब हो गई है
कि अपने विधायक भी बगावत पर
उतर आये हैं...
दिल्ली
में नगर निगम चुनावों से ठीक
पहले आम आदमी पार्टी को लगा
एक और झटका कही चुनाव में आप
पर भारी न पड़ जाये...बवाना
से आप के टिकट पर 50
हजार
के अंतर से चुनाव जीतने वाले
विधायक का पार्टी छोड़ना आप
से मोहभंग का एक और उदाहरण बन
गया है
आम
आदमी पार्टी वही पार्टी है
जो बहुत कम समय में दिल्ली में
अपना जनाधार मजबूत करने में
कामयाब हुई थी....अपने
67 विधायकों
पर गर्व करने वाले दिल्ली के
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
फिलहाल मुसीबतों से घिरे नजर
आ रहे हैं दो साल में आप सरकार
का ये हाल हो गया है कि एक विधायक
इस्तीफा दे रहा है और दो और
पहले से बगावत का झंडा बुलंद
किये हुए हैं एमसीडी चुनाव
की आहट क्या आम आदमी पार्टी
के लिये मोहभंग होने की शुरुआत
हैं ये सवाल खड़ा हो रहा है
वैसे
चुनाव के वक्त इस तरह पार्टियों
में उठा पटक अक्सर देखने को
मिलती हैं लेकिन राजधानी
दिल्ली में ऐसा कुछ होगा ये
सीएम अरविंद केजरीवाल ने कभी
नहीं सोचा होगा..
आप
सरकार को सत्ता में आये दो साल
ही हुए है तीन साल का वक्त अभी
और बाकी है और ऐसे में आप के
बवाना से विधायक वेद प्रकाश
का बीजेपी में शामिल होना आप
के लिये बड़ा झटका कहे तो गलत
नहीं होगा.
वेद प्रकाश
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मनोज
तिवारी की मौजूदगी में बीजेपी
में शामिल हुए...
बीजेपी
में शामिल होने के बाद वेदप्रकाश
के तेवर भी वही थे जो आप छोड़ने
वाले हर नेता के होते हैं
वेदप्रकाश भी केजरीवाल पर
अनदेखी का आरोप लगाते हुए उन
पर बरसते नजर आये
देवेंद्र
सहरावत और पंकज पुष्कर ने भी
इससे पहले आप के खिलाफ बगावत
का झंडा बुलंद किया लेकिन वेद
प्रकाश के बीजेपी में शामिल
होने के बाद अब आम आदमी पार्टी
की मुश्किलें जाहिर तौर पर
बढ़ जाएगी...जाते
जाते वेद प्रकाश ने ये भी कह
दिया कि अब आम आदमी पार्टी के
लगभग 30-35
विधायक
नाराज चल रहे हैं..
और आगे
और झटके aap
को लग
सकते हैं
आम
आदमी पार्टी अपने विधायक के
बीजेपी में जाने से बौखलाई
नजर आई पाटीर् का कहना है कि
बीजेपी आप को तेाड़ने की कोशिश
करेगी तो जनता इसका जवाब चुनाव
में देगी
फिलहाल
विधायकी से वेद प्रकाश के
इस्तीफे के बाद अब यहां दोबारा
चुनाव होगा..
यानी
इसका सीधा मतलब ये है कि 70
में
67 सीटें
जीतने वाली आम आदमी पार्टी
के लिए एमसीडी चुनाव के बाद
विधानसभा की एक सीट के चुनाव
में भी पार्टी को बड़ी परीक्षा
से गुजरना पड़ेगा और साथ ही
आप से भंग होते मोह के पीछे
आखिर वजह क्या है इस बारे में
भी पार्टी को सोचना पड़ेगा
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