शुक्रवार, 17 मार्च 2017

अन्ना एक फिर केजरीवाल से सहमत नहीं दिखे


ईवीएम को लेकर विवाद की शुरुआत भले ही यूपी से हुई हो लेकिन इसके जरीये दिल्ली में राजनीतिक हलचल तेज हुई केजरीवाल के बैलेट पेपर से चुनाव की मांग को एलजी अनिल बैजल और चुनाव आयोग ने खारिज किया लेकिन ये मुद्दा पुराने सहयोगी अन्ना हजारे के लिये भी बड़ा हो गया... अन्ना एक फिर केजरीवाल से सहमत नहीं दिखे और विचारों का पुराना मतभेद एक बार फिर दिखाई दिया

इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल पिछले काफी सालों से चुनाव में होता रहा है इसके चलन से लेकर अब तक कई चुनाव हुए लेकिन कभी इस पर सवाल नहीं उठे... यूपी में बीजेपी की प्रचंड जीत देश की राजनीति में हावी होती बीजेपी की तस्वीर दिखा गई तो कई पार्टियों को विरोध के मुद्दे भी दे गई... ईवीएम को लेकर सवाल उठाने जब मीडिया के सामने केजरीवाल आये और बैलेट पेपर के परंपरागत वोटिंग सिस्टम की तरफ वापस लौटने को कहा तो अन्ना हजारे भी चुप नहीं रह पाये... केजरीवाल से साथ तो बहुत पहले छूट गया था केजरीवाल का अब विचारों का मतभेद खुलकर सामने आ रहा है एक वक्त था जब अरविंद केजरीवाल के मार्गदर्शक रहे थे अन्ना हजारे... केजरीवाल भले ही अन्ना की छाया से निकल कर अपनी अलग राह पर चल रहे हो लेकिन अन्ना केजरीवाल के विचारों को आगे बढ़ने वाला नहीं पीछे लौटने वाला बता रहे हैं गुरुवार को अन्ना ने कहा है कि अब ऐसा समय है जब बड़ी प्रौद्योगिकी वाली प्रगति हो रही है... ऐसे में बैलेट पेपर की तरफ लौटना पीछे जाने जैसा होगा...
अन्ना हजारे के साथ आंदोलन के वक्त सुर में सुर मिलाने वाले कब उनके खिलाफ हो गये इससे हर कोई वाकिफ है हालांकि कई साल बीत गये दोनों अलग हुए लेकिन आज भी बात जब भी अन्ना और अरविंद की होती है तो दोनों अलग दिशाओं में बात करते दिखते हैं कभी कदम कदम से मिलाने वाले दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अन्ना हजारे के बयान पर पलटवार किया है...और कहा कि प्रतिक्रिया क्या दें अन्ना के बयान पर और भी बहुत काम है करने को...

जब अन्ना राजनीति को कीचड़ कहते थे तो अरविंद केजरीवाल वकालत करते थे कि यही एक रास्ता है भ्रष्टाचार जैसे दीमक से लोगों को बचाने का... नई बातों और नए विचारों को तवज्जों देने वाले केजरीवाल अब टेकनॉलोजी छोड़ कागज की तरफ बढ़ने की बात कर रहे हैं ऐसे में अन्ना का उनसे सहमत न होना लाजमी से लगता है... बहरहाल सवाल फिर यही है कि बैलेट पेपर की मांग सिर्फ पारदर्शी चुनाव कराने भर के लिये है या हार छुपाने का एक और बहाना...



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