सोमवार, 15 सितंबर 2014

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 12


रात के बाद फिर सुबह हुई,,, काश्वी और दूसरे फोटोग्राफर को आज बाहर भेजा जा रहा था जहां वो अपने फोटोग्राफी के हुनर को निखार सके,,, अपने अपने कैमरे के साथ सब तैयार थे,,, काश्वी की नजर अब निष्कर्ष पर पड़ी तो सर हिलाकर उसे हेलो कहा,,,, निष्कर्ष ने भी मुस्कुराकर जवाब दिया,,,,

थोड़ी देर में वहां एक बस आ पहुंची जिसमें सवार होकर सभी को निकलना था पर जब काश्वी उस बस में चढ़ने लगी तो निष्कर्ष ने उसे रूकने का इशारा किया,,, काश्वी और उसके पार्टनर को निष्कर्ष ने रोक लिया,,,, काश्वी को कुछ समझ नहीं आया लेकिन वो उस वक्त कुछ बोल भी नहीं पाई,,,,

जब सब चले गये तो काश्वी निष्कर्ष की ओर देखने लगी उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उसकी टीम को बस में क्यों नहीं जाने दिया गया,,,, पूरी व्यवस्था देखने के बाद निष्कर्ष काश्वी और उसके पार्टनर रोहन के पास आया,,, और कहा,,, चलो चलें,,,,

वो दोनों हैरान थे,,, और इसी हैरान में निष्कर्ष से सवाल किया,,, कहां?

निष्कर्ष ने मुस्कुरा कर कहा अरे मैं लेकर जा रहा हूं स्पॉट पर अपनी कार में चलो,,,,,,

अब भी दोनों को कुछ समझ नहीं आ रहा था पर फिर कोई सवाल नहीं किया और चुपचाप जाकर निष्कर्ष की कार में बैठ गये,,, कार में तीनों चुप थे पर काश्वी से रहा नहीं जा रहा था वो सीधे निष्कर्ष से पूछने में हिचकिचा रही थी तो उसने एक एसएमएस किया और निष्कर्ष से पूछा,,,, हम बस में क्यों नहीं गये,,, सीट तो थी,,,,

ड्राइव करते हुए निष्कर्ष ने अपना फोन देखा तो काश्वी का मैसेज देखकर चौंक गया,,, उसकी कार की पिछली सीट पर बैठी काश्वी उसे एसएमएस कर रही थी,,, निष्कर्ष ने मैसेज देखा तो मुस्कुराने लगा,,, अपनी हंसी रोककर उसने कार के मिरर से पीछे बैठी काश्वी को देखा और फिर वापस ड्राइव करने लगा,,,,

काफी देर तक कोई जवाब नहीं मिला तो काश्वी ने फिर एसएमएस किया,,, बोलो अभी हम क्यों कार में जा रहे हैं,,,,,,

अब निष्कर्ष का फोन जब रिंग हुआ तो उसने काश्वी के मैसेज को पढ़कर गाड़ी सड़क किनारे की एक दुकान पर रोक दी,,,,

गाड़ी रुकते ही काश्वी की सांस अटक गई,,, उसे लगा अब तो पक्का निष्कर्ष की डांट सुनने को मिलेगी,,, बार बार उसे डिस्टर्ब जो कर रही थी काश्वी,,,,

डरी सहमी काश्वी इंतजार कर रही थी कि अब कोई शायद कोई उंची आवाज उसे सुनने को मिलेगी लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं,,, निष्कर्ष कार से बाहर निकलकर उस दुकान पर जाकर कुछ खरीदने लगा,,,, काश्वी की हिम्मत नहीं हो रही थी निष्कर्ष की तरफ देखने की,,, उसी वक्त काश्वी के फोन की घंटी बजी,,, निष्कर्ष ने काश्वी की बात का जवाब दिया था,,,,

मैसेज में लिखा था,,,, तुम्हें बस में प्रोब्लम होती है न इसलिये नहीं जाने दिया,,,,

मैसेज पढ़कर काश्वी सन्न रह गई,,, उसके लिये निष्कर्ष खुद ड्राइव करके कार ले जा रहा था ये बात हजम करना थोड़ा मुश्किल था क्योंकि फिर एक सवाल काश्वी के मन में उठा,,,, क्यों,,, उसके लिये ही क्यों,,,,

काश्वी ने फिर से मैसेज किया,,, सिर्फ मेरे लिये इतनी दूर तक आये आप

निष्कर्ष गाड़ी की तरफ बढ़ रहा था चलते चलते उसने काश्वी का मैसेज पढा तो रुक कर उसे रिप्लाई करने लगा,,, निष्कर्ष ने लिखा,,, अभी अपनी फोटोग्राफी के बारे में सोचो बाद में बात करेंगे,,,,

काश्वी चुप हो गई उसे लगा अभी और बात करना शायद ठीक नहीं,,, एक घंटे के अंदर वो उस जगह पर थे जहां उन्हें फोटो शूट करना था,,,

पहाड़ों के बीच से एक नदी गुजर रही थी जहां के पानी पर आसमान की नीली और आस पास लगे पेड़ों की हरी छाया पड़ रही थी बहती नदी का रंग कहीं सफेद,, कहीं बेरंग तो कही हरा नीला होता नजर आ रही था,,,, इस जगह की खूबसूरती को कैमरे में कैद करना था उन्हें,,,, हर टीम को एक दायरा बताया गया जिसमें रहकर उन्हें अपने कैमरों के रोल में इस जगह का एक एक जर्रा कैद करना था,,,,
काश्वी और उसके साथी को जो जगह मिली वो नदी का किनारा,,,,वहां लगे खूबसूरत पेड़ थे,,, इस जगह को ध्यान से देखने के बाद काश्वी को जिस चीज ने सबसे ज्यादा आकर्षित किया वो थी पानी की लहरें,,,बहती नदी की कलकल आवाज और पानी पर पड़ रही धूप की किरणों को देखकर काश्वी के चेहरे पर अलग सी रौनक देखी निष्कर्ष ने,,,

काश्वी अपने कैमरे को लेकर इन पलों को कैद कर लेना चाहती थी,,, प्रकृति के इस खास नजारे की खासियत अपने कैमरे के एंगल से देखकर उन्हें तस्वीरें बनाकर वापस ले जाना चाहती थी,,,,

काफी देर तक सब अपने काम में लगे रहे,,,, निष्कर्ष भी अपने लैप टॉप पर अपना काम करता रहा,,, कुछ देर बाद जब सब शूट में बिजी थे तो निष्कर्ष काश्वी के पास गया,,, और पूछा,,,, कैमरा ठीक चल रहा है ना फोकस में प्रोब्लम तो नहीं आ रही,,,,,

काश्वी ने मुड़कर देखा और कहा,,, नहीं सब बढिया है आपने अच्छा समझाया था कल,,, अब प्रोब्लम नहीं है,,,,

गुड अच्छा है ये जगह अच्छी है न फोटोग्राफी के लिये हर साल यहां आता हूं पर हर बार ये जगह नई सी लगती है,,,, निष्कर्ष ने कहा

आप हर साल यहां आते हैं,,,, काश्वी ने पूछा

हां पापा यही रहते हैं तो उनसे मिलने यहां आना पड़ता है और ये वर्कशॉप भी हम हर साल करते हैं तो आना हो ही जाता है,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया

वो यहां आप दिल्ली में ऐसा क्यों,,,,अपने कैमरे का फोकस एडजस्ट करते हुए काश्वी ने पूछा

निष्कर्ष ने काश्वी की तरफ देखा,,,, काश्वी थोड़ी घबरा गई,,, और नजरें झुका कर बोली आपको जवाब नहीं देना तो कोई बात नहीं,,,,

निष्कर्ष हंसने लगा,,, और कहा,,, तुम सवाल बहुत करती हो,,,,

और आप जवाब क्यों नहीं देते,,, काश्वी ने भी पलट कर कहा

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 13

असाइनमेंट खत्म होने वाला था काश्वी अपने काम के साथ साथ निष्कर्ष से बात भी कर रही थी,,, ये एक नई दोस्ती की शुरूआत थी,,,, हां ये जरूर था कि अब भी वो एक दूसरे को सिर्फ पहचानते थे जानने के लिये वक्त जो चाहिए था,,, लेकिन तीन चार दिन के हिसाब से सब ठीक चल रहा था,,,,,

निष्कर्ष और काश्वी दोनों को एक बात अजीब लग रही थी कि जब भी एक दूसरे के साथ नहीं होते तो एक दूसरे के बारे में सोचते हैं,, ऐसा होना स्वाभाविक भी था दोनों के लिये ये नया एहसास था कुछ तो था जो उन्हें जोड़ रहा था

अपना काम खत्म कर काश्वी और बाकी लोग वापस लौटने की तैयारी करने लगे,,, वापस लौटकर सबने अपने अपने कैमरे से रोल निकाल कर फोटो डेवलप करने के लिये दे दिया,,,,,

सब इस इंतजार में थे कि वो अपना पहला एसाइनमेंट देख सके,,,, काश्वी वहीं कोरिडोर के एक छोर से दूसरे छोर में चक्कर लगा रही थी,,, निष्कर्ष उसे दूर से काफी समय तक देखता रहा फिर उसके पास आकर बोला,,,
इतनी नर्वस क्यों हो आई एम श्योर तुमने अच्छा काम किया है,,,,

पता नहीं,,, जब तक देखती नहीं तब तक टेंशन रहेगी,,, काश्वी ने जवाब दिया

पता है तुम्हें देखकर मुझे अपने स्कूल के दिन याद आ रहे है रिजल्ट के पहले ऐसे ही लगता था,,,, निष्कर्ष ने मुस्कुराते हुए कहा

काश्वी भी हंसने लगी,,, हां मुझे भी ऐसा ही लग रहा है,,,काश्वी ने जवाब दिया

अच्छा रूको तुम्हारी टेंशन थोड़ी कम करके आता हूं पता करता हूं कितना वक्त लगेगा और,,, ये कहकर निष्कर्ष वहां से चला गया

कुछ देर बाद जब वो लौटा तो काश्वी फिर उसी तरह चहलकदमी कर रही थी,,,, काश्वी के पास आकर निष्कर्ष ने कहा अभी तो एक घंटा और लगेगा,,,,, चलो एक काम करते हैं तुम्हें कॉफी पिलाता हूं,,,, चले,,,

काश्वी ने कोई जवाब नहीं दिया तो निष्कर्ष ने फिर कहा, चलो न काश्वी यहां रहने से कोई फायदा नहीं वो मुझे फोन कर देंगे,,, टाइम पास हो जाएगा और तुम्हारी टेंशन भी कम होगी,,,,

इस बार काश्वी ने हामी भर दी और दोनों कुछ दूर बने एक कॉफी होम में जाकर बैठ गये,,,,,

निष्कर्ष ने बात शुरू की,,, बताओ काश्वी तुम्हें फोटोग्राफी क्यों पंसद है,,,,

सवाल सुनकर काश्वी मुस्कुराने लगी क्योंकि बात उसी चीज की हो रही थी जो उसे सबसे ज्यादा प्यारी थी,,,,, मुझे घूमना पंसद है नई जगह देखना पंसद है नई चीजों को, नई बातों को जानना पंसद है और एक प्रोब्लम है जब भी किसी अच्छी जगह जाती हूं तो लगता है वहीं रह जाउं लेकिन ये पोसिबल नहीं तो उस जगह की यादें कैमरे में कैद करके अपने साथ ले आती हूं,,, वक्त को रोक कर उसे अपनी मुट्ठी में करना चाहती हूं ताकि बीत जाने के बाद भी जब उसकी तस्वीरें देखूं तो उसे फिर से जी सकूं,,,,,,,,,,,,,,,,

और आप इंजीनियर कैसे बन गये,,,, काश्वी ने सवाल किया

मैं,,, मुझे चीजों को रोकना नहीं उन्हें बहने देना अच्छा लगता है,, कुछ ऐसा करना अच्छा लगता है जिससे किसी की जिंदगी आसान कर सकूं,,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया

मतलब कैसे,,, काश्वी ने पूछा

देखों सामने उस पहाड़ के पास जो छोटा सा गांव देख रही हो वहां बिजली नहीं पहुंच सकती,,, बिजली पहुंचाने के लिये बहुत बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरुरत थी जब तीन साल पहले यहां आया तो देखा वहां के लोग ऐसे ही जी रहे थे सालों से,,, जब वापस लौटा तो दिमाग लगाया और एक ऐसा प्रोजेक्ट बनाया जिससे लोग अपने घर में ही बिजली पैदा कर सके और उसका इस्तेमाल कर सके,,, दो साल पहले मेरा एक्सपेरिमेंट कामयाब रहा और यहां सोलर एनर्जी से सबके घरों को बिजली मिली,,, थोड़ी ही सही पर रोशनी तो है,,,, बस यही करना चाहता था,,,,निष्कर्ष ने जवाब दिया

काश्वी को निष्कर्ष की ये बात अच्छी लगी,,, काफी देर तक दोनों बात करते रहे,,,
तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 14

निष्कर्ष अपने इंजीनियर बनने की बात काश्वी को बता रहा था और बातें करते करते वक्त कैसे गुजर गया दोनों को पता ही नहीं चला,,, इसी बीच निष्कर्ष को फोन आया कि वो फोटो तैयार हो गई हैं और उत्कर्ष ने सबको हॉल में बुलाया है

निष्कर्ष और काश्वी फटाफट वहां से चल दिए,,, हॉल में सब लोग जमा थे, जो फोटो असाइनमेंट मिला था उस पर डिस्कशन हो रहा था,,, एक एक कर सबकी फोटोग्राफ को प्रोजेक्टर पर दिखाया उसका एनालिसिस किया जा रहा था,,, काश्वी वहीं एक कोने पर निष्कर्ष के साथ खड़ी थी,,, निष्कर्ष ने उसे आगे जाने को कहा तो काश्वी ने सर हिलाकर मना कर दिया,,,,,,काश्वी का चेहरा लाल था शायद डर से,,, शायद वो नर्वस थी,,,,काश्वी को देखकर निष्कर्ष ये समझ गया था और उसने धीरे से उसके कान में कहा,,, घबराओ मत तुम्हारी तस्वीरें सबसे अच्छी होगी,,,,

काश्वी ये सुनकर मुस्कुराने लगी,,, कुछ पल के लिये उसका डर भी गायब हो गया,,,,, निष्कर्ष जाने लगा तो काश्वी ने मुड़कर देखा,,, और सर हिलाकर उसे वहीं रुकने को कहा,,,,,

कुछ देर बाद काश्वी का नाम अनाउंस हुआ और उसकी तस्वीरें दिखाई गई,,,,,काश्वी की सांस जैसे अटकी हुई थी लेकिन उत्कर्ष के चेहरे के भाव देखकर उसका डर कुछ कम हो रहा था

उसकी तस्वीरों का रंग था नीला,,,, नीला आसमान खुला हुआ सा,,,, जिसमें उड़ते पंछी उसके खुलेपन का एहसास करा रहे हैं,,,, हल्के नीले रंग पर सफेद बादल के टुकड़े जैसे नई नई आकृतियां बना रहे हैं,,,, एक तस्वीर में बादलों से झांकता चमकता सूरज भी था,,,, जिसकी किरणें जब नीले पानी पर पड़ती है तो पानी को सुनहरा कर देती है जैसे सब कुछ रोशन हो गया हो,,,, कैसे सूरज का रंग नीले रंग को और चमकदार करता है,,, एक तस्वीर में तो आसमान और जमीन का मिलन था और उसके बीच पहाड़ों पर चमकती सफेद बर्फ,,,,,, दूर कहीं कोई चरवाहा जानवरों को लेकर गुजर रहा था,,,, हरा, नीला और पानी का सुनहरा रंग सब देखकर हर कोई उसकी गहराई को समझने की कोशिश कर रहा था,,,,, इस बार निष्कर्ष की आंखों में भी पानी की हल्की लकीर उतर आई थी,,,,,शायद अब उसे भी काश्वी की तस्वीरों में जिंदगी की झलक दिखाई दी थी,,,,

कुछ तस्वीरें सुकून देती है उनमें छुपी कहानी को समझ ले तो बहुत कुछ पता चलता है प्रकृति के हर कण में जिंदगी की सार छुपा होता है खुला नीला आसमान कहता है कि अपने विचारों को भी खोल दो,,, हर बात को खुले मन से सुनो और खुली आंखों से उसका दीदार करो,,,,, जब उसी आसमान पर सफेद बादल आतें तो वो उसी तरह आसमान में हलचल पैदा करते हैं जैसे हमारी जिंदगी में किसी के आने या जाने से होती है,,,,, कुछ बादल सफेद होते हैं यानि वो लोग जो हमें खुशी दे जाते हैं,,,,, और कुछ काले जैसे दुख के समय होता है कभी कभी यही काले बादल पूरा आसमान घेर लेते हैं जैसे कभी छटेंगे नहीं,,, हर ओर दुख का अंधेरा जैसे हमारे जीवन में होता है लेकिन इन्हीं बादलों से लड़कर जब सूरज अपना रास्ता बनाता है तो सब सुनहरा हो जाता है पानी पर सूरज की किरणों की परछाई दिखने लगती है,, ये वो वक्त होता है जब बड़ी मुसीबत से निकल हम नये सफर पर चल निकलते है नए मंजिल को पाते हैं,,,,, मुस्कुराते हैं जैसे नदी झूमती हुई पहाड़ों से निकलती है और अपना रास्ता बनाती है,,, ये नदी भी कई पड़ावों से गुजरती है कभी उपर से नीचे गिरती है और कभी शांत किसी समझदार इंसान के मन की तरह,,, बिना किसी तूफान के बहती जाती है,,,,,

पता नहीं उस हॉल में कितने लोगों को काश्वी की तस्वीरों में छुपी कहानी नजर आई लेकिन दो लोगों के मन की बात काश्वी उनके चेहरे पढ़कर जान गई थी,,,, एक उत्कर्ष जो काश्वी की तारीफ करते नहीं थक रहे थे और दूसरा निष्कर्ष जो कुछ कह नहीं पा रहा था पर उसकी खामोशी बहुत कुछ कह गई थी,,,,वैसे भी हर बात बतानी जरूरी नहीं होती,,,,, अब डर गायब हो गया था काश्वी के चेहरे से,,,,, सिर्फ सुकून था कि उसने जो काम किया वो सही था,,,,,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 15

करीब दो घंटे तक सबकी तस्वीरों पर खूब चर्चा हुई गलतियों और खूबियों को बताने के बाद उत्कर्ष वहां से चले गये,,,, निष्कर्ष अब भी चुप था उसने काश्वी से कोई बात नहीं की,,, दोनों वहां से कोरिडोर की तरफ निकले,,,, काश्वी खुश थी उसके चेहरे पर मुस्कान थी,,, लेकिन निष्कर्ष ने कुछ नहीं कहा,,, उसके हाथ में काश्वी की तस्वीरें थी जिसे वो लगातार देख रहा था,,,,,

काश्वी ने उससे पूछा कैसी है कौन सी अच्छी लगी?

निष्कर्ष अब भी चुप था,,, उसने कुछ नहीं कहा,,,,,और वहीं रुक गया,,,

काश्वी कुछ कदम आगे निकल गई पर उसे एहसास हुआ कि निष्कर्ष उसके साथ नहीं चल रहा,,,, वो रुकी और पीछे मुड़ी

क्या हुआ,,, कहां खो गये,,, कुछ बोलो तो काश्वी ने कहा

निष्कर्ष ने काश्वी की तरफ देखा और कहा चलो तुम्हें कुछ दिखाता हूं,,,, ये कहकर निष्कर्ष वहां से चल दिया,,,,

काश्वी उसके पीछे चल रही थी सैकंड फ्लोर के दूसरे कमरे का गेट निष्कर्ष ने खोला,,,, निष्कर्ष अंदर जाकर कुछ ढूंढने लगा,,,, पर काश्वी उस कमरे को ध्यान से देख रही थी,,,, पहाड़ों के बीच वो कमरा जैसे राजस्थान के किसी गांव की तस्वीर पेश कर रहा था वहां की हर एक चीज में कुछ अलग सी बात थी,,,, काश्वी हैरान थी पर कुछ नहीं कहा पहले वो ये जानना चाहती थी कि आखिर क्यों निष्कर्ष उसे वहां लाया और वो ढूंढ क्या रहा है

कुछ सैकंड में निष्कर्ष को वो चीज मिल गई एक फोटो एलबम थी,,,, उसे खोलकर निष्कर्ष ने काश्वी को दिखाया,,, उसमें लगी कुछ पुरानी फोटो थी जो बिलकुल वैसी ही थी जैसी काश्वी ने ली थी,,,, नीला रंग,,, नीला पानी और जिंदगी की कहानी बिलकुल वही अंदाज था,,,,, काश्वी देखकर हैरान थी,,, उसने निष्कर्ष से पूछा,,, ये फोटो किसकी की है ये तो बिलकुल वैसी ही है,,,,

निष्कर्ष मुस्कुराया और कहा,,, हां देखो बिलकुल तुम्हारी तस्वीरों की तरह हैं न,,,,,

हां एकदम वही है पर ये काफी पुरानी लग रही है कितना अमेजिंग है ये,,,, बताओ तो किसकी है ये,,,,, काश्वी ने पूछा

पापा ने ली थी ये फोटो जब वो पहली बार यहां आए थे,,, उस वक्त वो बड़े फोटोग्राफर नहीं थे बस यूं ही थोड़ा बहुत फोटोग्राफी करते थे,,, जब मां से पहली बार मिले तो उन्होंने यही फोटो दिखाई थी और तब से ये फोटो सिर्फ मां के लिये थी,,, इसे कभी किसी एग्जिबिशन में नहीं लगाया गया,,,, और अब देखो तुमने भी वैसी ही फोटो खींची,,,,,,,,,


तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 16

काश्वी बहुत ध्यान से उन तस्वीरों को देखने लगी,,, हूबहू वही,,, वहीं अंदाज और वैसी ही सोच,,,, क्या दो लोग एक से हो सकते है,,, या उनका नजरिया एक सा हो सकता है अलग अलग बैकग्राउंड,, अलग समय में रहे दो लोगों की तस्वीरें एक सी कैसे,,, ये सवाल काश्वी और निष्कर्ष के मन में उठ रहे थे पर कुछ चीजों हमारी समझ के बाहर होती है वो बस होती हैं,,,,

काश्वी के लिये ये एहसास बहुत अलग था कि वो एक सफल फोटोग्राफर की तरह फोटो खींच रही है शायद सुखद भी था क्योंकि अब उसे पता था कि वो सही दिशा में है पर निष्कर्ष कुछ और सोच रहा था,,,, उसे शायद ये बात कुछ चोट पहुंचा रही थी,,,, उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि वो इससे खुश नहीं,,,,,

उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें थी और आंख में आंसू के कुछ कतरे भी शायद उसे अपनी मां की याद आ गई थी,,,, वो कमरा उन्हीं का था,,,,

काश्वी ने निष्कर्ष को उसकी यादों के झरोखे से बाहर निकाला,,,,,

निष्कर्ष,,,, निष्कर्ष,,,, कहां हो आप? काश्वी ने पूछा

निष्कर्ष झटके से काश्वी की तरफ देखने लगा,,,,,,

काश्वी ने फिर पूछा,, 'आप ठीक हो ना?'

हां,,, एक लंबी सांस भरने के बाद निष्कर्ष ने कहा

क्या हुआ कहां खो गये थे आप? काश्वी ने पूछा

नम आंखों के साथ निष्कर्ष ने मुस्कुराते हुए कहा,,, कुछ नहीं बस यूं ही मां की याद आ गई

मां,,, कहां है मां? काश्वी ने पूछा

मां नहीं है मेरे साथ,,,,,, चार साल पहले गुजर गई,,,,,,,

ओह आई एम सॉरी,,,, काश्वी ने कहा

मैं कभी इस कमरे में नहीं आता,,, यहां उनकी यादें बसी है,,, आज तुम्हारी वजह से आया,,,, निष्कर्ष ने कहा

यादें तो अच्छी होती है उनसे भागना क्यों,,,, ये कमरा तो लगता है उन्होंने अपने हाथ से सजाया है कितना सुंदर है फिर क्यों नहीं आना चाहते आप यहां? काश्वी ने पूछा

यादें हमेशा अच्छी हो ये जरूरी तो नहीं,,, कुछ यादें बुरे सपनों की तरह भी होती है जिसे कोई दोबारा नहीं देखना चाहता,,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया

अगर आप इसके बारे में बात करना चाहते हो तो मैं आपके साथ हूं,,,, कई बार किसी से बात करने से मन हल्का होता है,,, काश्वी निष्कर्ष की झिझक को समझ रही थी इसलिये उसे भरोसा दिलाने के लिये कहा

सच भी है अभी सिर्फ कुछ ही दिन हुए थे उन्हें मिले इतनी जल्दी अपनी जिंदगी किसी के सामने खोल कर रख देना आसान नहीं होता,,, सब तो नहीं पर कुछ लोग ऐसे होते है जो आसानी से किसी को अपनी जिंदगी में शामिल नहीं करते,,,, वक्त लगता है भरोसा करने में,,,, वक्त लगता है ये समझने में कि वाकई कोई आपका दोस्त है या नहीं,,,,,,,,,,,,,,

निष्कर्ष को ये सुनकर अच्छा लगा कि काश्वी इतनी समझदारी भरी बातें कर रही थी और शायद अब उसे भी काश्वी को सब बताने में कोई झिझक न हो पर फिर भी वो कुछ नहीं बोला,,,, निष्कर्ष को लगा कि अभी शायद सही वक्त नहीं है अपनी जिदंगी की टेंशन काश्वी को देकर वो उसे परेशान नहीं करना चाहता है,,,,,,

निष्कर्ष के मन में यही चल रहा था कि काश्वी उसके बारे में नहीं अपने काम पर ज्यादा ध्यान दे,,,,,

निष्कर्ष ने घड़ी में समय देखा,,, रात के 11.30 बज रहे थे,,, उसने काश्वी से बहुत प्यार से कहा,,,, अभी बहुत रात हो गई है हम कल बात करते हैं,,,, चलो तुम्हारे कमरे तक छोड़ देता हूं अब सोने का टाइम है,,,

ठीक है,,, कह कर काश्वी वहां से निकल गई,,,,,

दिनभर जो होता है उसे सोने से पहले हम दोहराते है बुरी बातें भी दिमाग पर हावी रहती हैं और अगर कुछ अच्छा हुआ हो तो बिस्तर पर लेटे लेटे उसे सोचकर एक बार फिर मुस्कुरा लेते हैं,,,, काश्वी और निष्कर्ष की नींद भी आज उड़ी हुई थी निष्कर्ष सोच रहा था कि क्या काश्वी उसकी इतनी अच्छी दोस्त है कि वो उसे सब बताने को तैयार हो गया,,, और काश्वी ये सोच रही थी कि क्या निष्कर्ष उसे इतना अच्छा दोस्त मानता है कि वो उसे सब कुछ बताये,,,,
कई बार दोस्ती एक पल में हो जाती है और कई बार सालों साथ रहने के बाद भी ये सवाल उठता है कि क्या वाकई ऐसे दोस्त हैं कि अपने दिल की हर बात शेयर कर सकें,,,,,,,निष्कर्ष और काश्वी अभी दोस्ती के पहले पड़ाव पर थे जहां दो लोग मिलते हैं और एक दूसरे का साथ उन्हें पंसद होता है धीरे धीरे बात करते करते अच्छे और फिर अगर सब ठीक रहा तो बहुत अच्छे दोस्त बनते हैं,,,,, शुरुआत अच्छी थी और अब दोनों एक दूसरे के बारे में सोचने भी लगे थे इसी सोच के बीच कब दोनों को नींद आ गई पता नहीं चला

अगला दिन थोड़ा सा रिलेक्स होने वाला था पहला असाइनमेंट पूरा होने के बाद क्लास का टेंशन नहीं,,,, थोड़ा मजा करने का था,,, पूरे ग्रुप को कहा गया कि वो आज का दिन जहां चाहे घूम सकते हैं मदद चाहिए तो निष्कर्ष की टीम है,,,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 17

काम के बीच आराम की खबर सुनकर सब खुश हो गये,,,,पूरे ग्रुप ने घूमने का प्लान बनाया,,, उस जगह से एक घंटे की दूरी पर एक पिकनिक स्पॉट था,,,, पहाड़ों के बीच एक सुकून भरी खूबसूरत जगह,,,, निष्कर्ष हर साल इस वर्कशॉप में आने वाले स्टूडेंटस के लिये ये ट्रिप आर्गेनाइज करता है पर इस बार वो खुद भी उनके साथ हो लिया था,,, शायद काश्वी में उसे भी एक दोस्त मिल गया था,,,

फिर वही किया निष्कर्ष ने,,,सबसे कहा कि अगर कोई उसके साथ उसकी कार में आना चाहता है तो आ सकता है,,, ग्रुप के बाकी लोग तो एक साथ रहना चाहते थे,, एक दूसरे के साथ घुल मिल गये थे इसलिये कोई भी कार में जाने को राजी नहीं हुआ ,,,काश्वी भी चाहती थी कि सब साथ रहे,,,, तो जब निष्कर्ष ने उससे पूछा तो उसने सिर्फ इतना कहा,,,, आप भी चलो बस में सबके साथ,,,,

निष्कर्ष ने काश्वी को देखा और कहा,,, पर तुम्हें प्रोब्लम होगी ना?

नहीं,, कुछ नहीं होगा,,, हम सबके साथ मस्ती करेंगे,, मेरे पास दवाई है कुछ होगा तो,,, बस चलो,,, काश्वी ने निष्कर्ष को बस में चलने का इशारा किया,,,

निष्कर्ष मुस्कुराते हुए बस में काश्वी के पीछे पीछे बस में चढ़ गया,, बस में गाते गाते सब चल पड़े,,,, काश्वी के हाथ में फिर उसका कैमरा था पर इस बार वो अकेली नहीं थी,,, उसके सामने वाली सीट पर निष्कर्ष था और साथ में पूरा ग्रुप,,,,अनजान लोग नहीं अब दोस्तों के बीच खुलने लगे थे निष्कर्ष और काश्वी,,,,,,,,



तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 18

एक और सफर था,,, सफर मस्ती और मजे का,,, आमतौर पर संजीदा और चुपचाप रहने वाला निष्कर्ष भी आज खुलकर इस सबको इंजॉय कर रहा था,,, खिड़की से बाहर देखते हुये निष्कर्ष कभी कभी काश्वी को भी देख रहा था,,, काश्वी ही तो थी जिसकी वजह से निष्कर्ष को फिर से जीने का मन कर रहा था,,, निष्कर्ष दिखने में तो जिंदादिल और एक नॉर्मल इंसान लगता था,,, अपने काम को लेकर बेहद गंभीर भी था लेकिन ये सब मस्ती मजा करना कई साल पहले छोड़ चुका था

हम सबकी जिदंगी में एक वक्त ऐसा भी आता है जब सब कुछ स्थिर हो जाता है जब जिदंगी बोरिंग लगने लगती है एक ही ढर्रे पर चलती हुई,,,, जो जहां होता है वहीं रह जाता है कहीं पहुंचने का मन नहीं होता,,,बस जैसे है वैसे ही रहते है,,, निष्कर्ष भी यूंही बस चल रहा था पर वो हमेशा से ऐसा नहीं था,,, आज खिड़की से अंदर आती हवा को वो अपने चेहरे पर महसूस कर रहा था,,,, काश्वी की तरह खुद को आजाद महसूस करना चाहता था,,, आज निष्कर्ष सोचने लगा था कि ऐसा उसकी जिंदगी में क्या है जिसके लिये वो दिन रात एक कर सकता है जिसका इंतजार उसे भी बैचेन कर सकता है,,,, जवाब अभी तो उसके पास नहीं था पर शायद जल्द मिलने वाला था,,,, फिलहाल वो बस इस पल को जीना चाहता था,,,,

कुछ देर बाद सब उस जगह पहुंच गये,,, एक सुंदर सा रिजॉर्ट था चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा,,, बस से नीचे उतरकर इस खूबसूरत जगह को देख काश्वी वहीं रुक गई,,, निष्कर्ष ने उसे चलने को कहा तो उसने झटके से उसकी तरफ देखा

क्या हुआ? निष्कर्ष ने पूछा

कितनी अच्छी जगह है यहां,,,,,,बहुत सुंदर,,,,,काश्वी ने जवाब दिया

हां बहुत सुंदर है ये,,,,दो दिन रहो यहां,,, फोटो लो जी भरके,,,, निष्कर्ष ने कहा

ओह, बस दो दिन मुझे यही रहना है,,,, काश्वी ने खुश होकर कहा

हां जो पहली बार यहां आता है वो यही कहता है,,,,चलो अंदर तो चलो बहुत कुछ है यहां,,, निष्कर्ष ने कहा

इस छोटी सी जगह में काफी कुछ था,, रहने के लिये छोटी छोटी हट्स जैसे पहाड़ों के घर,,, थीम पार्क, रेस्टोरेंट और एम्यूजमेंट पार्क भी,,, सब अपनी अपनी पंसद की जगह पर चले गये,,,,

काश्वी हर जगह को ध्यान से देख रही थी जहां उसे अच्छा लगता वहीं फोटो खींचने लगी,,, कैमरे के लेंस में अब सामने निष्कर्ष था,,, निष्कर्ष को देखकर मुस्कुराते हुए काश्वी ने उसकी भी तस्वीर ले ली,,, फ्लैश देखकर निष्कर्ष चौंक गया,,,

मेरी नहीं,,, निष्कर्ष जोर से चिल्लाया

पर काश्वी का कैमरा रुक नहीं रहा था,,,,,

अब बस सुनो मेरी बात,, निष्कर्ष ने कहा

ओ के बोलो,, काश्वी ने जवाब दिया

तुम्हें भूख नहीं लगी,,, निष्कर्ष ने पूछा

हां लगी तो है,,, चलो कुछ खायें,,, काश्वी ने जवाब दिया
दोनों रेस्टोरेंट में अपनी पंसद का खाना ऑर्डर कर रहे थे,,, इधर उधर की बातें होती रही,,, काश्वी ने निष्कर्ष से उसके काम के बारे में पूछा,,, निष्कर्ष ने बताया कि वो कुछ साल से घर से दूर है पहले पढ़ाई की वजह से और अब जॉब के लिये,,

इस पर काश्वी ने कहा कि वो पहली बार अपने घर से दूर आई है इससे पहले कभी वो घरवालों के बिना नहीं रही,,,, ये कहते कहते काश्वी थोड़ी उदास भी हो गई

पर तुम खुश हो न यहां,,, निष्कर्ष ने पूछा

हां इतनी प्यारी जगह पर कोई परेशान हो सकता है क्या,,, और फिर आप तो हो,, कोई प्रोब्लम नहीं,,, काश्वी ने जवाब दिया

ओह तो तुम्हें मेरी कंपनी पंसद है,,, निष्कर्ष ने शरारती लहजे में पूछा

हां आपकी कंपनी ने ही तो ये वर्कशॉप आर्गेनाइज की है,,, पंसद कैसे नहीं होगी,,, काश्वी का अंदाज भी शरारत भरा था

ठीक है तो मैं जा रहा हूं,,, बाकी लोगों के लिये भी है ये वर्कशॉप उनको भी थोड़ा एंटरटेन कर देता हूं,,, निष्कर्ष ये कहकर उठकर जाने लगा

नहीं,, नहीं,,, आप मत जाओ,,, बैठो बैठो मैं मजाक कर रही थी,,,, काश्वी ने निष्कर्ष को रोका

निष्कर्ष रुक गया और उसने काश्वी से पूछा,,, काश्वी क्या हम दोस्त हैं,,,,

हां आज क्यों पूछा,,, काश्वी ने जवाब दिया

पहली बार जब मिले थे तो तुम्हें परेशान किया था मैंने,,, उसके बाद भी तुम मुझे दोस्त मानती हो,,,, निष्कर्ष ने पूछा

वो तो आपको जो लगा आपने कहा,,, पर उसके बाद तो सब ठीक हो गया न,, और अब तो हम दोस्त हैं,,,, और मुझे लगता है कि हम और अच्छे दोस्त बन सकते हैं,,,, काश्वी ने जवाब दिया

अच्छा ऐसा क्यों? निष्कर्ष ने पूछा

दोस्ती का पहला उसूल है भरोसा,,,, जो मुझे लगता है आप करते हो,,,, क्योंकि कभी ऐसा नहीं लगा कि आपने सोचकर कुछ कहा,,,जब हम किसी पर भरोसा करते हैं तो उसकी बात सुनने के बाद जो भी पहली चीज लगती है वही कह देते है सोचकर टाइम खराब नहीं करते कि अगर ये कहा तो उसे कैसा लगेगा,, या वो नहीं कहा तो क्या वो बुरा मान जाएगी,,,, दोस्ती वही है जहां कुछ भी कभी भी एक दूसरे से बात हो सके,,, कुछ सोचने की जरुरत न पड़े ,,, मुझे लगता है धीरे धीरे जब हम एक दूसरे को और समझने लगेंगे तो ये और अच्छा हो जाएगा,,, आपको क्या लगता है,,,, काश्वी ने पूछा

हां मुझे अच्छा लगता है तुमसे बात करना,,, पता है तुमसे पहले किसी लड़की से बात करने की बात सोचकर भी कुछ अजीब लगता था,,, मेरी बहुत कम दोस्ती हुई है लड़कियों से पर तुम अलग हो,, तुम्हारे साथ सब नॉर्मल लगता है,,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया,,,,

अरे,,, क्या कह रहे हो आप,,, आप तो इतने हैंडसम हो फिर भी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है,,, काश्वी ने पूछा

गर्लफ्रेंड का हैंडसम होने से क्या लेना है,,,, काश्वी,,, निष्कर्ष ने छूटते ही जवाब दिया

मतलब क्या? हैंडसम लड़कों को तो आसानी से गर्लफ्रेंड मिल जाती है और आप तो वैसे भी ठीक ठाक हो तो फिर क्यों नहीं? काश्वी ने पूछा

मुझे इन सबमें कभी इंटरेस्ट नहीं था,,, इसलिये कभी ध्यान भी नहीं दिया,,, तुम बताओ तुम्हारा कोई बॉयफ्रेंड है? निष्कर्ष ने पूछा

हां है ना,, मेरी जान है वो मेरी जिंदगी,,, काश्वी ने जवाब दिया

निष्कर्ष एक्साइटेड होकर बोला,, अच्छा बताओ कौन?

ये है न!!! काश्वी ने अपने कैमरे को उठाते हुए कहा,,,,

कैमरा,?? निष्कर्ष हंसने लगा

हां ये साथ है तो किसी की जरुरत नहीं... काश्वी ने भी हंसते हुए कहा

इतना प्यार करती हो अपने कैमरे से,,, निष्कर्ष ने पूछा

हां ये मेरी जिंदगी है,,, इसके आगे कुछ नहीं दिखता,,, काश्वी ने गंभीरता से कहा

निष्कर्ष कुछ उदास हो गया,,, उसने कहा,,, कोई और भी है तुम्हारी तरह जिसे इसके आगे कुछ नहीं दिखता,,,,

अच्छा कौन? काश्वी ने पूछा

मेरे पापा,,,ये कहकर निष्कर्ष बहुत सीरीयस हो गया,,,

काश्वी को कुछ समझ नहीं आया अभी तो सब हंसी खुशी था अचानक निष्कर्ष इतना उदास क्यों हो गया,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 19

निष्कर्ष को ऐसे देखकर काश्वी परेशान हो गई,,, और उसने पूछ ही लिया क्या हुआ? बात क्या है,,,

कुछ नहीं बस यूं ही,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया

नहीं कुछ तो है आप और आपके पापा के बीच में,,, आप जब भी उनकी बात करते हो कुछ बदले से दिखते हो,,, ऐसा क्या है? काश्वी ने पूछा

नहीं ऐसा कुछ नहीं है बस कुछ याद आ जाता है कभी कभी तो,,,,,छोड़ो तुम परेशान मत हो,,, चलो कहीं और चलते हैं,,, यहां पीछे एक टेरिस है जहां से डूबता सूरज दिखता है कुछ देर में सन सेट होगा देखना है,,,, निष्कर्ष ने बात बदलते हुए कहा,,,

हां मुझे देखना है पर एक शर्त पर आप मुझे पूरी बात बताओगे,,, काश्वी ने कहा

बात कुछ भी नहीं काश्वी,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया

बात तो है आप अगर बताना नहीं चाहते तो कोई बात नहीं,,,, काश्वी ने थोड़ा निराश होकर कहा

ठीक है चलो बताता हूं,,,, निष्कर्ष ने काश्वी को चलने का इशारा किया

ढलते सूरज की कम होती रोशनी में हर चीज का रंग ढलता नजर आ रहा था,,, शाम का रंग पीले से संतरी और फिर नीला होता लग रहा था,,, ढलती शाम का ये नजारा किसी खूबसूरत सिनरी की तरह लग रहा था,,, काश्वी इस नजारे को भी अपने कैमरे में कैद कर रही थी,,,, तभी निष्कर्ष की आवाज से वो रुक गई,,,,,

देखो वो पंछी झुंड बनाकर अपने घोसलों को लौट रहे हैं,,,,थक हार कर पूरा दिन गुजारकर अपने घर जा रहे हैं,,, सुकून से रात गुजारने,,, पर मेरा घर कहीं खो गया है,,,, इतना आगे आ गया कि वापस लौटने का कोई रास्ता नहीं दिखता,,,, निष्कर्ष शून्य में ताकता हुआ सब कह रहा था

काश्वी उस दर्द को महसूस कर रही थी जो निष्कर्ष की आवाज में था,,, जो उसकी आंखों में था,,, काश्वी ने निष्कर्ष से पूछा,,,, आपका घर कहां खो गया?

मां चली गई और उसके साथ घर भी् ,,,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया और फिर चुप हो गया

और पापा वो तो है न,,, काश्वी ने फिर पूछा

हां वो है पर मेरे साथ नहीं,,,, निष्कर्ष ने एक लंबी सांस भरते हुए कहा

क्यों पर? काश्वी ने पूछा

काश्वी ये जानने के लिये तुम्हें पूरी कहानी बतानी पड़ेगी,,, निष्कर्ष ने कहा

मैं सुनना चाहती हूं शायद आपको इससे अच्छा लगा,,, काश्वी ने जवाब दिया

ठीक है तो शुरु से बताता हूं,,,,वो लोकेशन जहां तुम्हारा पहला असाइनमेंट था उसी जगह मेरे मम्मी पापा पहली बार मिले थे,,,दिल्ली से पापा यहां अपने असाइमेंट के लिये आए थे तब वो फोटोग्राफर बनने की कोशिश कर रहे थे छोटा मोटा काम करके कुछ पैसे कमाने की कोशिश कर रहे थे,,,, और मां यहां उदयपुर से अपने कुछ दोस्तों के साथ घूमने आई थी,,,, फोटो खींचते खींचते पापा की नजर मां पर गई और उन्हें वो अच्छी लगी,,,, ये कहकर निष्कर्ष मुस्कुराने लगा,,,,,

अच्छा फिर क्या हुआ,,, काश्वी ने पूछा

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 20


फिर पापा ने मां की भी फोटो लेनी शुरू कर दी,,,, उनकी बस का पीछा भी किया और उस होटल का पता लगाया जहां वो ठहरी थी,,,, अगले दिन फोटो प्रिंट करके मां को देने भी पहुंच गए,,, निष्कर्ष मुस्कुरा कर सब काश्वी को बता रहा था

काश्वी ने हैरानी से पूछा,,, अच्छा इतने रोमेंटिक है सर,,, फिर मां ने क्या किया?

पहले तो बहुत डर गई सोचा पता नहीं कौन है कहां से आया है,,, इस तरह बिना पूछे फोटो खींचने का क्या मतलब,,,, पर पापा के चेहरे की मासूमियत शायद उन्हें भी भा गई थी,,,, पता है उस जमाने में ये सब आसान नहीं था लड़का अगर किसी लड़की से बात करते हुए देखा जाए तो बहुत पिटाई होती थी और फिर मां तो राजस्थान की थी वहां तो और भी सख्ती की जाती थी,,, डर की वजह से मां ने कोई बात नहीं की पर वो तस्वीरें जरूर ले ली,,,, बस पापा को जैसे ग्रीन सिग्नल मिल गया,,, उन्होंने तभी से मां के बारे में सब पता करना शुरू कर दिया,,,,,

जब दोनों दिल्ली लौटे तो पता चला कि मां का कॉलेज खत्म हो रहा था वो उदयपुर से दिल्ली आकर पढ़ाई कर रही थी और आखिरी दिनों में ये टूर रखा गया था,,, एग्जाम खत्म हो गये थे और रिजल्ट का इंतजार था,,,, पापा को लगा ये आखिरी मौका होगा अगर अभी कुछ नहीं कहा तो वो मां को खो देंगे,,,, उन्होंने पूरा प्लान बनाया और फिर उनके कॉलेज के बाहर इंतजार करने लगे,,,, जब मां बाहर आई तो वो सामने जाकर खड़े हो गये,,,, उन्हें एक लाल गुलाब दिया और कहा,,, तुम्हारी तस्वीरें बहुत सुंदर थी चाहता हूं इसी तरह जिंदगी भर तुम्हारी तस्वीरें लूं क्या ऐसा हो सकता है,,,,

मां कुछ नहीं बोल पाई बस एक मुस्कुराहट ने सब कुछ कह दिया,,,,, ये कहकर निष्कर्ष चुप हो गया

अरे वाह क्या लव स्टोरी है फिर आगे क्या हुआ,,, दोनों के परिवारवाले मान गये,,, काश्वी ने पूछा

अरे कहां,,, नानाजी ने तो साफ इंकार कर दिया,,,, पापा के पास कोई नौकरी नहीं थी छोटे मोटे फोटोग्राफी असाइनमेंट से इंकम कहां थी,,, पर मां की जिद के आगे वो झुक गये,,, पापा और मां की शादी हो गई और दोनों दिल्ली आ गये,,,,, निष्कर्ष ने बताया

निष्कर्ष अब तक सब ठीक लग रहा है ये तो एक परफेक्ट प्रेम कहानी है फिर आप क्यों परेशान हो ऐसा क्या हुआ जिससे आपके और आपके पापा के बीच इतनी दूरी हो गई,,,,,,काश्वी ने पूछा

काश्वी कुछ चीजें हमारे हाथ में नहीं होती,,,वक्त उन्हें तय करता है कब क्या और कैसे होना है ये कोई और तय करता है और हमें बस उस रास्ते पर चलना होता है,,,,, उन दोनों की लाइफ में अभी सब कुछ हरा दिख रहा था लेकिन इंसान की असली पहचान तब होती है जब वो मुसीबत में होता है पापा और मां खुश थे,,,, पैसे की थोड़ी दिक्कत थी पर फिर भी प्यार के सहारे गाड़ी चल रही थी,,,, जब ये खबर उन्हें पता चली कि वो दो से तीन होने वाले है तो पापा थोड़ी टेंशन में आ गये थे,,, पैसे की किल्लत की वजह से उनका ध्यान फोटोग्राफी से हट रहा था,,,, इतने साल संघर्ष करने के बाद भी उनके टेलेंट को किसी ने पहचाना नहीं था,,,, अपने परिवार के लिये उन्होंने अपने कैमरे को अलमारी में बंद कर दिया और छोटी मोटी जो भी नौकरी मिली करने लगे,,,, तीन साल जैसे तैसे सब चल रहा था पर मां को ये बात खाए जा रही थी कि उनकी वजह से पापा ने अपना सबसे पंसदीदा काम छोड़ दिया है हांलाकि पापा ने उन्हें कभी ये जाहिर नहीं होने दिया कि वो इसे लेकर परेशान है पर मां को लगा अगर वो उनकी जिंदगी में नहीं आती तो शायद वो एक सफल फोटोग्राफर होते,,, और किसी ने तो शायद नहीं पर मां ने पापा का टेलेंट पहचाना था,,,,,

कहानी थोड़ी गंभीर हो रही थी और काश्वी के चेहरे का रंग भी उड़ रहा था निष्कर्ष हर बात में काश्वी का रिएक्शन नोट कर रहा था शायद उसकी अपनी ऑबर्जरवेशन थी ये अपनी कहानी से वो काश्वी को टेस्ट कर रहा था कहां वो खुश हो रही थी कहां उदास सब निष्कर्ष देख रहा था,,,,,,,,

आगे कहने के पहले निष्कर्ष ने काश्वी से पूछा,,, तुम्हें ये सब बताकर परेशान नहीं करना चाहता पर पता नहीं क्यों सब बताने का मन भी कर रहा है पहली बार किसी से ये बात कर रहा हूं,,, मां हमेशा इसके बारे में बताती थी उन्हें बहुत अच्छा लगता था जब भी पापा बाहर होते थे तो हम यही कहानी दोहराते थे,,,,,

बाहर रहते थे मतलब?? कहां बाहर? और उन्होंने फोटोग्राफी कब शुरू की दोबारा,,,, काश्वी ने पूछा

पापा तो जैसे भूल ही गये थे उनके लिये अपने परिवार के लिये पैसा कमाना ज्यादा जरूरी था पर मां को लग रहा था कि ऐसे वो अपने सपनों के साथ समझौता कर रहे थे,,, जिस कैमरे की वजह से वो दोनों मिले उसकी जगह धूल खा रही अलमारी में नहीं थी,,,,,

एक रात जब पापा घर लौटे तो मां ने जिद करके उनसे छुट्टी लेकर उसी जगह जाने को कहा जहां वो पहली बार मिले थे,,,,,पापा मान गये और हम सब फिर यही आ गये,,, उस वक्त में 4 साल का था,,,,, जब यहां आये तो पापा के हाथ में फिर उन्होंने उनकी प्यारा कैमरा दे दिया और कहा कि आपको जो अच्छा लगा उसकी फोटो लो,,,, बस यूं ही,,, पापा हैरान थे पर कैमरा देखने के बाद उनसे भी रहा नहीं गया और इस बार उन्होंने किसी दबाव में आकर नहीं बस खुलकर जो दिल किया उसकी तस्वीर ली,,,,,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 21

निष्कर्ष की बात जारी थी काश्वी बड़े ध्यान से उसे सुन रही थी अंधेरा बढ़ रहा था और हल्की धुंध के साथ ठंड भी,,, काश्वी ने पूछा, फिर आगे क्या हुआ,,,,

आगे,,, उस टूर पर पापा ने सारी टेंशन भूलकर अपने कैमरे के साथ दिन बिताए,,,, मेरी,, मां की खूब फोटो खींची ,,, कुछ दिन बाद जब घर लौटे तो पापा फिर अपने काम में बिजी हो गये,,, उन्होंने फिर अपना कैमरा अलमारी में रखने की सोची लेकिन इस बार मां ने उन्हें रोक दिया और कहा कि इसे बाहर ही रहने दो,,,,, पापा रुक गये पर कुछ समझ नहीं पाये,,,, बिना कुछ कहे ही वो कैमरा मां को देकर चले गये,,,

मां जानती थी कि पापा सबसे ज्यादा खुश तभी होते हैं जब उनके हाथ में उनका कैमरा होता है और शायद उन्हें ये लगता था कि वो उन दोनों के बीच में आ गई इसलिये दूरी बढ़ गई,,,,पर अब मां को एक रास्ता मिल गया था एक कोशिश की उन्होंने इस दूरी को कम करने की,,,, उन्होंने पापा की कुछ तस्वीर सिलेक्ट कर एक कॉम्पीटीशन के लिये भेज दी,,,,पापा को बिना बताएं,,,,, निष्कर्ष की बात को बीच में काटते हुए काश्वी बोली,, अच्छा वाह फिर,,,,,

फिर क्या,,, जो टेलेंट मां को दिखा वो पूरी दुनिया ने देखा,,, कॉम्पटीशन जीतने के साथ ही पापा को नौकरी का ऑफर भी मिला और ये बात हमारी जिंदगी में नये मोड़ लेकर आई,,,,,

एक के बाद उनकी तस्वीरों की एग्जिबिशन लगती रही,,, पापा खुश होते तो मां और ज्यादा खुश हो जाती,,, सब जगह वो फेमस हो रहे थे कुछ ही सालों में सब बदल गया,,, कहते कहते निष्कर्ष फिर खामोश हो गया,,,,

बदल गया पर सब खुश थे ना,??? काश्वी ने पूछा

हां सक्सेस किसे अच्छी नहीं लगती पर आवाजों के पीछे की खामोशी सबको दिखाई नहीं देती,,,, रौनक बढ़ी पापा का नाम भी लेकिन इन सबने मां और पापा को दूर कर दिया,,,, पापा ज्यादातर बाहर रहने लगे और मां मेरे साथ उनका इंतजार करती रही,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,निष्कर्ष की ये बात सुनकर काश्वी को अब कुछ कुछ समझ आ रहा था जो उदासी निष्कर्ष को घेरती हैं वो उस अकेलेपन की वजह से हैं,,, जो पापा के न होने की वजह से थी,,,,,,,,,
तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 22

निष्कर्ष से बहुत कुछ पूछना चाहती थी काश्वी पर उसे लगा ये शायद सही समय नहीं होगा,,,, निष्कर्ष पहले से ही उदासी की तरफ बढ़ रहा था ऐसे में उसे और उदास करना काश्वी को ठीक नहीं लगा,,, उसे लगा बात बदल दें तो शायद कुछ माहौल ठीक हो,,,,,

मुझे ठंड लग रही हैं क्या अंदर चले? काश्वी ने कहा

हां,,, ओह सॉरी मैं अपनी बातों में खो गया था तुम्हारा ध्यान ही नहीं रहा,,, चलो रात भी बढ़ रही हैं अंदर चलते हैं,,,,

कुछ देर बाद पूरा ग्रुप एक साथ था,,,,इस खूबसूरत रात को और खूबसूरत बनाने का इंतजाम हो गया था,,, खुले आसमान के नीचे आग जलाकर सब उसके आस पास बैठकर हाथ सेंकने लगे,,,, आग की गर्माहट मौसम की ठंडक को कम कर रही थी उस पर सबके मिलने के बाद हंसी ठहाकों का सिलसिला शुरु हुआ,,, लेकिन निष्कर्ष बमुश्किल ही मुस्कुरा पा रहा था,,, अचानक सबको न जाने क्या हुआ,,, सबका फोकस निष्कर्ष की तरफ हो गया,,,,कुछ लोग तो इशारों इशारों में उसे काश्वी का नाम लेकर छेड़ने भी लगे,,,, पर निष्कर्ष ने किसी की बात का जवाब नहीं दिया,,, बस मुस्कुराकर सबकी बात सुनता रहा,,, कहने को निष्कर्ष वहां था पर उसका मन वहीं कहीं उसके अतीत में खोया था,,,काश्वी जानती थी उसे कैसा लग रहा होगा,,,तो उसने एक तरकीब सोची जिससे निष्कर्ष भी बाकी सबकी तरह खुश हो,,,, काश्वी ने सबको एक गेम खेलने के लिये कहा,,, कहीं से एक बोतल मंगाई गई जिसे स्पिन कर ट्रूथ और डेयर खेलने की तैयारी हुई यानि जिसके पास बोतल घूमी उसे या तो एक सवाल का सच सच जवाब देना होगा या फिर सजा के लिये तैयार होना होगा,,,,,

एक एक कर सबके पास बोतल घूमने लगी,,,कुछ सच बोल कर अपने राज खोल रहे थे तो कुछ को सजा में गाना गाने या डांस करने से लेकर सबसे मोटे इंसान को गोद में उठाने तक को कहा गया,,,, धीरे धीरे माहौल का रंग निष्कर्ष पर भी चढ़ा,,,, अब वो भी खुल कर इसे इंजॉय कर रहा था

जब काश्वी की बारी आई तो उसने सजा नहीं सच बोलने का फैसला किया,,,, किसी ने पूछा उसे इस ट्रिप पर सबसे अच्छा कौन लगा तो काश्वी निष्कर्ष की तरफ देखने लगी,,,,,सबको पता था कि काश्वी ज्यादा किसी से बात नहीं करती लेकिन निष्कर्ष और वो घंटों बातें करते थे,,,,इसलिये ये सवाल काश्वी से किया,,, पर वो पीछे नहीं हटी,,,,थोड़े से इंतजार के बाद काश्वी खड़ी हुई और कहा,,,यहां जब आई तो सब अनजान थे पर अब धीरे धीरे दोस्त बन रहे हैं शुरुआत निष्कर्ष से हुई,,, उन्होंने काफी मदद की तो फिलहाल वही सबसे अच्छे हैं,,,,,,,

निष्कर्ष काश्वी की बात सुनकर अपने चेहरे की रौनक को छुपाने की कोशिश कर रहा था पर इसमें वो कामयाब होता नजर नहीं आ रहा था,,,,

गेम एक बार फिर शुरू हुआ,,,, जो बच गये उनमें से कई तो ऐसी मुश्किल में फंसे की न तो सच बोल पा रहे थे और न ही सजा पूरी कर रहे थे,,,, काश्वी को निष्कर्ष की बारी का इंतजार था और कुछ देर में वो आ भी गई,,,,
निष्कर्ष की तरफ बोतल घूमी तो उससे सवाल करने के लिये सब एक्साइटेड हो गये पर इस मौका किसी एक को ही मिलना था,,, निष्कर्ष तैयार था सच का सामना करने के लिये,,,, और उससे सवाल करने का मौका मिला काश्वी को,,,,,,

काश्वी ने थोड़ा रुक कर कुछ सोच कर निष्कर्ष से सवाल किया,,,, किसी अपने से नाराज हो तो उसे बता देना चाहिए या फिर नाराज होकर उससे दूर चले जाना चाहिए?

काश्वी के इस सवाल ने निष्कर्ष को हिलाकर रख दिया,,, उसे एहसास भी नहीं था कि काश्वी ऐसा कुछ पूछेगी,,,,

निश्कर्ष बिना कुछ कहे ही वहां से चला गया,,,, सब देखते रह गये,, और काश्वी चुप हो गई,,,,

रात गुजर गई और सुबह के 9 बज चुके थे निष्कर्ष ने काश्वी से कोई बात नहीं की,,, किसी को पता नहीं था कि वो कहां हैं,,,, काश्वी ने कई बार फोन लगाया लेकिन निष्कर्ष ने फोन रिसीव नहीं किया,,,, अब तो काश्वी को भी चिंता हो रही थी उसके मन में एक ही सवाल उठ रहा था कि क्या निष्कर्ष उससे नाराज हो गया है?

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 23

काश्वी को पता चला कि निष्कर्ष किसी काम से बाहर गया है पर उसे इस बात हैरानी थी कि निष्कर्ष ने उससे बात तक नहीं की,,,,कुछ देर बाद काश्वी भी वहां से बाहर निकल गई,,,दो घंटे के बाद निष्कर्ष जब वापस लौटा तो उसने सबसे बात की और काश्वी के बारे में भी पूछा पर काश्वी वहां नहीं थी और वहां किसी को नहीं था कि वो है कहां,,,,,

निष्कर्ष ने कई बार फोन ट्राई किया लेकिन कुछ पता नहीं चला,,, कुछ देर पता करने के बाद पता चला कि काश्वी उस जगह से कुछ दूर का पता पूछ रही थी और फिर उसने एक कार भी हायर की थी

गाड़ी का पता चलने पर निष्कर्ष उस जगह की तरफ निकल गया,, शाम होने वाली थी और काश्वी का कुछ पता नहीं चला था,, थोड़ी देर बाद रास्ते के एक कोने पर वही कार खड़ी मिली जो काश्वी लेकर गई थी,,,, निष्कर्ष ने कार के अंदर देखा लेकिन उसमें कोई नहीं था आस पास सुनसान जगह थी,,, सड़क के दोनों तरफ घना जगंल था,,,निष्कर्ष को समझ नहीं आया कि काश्वी यहां क्यों रुकी,,, वही पास में एक बोर्ड भी लगा था,,, 'टाइगर प्रोन एरिया' यानि उस इलाके में कई बार जंगल में बाघ देखे गये थे इसलिये सावधानी बरतने को कहा गया था,, वहां रूकना भी खतरे से खाली नहीं था,,,, निष्कर्ष थोड़ा घबराया सा फिर काश्वी का फोन ट्राई करने लगा,,, काफी देर तक फोन आउट ऑफ रेंज दिखा रहा था,,, फिर अचानक घंटी बजनी शुरू हुई,,, फोन पर बहुत धीरे से काश्वी की आवाज आ रही थी लेकिन बात कुछ समझ नहीं आई,,,,, फोन काटकर काश्वी ने निष्कर्ष को एसएमएस किया कि नेटवर्क का प्रोब्लम हैं,,,,,, बात मैसेज से करें,,,,

निष्कर्ष ने मैसेज कर पूछा कि वो कहां है,,,,,,काश्वी का जवाब आया कि वो फोटो लेने जंगल के अंदर गई है,,,,
निष्कर्ष अब थोड़ा और घबरा गया और काश्वी से उसकी लोकेशन पूछी,,,

काश्वी ने उसे बताया कि जहां उसकी गाड़ी मिली उसी तरफ सीधा जंगल की तरफ आये,,,,, निष्कर्ष उसी तरफ आगे बढ़ने लगा,,, घना जंगल था अंधेरा भी बढ़ रहा था लेकिन निष्कर्ष का ध्यान सिर्फ काश्वी की तरफ था,,,, बहुत देर सीधा चलने के बाद उसे कुछ रोशनी दिखाई दी,,,, टॉर्च की रोशनी की तरफ वो बढ़ने लगा थोड़ा पास पहुंचने पर देखा वो काश्वी ही थी,,, चांद की हल्की रोशनी के बीच अपने हाथ में टॉर्च लिये काश्वी,,, जो मुस्कुराते हुए निष्कर्ष को देख रही थी

निष्कर्ष को कुछ समझ नहीं आया,,, वो पूरी तरह से घबराया हुआ था और पूछा,,, तुम ठीक तो हो? यहां क्या कर रही हो?

काश्वी ने निष्कर्ष को पहले कूल डाउन होने के कहा और पानी की बोतल भी पकड़ाई,,,, पानी पीने के बाद निष्कर्ष ने फिर काश्वी से पूछा,,, यहां हो क्या रहा है काश्वी तुम यहां कैसे आई?

काश्वी ने हंसते हुए कहा मुझे टाइगर देखना था इसलिये आई,,,,,,

क्या? टाइगर? तुम पागल हो क्या? तुम्हें पता ये कितना डेंजरस हो सकता है चलो वापस,,, निष्कर्ष ने कहा

कुछ नहीं होगा,,, आप क्यों फिक्र कर रहे हो,,, आओ मैं दिखाती हूं आपको,,, काश्वी ने निष्कर्ष को चलने का इशारा किया,,,,

कहां जा रही हो चलो वापस जाना है,,,, निष्कर्ष ने काश्वी को रोका

मुझे कहीं नहीं जाना, आपको जाना है तो जाओ,,, जैसे सुबह गये बिना बताएं,,,, काश्वी ने थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए कहा

अच्छा तो ये सुबह का गुस्सा है,,, निष्कर्ष ने मुस्कुराते हुए कहा

नहीं,,, मतलब,,,, ऐसा कुछ नहीं,,, इतना अच्छा चांस दोबारा नहीं मिलेगा,,,सबने कहा यहां टाइगर रहता है,,,, काश्वी ने जवाब दिया

टाइगर रहता है इसलिये कह रहा हो चलो,,, सामने आ गया तो खा जाएगा,,, निष्कर्ष ने काश्वी को फिर कंवेंस करने की कोशिश की,,,पर काश्वी कुछ सुनने को तैयार नहीं थी,,,वो और आगे बढ़ने लगी,,,,

रात हो रही है काश्वी चलो वापस,,, ये क्या बचपना है,,, निष्कर्ष ने फिर कहा

रात हो रही है इसलिये कह रही हूं यही रूकना पड़ेगा,,, अभी रास्ता नहीं मिलेगा और अब ज्यादा अंदर गये तो और मुश्किल होगी,,, काश्वी ने कहा

तुम क्या सोच रही हो, काश्वी? निष्कर्ष ने पूछा

एक बार वैसा करो जैसा मैं कह रही हो उसके बाद अगर आपको ठीक न लगे तो जो आप बोलो,,, काश्वी ने कहा

निष्कर्ष को कुछ समझ नहीं आ रहा था काश्वी के साथ इस जंगल में उसे कुछ ठीक नहीं लग रहा था पर कोई और रास्ता भी नहीं दिख रहा था तो निष्कर्ष ने काश्वी पर भरोसा कर उसकी बात मान ली,,,,

काश्वी ने निष्कर्ष को एक पेड़ पर चढ़ने का इशारा किया और कहा यहां हम सेफ रहेंगे,,, चलो,,,,

निष्कर्ष काश्वी को देखता रहा,,,,और तेजी से पेड़ के उपर चढ़ गई,,,, वो भी उसके पीछे उपर चढ़ा,,, दोनों अब आराम से वहां बैठ गये थे

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 24

जब निष्कर्ष को लगा कि अब सब सेफ है तो उसने अपने मोबाइल का नेटवर्क चेक किया,,, सिग्नल लो थे तो कॉल कनेक्ट नहीं हो पा रही थी,,, जब काफी देर तक निष्कर्ष परेशान होता रहा तो काश्वी उसे देखकर मुस्कुराने लगी,,,,

निष्कर्ष की नजर उस पर गई तो उसने पूछा,,, तुम्हें ये सब मजाक लग रहा है,,,,

नहीं क्यों ? काश्वी ने पूछा

तुम्हें कोई फिक्र नहीं हो रही,,, यहां हम इस तरह,,, निष्कर्ष इतना कह कर चुप हो गया

आपको पता है आपकी प्रोब्लम क्या है,,, आप हिंदी मूवीज बहुत देखते हो,,, हमेशा हर चीज बुरी नहीं होती,,, यहां जो है उसे इंजॉय करो,,, अब कोई ऑप्शन नहीं है न तो कूल डाउन,,,,,काश्वी ने निष्कर्ष की टेंशन दूर करने के लिये कहा,,,,

अच्छा तुम्हें सब पता है न बताओ आगे क्या होगा,,,, निष्कर्ष ने पूछा

आगे का तो पता नहीं पर कल रात को क्या हुआ था आप क्यों चले गये और फिर सुबह भी गायब हो गये,,,, काश्वी ने पूछा

कुछ नहीं बस यूं ही चला गया,,,, निष्कर्ष ने कहा

यूं ही मतलब मेरी बात बुरी लगी,,, काश्वी ने पूछा

नहीं ऐसा नहीं था,,, बस ऐसे ही तुमने कहा तो कुछ दिमाग में नहीं आया और समझ नहीं आया क्या करूं इसलिये चला गया ,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया

अच्छा पर आज सुबह क्या हुआ आपने बताया भी नहीं कहां गये,,,, काश्वी ने पूछा

वो एक फोन आया था सुबह मां की एक फ्रेंड यही रहती है उनकी तबियत खराब थी तो उन्हें देखने चला गया,,,,सोचा सुबह मिल आता हूं फिर बाद में तो ग्रुप के साथ रहना था इसलिये गया,,, निष्कर्ष ने कहा

ओ के मतलब आप मुझसे नाराज नहीं,,, काश्वी ने फिर पूछा

नहीं बिल्कुल नहीं नाराज क्यों? काश्वी को हैरानी से देखते हुए निष्कर्ष ने पूछा

चलो छोड़ो आपकी कहानी अधूरी है उसके बारे में बताओ,,, काश्वी ने निष्कर्ष से कहा

कहानी अभी नहीं अभी कुछ और बात करते हैं,,, ये बताओ तुम ऐसी हरकतें करती रहती हो,,, अक्सर ,,,निष्कर्ष ने पूछा

नहीं पहली बार की है,,, काश्वी ने मुस्कुराते हुए पूछा

पहली बार,,,,,इस बार ऐसा क्या हुआ? ये पूछता हुआ निष्कर्ष अब थोड़ा कम टेंशन में लग रहा था

मेरा ऐसा कोई प्लान नहीं था मैं तो वापस लौट रही थी पर आपका फोन आया तो रूक गई,,,, काश्वी ने कहा

अच्छा मेरी वजह से रूक गई तुम्हें पता है यहां से बाहर निकलने का रास्ता,, निष्कर्ष ने हंसते हुए पूछा

हां पता है,, मैंने जीपीएस सेट किया था कार से स्टार्ट करके तो अब वापस जाने का रास्ता भी यही बताएगा,,, काश्वी ने अपना फोन दिखाते हुए जवाब दिया

तो फिर हम यहां क्या कर रहे हैं,,, वापस क्यों नहीं जा रहे काश्वी,,, निष्कर्ष ने छल्लाते हुए कहा

क्योंकि इस वक्त जंगल के अंदर घूमना सेफ नहीं हैं सुबह होते ही निकल जाएंगे आपको नींद आ रही है तो सो जाओ,,, काश्वी ने बात खत्म करने के लहजे में कहा

तुम्हें क्या कहूं,,,, छोड़ो एक काम करना कुछ भी हो तो मुझे मत उठाना मैं यहां सोने की कोशिश करता हूं,,, निष्कर्ष इस बार थोड़ा चिड़ गया था

काश्वी अपने कैमरे को ठीक करने में लगी थी उसमें खींची गई तस्वीरों को देखते देखते कुछ तस्वीरें उसने निष्कर्ष की भी ले ली थी उसे बिना बताए,,,,,

सुबह की पहली किरण के साथ चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई दे रही थी ठंड भी हल्की सी और बढ़ गई थी,,, निष्कर्ष की आंख खुली तो उसे एहसास हुआ कि वो बैठे बैठे ही गहरी नींद में सो गया था,,, उठकर निष्कर्ष ने काश्वी को ढूंढा पर वो वहां नहीं थी


तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 25

निष्कर्ष फिर परेशान होकर काश्वी को ढ़ंढने लगा इस बार उसकी घबराहट और बढ़ गई थी सुबह हो चुकी थी और काश्वी का कुछ पता नहीं था,,, इधर उधर जिधर भी उसे लगा वो आवाज लगाकर काश्वी को ढ़ूढने लगा,,, लेकिन उसका कुछ अता पता नहीं था,,,,

थोड़ी दूर जाकर भी उसने आवाज लगाई तभी किसी ने उसका हाथ पकड़कर उसे साइड में खींचा,,, जब तक निष्कर्ष कुछ समझ पाता काश्वी ने उसका मुंह बंदकर उसे चुप रहने का इशारा किया,,, निष्कर्ष चुप चाप काश्वी को देखता रहा,,, काश्वी ने उसे पेड़ की ओट से झांककर सामने देखने के लिये कहा,,,, निष्कर्ष अब पूरी तरह से हैरान था,,,, उसके मुंह से एक शब्द भी नहीं निकला,,,,

जो निष्कर्ष ने देखा वो उसने अपनी जिदंगी में कभी नहीं देखा था,,,, सामने एक तालाब था, जिसके दूसरे किनारे पर एक टाइगर पानी पी रहा था,,, एक बड़ा सा धारियों वाला जानवर जिसे देखकर ही रोंगटे खड़े हो जाए,,,, दूर बड़े आराम से किसी शंहशाह की तरह रौब दिखाते हुए टहल रहा था वो,,,,, निष्कर्ष ने अपनी एक्साइटमेंट छुपाने की बहुत कोशिश की पर कामयाब नहीं हो पा रहा था,,,, उसे समझ आ रहा था कि काश्वी क्यों यहां रुकी,,,, निष्कर्ष ने काश्वी को देखा तो वो अपने कैमरे के लैंस से उसकी टाइगर की हर हरकत को कैप्चर कर रही थी,,,,
उसके चेहरे की संजीदगी देखकर निष्कर्ष ने उससे कुछ नहीं कहा,,, पर वो खुश था कि काश्वी को जो चाहिए था वो मिल गया,,, पर डर अब भी गया नहीं था हां, गनीमत वो ये मना रहा था कि एक पूरा तालाब उनके और उस खतरनाक जानवर के बीच था,,

कुछ मिनट के बाद वो टाइगर वहां से दूर जंगल में कहीं खो गया,,, निष्कर्ष ने अब राहत की सांस ली क्योंकि उसे पता था कि अब वो दोनों घर जा सकते हैं,,,,

काश्वी के चेहरे पर अब सुकून दिख रहा था अब वो खुश थी उसने निष्कर्ष को अपने कैमरे की फोटो दिखाई,,, पर निष्कर्ष ने नाराज होते हुए काश्वी को वहां से चलने के लिये कहा,,, काश्वी पर निष्कर्ष की नाराजगी का कोई असर नहीं दिख रहा था,,, उसने अपना फोन ऑन किया और निष्कर्ष को अपने पीछे आने के लिये कहा,,, रास्ते भर दोनों ने कोई बात नहीं की,,, काश्वी का ध्यान रास्ते से ज्यादा अपने कैमरे में था,, निष्कर्ष नाराज था लेकिन जब भी जंगल के उबड़ खाबड़ रास्ते पर काश्वी गिरने लगती, निष्कर्ष बढ़कर उसे संभाल लेता,,,, निष्कर्ष की सांस अब भी अटकी थी चलते चलते काफी देर हो गई थी पर सड़क का कोई नामो निशान नहीं था,,,

काश्वी जानती थी कि निष्कर्ष उसकी वजह से इतना परेशान हुआ,, तो उसने बात की शुरूआत सॉरी कहकर की,,, निष्कर्ष ने उसे देखा और कहा सॉरी क्यों?

मेरी वजह से आप भी यहां फंस गये इसलिये,,,, काश्वी ने जवाब दिया

वो तो ठीक है पर ये बताओ तुम्हें डर नहीं लगा इस तरह जंगल में अकेले,,,, निष्कर्ष ने पूछा

लगा पर आप थे तो मैं ठीक थी ऐसा पागलपन कभी किया नहीं,,,, पता नहीं क्यों डर कहीं गायब हो गया था क्योंकि आप साथ थे,,, काश्वी ने जवाब दिया

मैं,,, मेरे भरोसे थी तुम,,, तुम से ज्यादा डरा हुआ था मैं, मुझे ये सब पंसद नहीं,,, कभी नहीं आया मैँ इस तरह जंगल में अकेले,,,, निष्कर्ष ने कहा

हां जानती हूं पर मुझे डर नहीं लगा,,, लगा सब ठीक ही होगा,,, और देखो हम दोनों ठीक है और टाइगर भी मिल गया,,, काश्वी ने अपना कैमरा दिखाते हुए खुशी से कहा

काश्वी ऐसा पागलपन दोबारा मत करना,,, आगे क्या होगा किसे पता,, हर बार तुम सेफ रहो ये जरूरी नहीं,,, ये रिस्क मत लेना अब,,, निष्कर्ष ने काश्वी को समझाते हुए कहा

ठीक है नहीं करूंगी पर आपको एक वादा करना होगा जब भी ऐसा पागलपन करने का मन होगा आप मेरा साथ दोगे,,, क्योंकि मेरा डर तभी जाएगा जब आप साथ होगा और फिर कुछ गलत नहीं होगा,,, काश्वी ने रूककर निष्कर्ष के सामने अपना हाथ बढ़ाते हुए कहा,,,,,

कुछ पल निष्कर्ष काश्वी को देखता रहा और फिर उसके हाथ पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए आगे बढ़ गया,,,,,

काश्वी हैरानी से निष्कर्ष को देखती रह गई,,, और उसके पीछे जाते हुए पूछा,, इसका मतलब हां है या ना,,,,

निष्कर्ष ने फिर मुड़कर मुस्कुराते हुए काश्वी को देखा पर कुछ कहा नहीं

आगे बढ़ते हुए काश्वी ने कई बार पूछा लेकिन निष्कर्ष ने कोई जवाब नहीं दिया

बच्चों की तरह जिद करते हुए काश्वी वहीं रूक गई अगर आप नहीं बोलोगे तो मैं नहीं जा रही यहां से,,,,,

काश्वी,,, तुम बच्ची हो कुछ नहीं समझती अभी चलो हम बाद में बात करेंगे,,, पहले यहां से बाहर निकलने का रास्ता बताओ,,,

वहां सामने रोड है,,, देखो,,, काश्वी ने धीरे से कहा,,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 26

सड़क सामने थी,, अब वापस लौटने का समय था निष्कर्ष और काश्वी पूरे रास्ते चुप रहें,,, कार की सीट की एक तरफ सर टिकाए काश्वी ने अपनी आंखे बंद कर ली,,,, निष्कर्ष ने काश्वी को देखा और फिर सड़क पर नजर टिकाकर जल्दी से पहुंचने की कोशिश करने लगा,,, उसे पता था काश्वी बहुत थक चुकी हैं,,,, पर ये सोचकर वो थोड़ा मुस्कुरा भी दिया कि कुछ अजीब है इस लड़की में,,, जो दिखती हैं वो हैं नहीं,,, आज फिर वही मासूमियत काश्वी के चेहरे पर निष्कर्ष को दिखी जो उस समय नजर आई जब वो बस में चुपचाप अकेली अपनी दुनिया में उस दिन खोई सी थी,,,

रिजॉर्ट पहुंचकर निष्कर्ष ने धीरे से काश्वी को उठाया,, उसने अपनी आंखे खोली और कार से उतरकर अंदर चली गई,,, कुछ घंटों तक दोनों अपने अपने कमरे में ही रहे,,, फिर काश्वी को फोनकर निष्कर्ष ने बाहर आने को कहा,,,,

निष्कर्ष के साथ ग्रुप के बाकी लोग भी थे,,, सभी काश्वी से सवाल करने लगे,,, उससे पूछने लगे कि वो कहां थी और हुआ क्या था,,, काश्वी ने सब बताया पर निष्कर्ष चुप रहा,,, उसने कुछ नहीं कहा,,,, जब सबके सवाल खत्म हो गये तो काश्वी निष्कर्ष के पास गई और उसे फिर से सॉरी कहने लगी,,,,

मेरी वजह से आपको इतनी तकलीफ हुई उसके लिये सॉरी,,, काश्वी ने कहा

अब बस और परेशान मत हो,, सब ठीक है,,, कुछ खा लो और फिर पैकिंग कर लेना कल सुबह वापस जाना है,,,
निष्कर्ष ने कहा

बहुत रात हो गई थी लेकिन काश्वी को नींद नहीं आ रही थी उसने निष्कर्ष को फोन किया और पूछा, क्या आप सो गये?

निष्कर्ष ने हंसते हुए कहा,, हां नींद में बात कर रहा हूं,,, बोलो क्या हुआ?

कुछ नहीं ऐसे ही नींद नहीं आ रही,,, काश्वी ने जवाब दिया

अरे क्यों,,, कहां उड़ गई नींद? निष्कर्ष ने पूछा

नहीं पता,,, घर की याद आ रही है,,, वापस जाना है,,,, काश्वी की आवाज में अब थोड़ा भारीपन भी था

काश्वी क्या हुआ,,, सब ठीक हैं न,,,, वापस क्यों जाना है,,, यहां तो अच्छा लग रहा है तुम्हें फिर क्या बात है? निष्कर्ष ने पूछा

बस यूं ही मन नहीं लग रहा,,,, काश्वी ने फिर धीरे से कहा

ओह लगता है टाइगर को देखकर डर गई तुम? निष्कर्ष ने पूछा
काश्वी हंस दी,,, नहीं ऐसा कुछ नहीं,,, मैं नहीं डरती? अब थोड़ा अकेला सा लग रहा है इसलिये,,, काश्वी ने कहा

अकेला क्यों,,, सब तो हैं यहां,,,,मैं हूं ,,, निष्कर्ष ने काश्वी को समझाते हुए कहा

आप हो भी और नहीं भी,,, काश्वी ने कहा

अब इसका क्या मतलब है? निष्कर्ष ने पूछा

निष्कर्ष कुछ बातें परेशान करती है जब उनका जवाब नहीं मिलता,,, मुझे भी कुछ परेशान कर रहा हैं पर समझ नहीं आ रहा क्या करूं,,, काश्वी कुछ परेशान लहजे में बोली

काश्वी तुम्हें क्या परेशान कर रहा हैं,,, निष्कर्ष ने पूछा

नहीं पता,,, जब पता चलेगा तब बताउंगी,,, काश्वी ने कहा

काश्वी ज्यादा मत सोचो कल की थकान होगी इसलिये तुम परेशान हो,,, अभी आराम से सो जाओ,,, सुबह भी जल्दी निकलना है निष्कर्ष ने कहा
हां,,, शायद यही ठीक है आप भी सो जाओ,,, ये कहकर काश्वी ने फोन रख दिया

सुबह सुबह वो सब वापस जाने के लिये निकल पड़े, निष्कर्ष काश्वी के पास आकर बैठ गया और पूछा,,, तुम्हारा मूड ठीक है अब?

काश्वी ने मुस्कुराकर हामी भर दी,,,

निष्कर्ष समझ रहा था कि काश्वी का मूड अब भी कुछ ठीक नहीं,, तो उसने इधर उधर की बातें कर उसे बहलाने की कोशिश की,,, काश्वी को उस जगह के बारे में बहुत कुछ बताया,,, काश्वी भी बड़े ध्यान से सब सुनती रही,,,,

कुछ घंटों में वो वापस पहुंच गये,,, अब तो काश्वी का मूड भी ठीक था निष्कर्ष से बात करके उसे अच्छा लग रहा था,,,,

अगले दिन सुबह सबको उत्कर्ष सर की क्लास में पहुंचना था क्लास शुरू हो चुकी थी तभी काश्वी के मोबाइल पर निष्कर्ष का मैसेज आया जिसमें लिखा था कि उसे किसी काम से जाना पड़ रहा है,,, और वो एक हफ्ते के बाद वापस लौटेगा,,,, काश्वी ने मैसेज पढ़कर उससे पूछा कि वो कब जा रहा है,,,,

निष्कर्ष ने फिर मैसेज कर कहा कि शाम को ही उसे जाना होगा,,,,,,

क्लास खत्म हो गई तो काश्वी ने निष्कर्ष से पूछा कि वो कहां है,,,

निष्कर्ष ने काश्वी को उसी रूम में आने को कहा जहां उसने काश्वी को वो फोटोग्राफ दिखाई थी,,, काश्वी वहीं पहुंची,,, वो कमरा निष्कर्ष की मां का था,,, काश्वी ने अंदर आकर देखा तो निष्कर्ष वहीं था,,,
निष्कर्ष ने काश्वी से पूछा, कैसी रही क्लास?

हां अच्छी थी,,, आप कहां जा रहे हो? काश्वी ने पूछा

दिल्ली जा रहा हूं कुछ काम आ गया,,, जाना जरूरी है,,, तुम्हें जाना है वापस? निष्कर्ष ने पूछा

नहीं,, जब जाने को बोला था तो आपने कहां रूको,,, अब बोल रहे हो चलना है,,, अब नहीं जाना,,, आप जाओ,,,यहां क्यों बुलाया आपने मुझे,,, काश्वी ने पूछा

तुम्हें कुछ देना है इसलिये,,, निष्कर्ष ने कहा

क्या,,? काश्वी ने पूछा

ये कुछ किताबें हैं मेरी मां की,,, उन्हें किताबें पढ़ने का बहुत शौक था,,, बहुत संभाल कर रखा अपनी एक एक किताब को उन्होंने,,,,, मैंने इन्हें पढ़ता हूं जब भी अकेलापन लगता है अब लगता तुम्हें इनकी जरूरत है,,, अगर चाहो तो ले सकती हो,,, मन लगा रहेगा,,,,, बहुत अच्छी है ये,,, निष्कर्ष ने कुछ किताबें काश्वी को देते हुए कहा,,,,

काश्वी ने कुछ नहीं कहा,, चुपचाप वो किताबें ले ली,,,,और धीरे से निष्कर्ष को ये भी कहा कि कुछ किताबें वो अपने साथ ले जाए,,, क्योंकि उसे भी इसकी जरूरत पड़ने वाली है,,,,,

निष्कर्ष ने मुस्कुराते हुए कहा,, हां मुझे भी जरूरत पड़ेगी,,,

कुछ देर दोनों बातें करते रहे और फिर निष्कर्ष दिल्ली के लिये निकल गया,,,

रात को अकेले अपने कमरे में काश्वी ने उन किताबों में से एक को पढ़ना शुरू किया,,,, उसे पढ़ते हुए काश्वी को निष्कर्ष की बात याद आ रही थी,,, पढ़ते पढ़ते काश्वी कब सो गई उसे पता ही नहीं चला,,,,

सुबह के आठ बजे काश्वी की नीदं उसके फोन पर बज रही घंटी से खुली,,,, उसने देखा तो फोन निष्कर्ष का था,,,, निष्कर्ष ने बताया कि वो ठीक ठाक पहुंच गया,,, काश्वी ने निष्कर्ष को बताया कि वो वही किताब पढ़ रही थी जो निष्कर्ष ने दी थी,,,,

निष्कर्ष खुश हो गया और उसने भी बताया कि रास्ते भर उसने भी एक किताब पढ़ी,,,,

काश्वी भी ये सुनकर खुश हो गई,,, कुछ देर तक दोनों बात करते रहे,,,,फिर फोन रखकर काश्वी अपनी क्लास के लिये तैयार होने लगी,,,,

काश्वी का मूड अब फ्रेश था,,, क्लास में उत्कर्ष की सबसे फेवरेट स्टूडेंट भी धीरे धीरे काश्वी बन रही थी,,,, एक हफ्ते तक यही सब चलता रहा,,, पहले क्लास, फिर फोटोग्राफी और रात में काश्वी किताब पढ़ने लगी,,, जब भी निष्कर्ष को अपने काम से फुर्सत मिलती वो काश्वी को फोन कर लेता था,,, अब उनकी दोस्ती और गहरी हो रही थी अपनी अपनी किताबों की कहानियां भी वो एक दूसरे से शेयर करने लगे थे,,,,,,

सच ही है शायद जब दो दोस्त दूर होते हैं तो ज्यादा करीब आ जाते हैं,,,,सामने रहते हुए जो बातें नहीं हो पाती वो फोन पर आसानी से हो जाती हैं,,, क्योंकि तब लगता है कि थोड़ी सी भी फुर्सत हो तो बात कर ली जाए,,, काश्वी और निष्कर्ष के साथ भी यही हुआ,,,एक दूसरे से दूर थे लेकिन अब हर वक्त साथ थे,,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 27

कई दिन गुजर गये थे निष्कर्ष दिल्ली से वापस नहीं लौटा था,,,इधर काश्वी अपनी क्लास में मस्त थी,,, उत्कर्ष भी काश्वी से इम्प्रेस थे तो उस पर खास तौर से फोकस कर रहे थे,,, कहीं न कहीं उत्कर्ष को भी काश्वी में अपनी झलक नजर आ रही थी

एक शाम क्लास के प्रोजेक्टर पर काश्वी की फोटो देखते हुए उत्कर्ष उसे समझा रहे थे,,,और बातों बातों में उत्कर्ष ने काश्वी से उसके बारे में काफी बातें की,,, आम तौर पर अपने स्टूडेंटस से दूरी बनाने वाले उत्कर्ष अब काश्वी से खुलकर बात कर रहे थे,,, शायद ये काश्वी की खूबी थी कि उससे बात करने के लिये किसी को सोचना नहीं पड़ता,,, फिर उसका टेलेंट भी उत्कर्ष को उसके बारे में जानने के लिये उकसा रहा था,,,

काश्वी पहले तो उत्कर्ष से झिझकते हुए बात कर रही थी पर फिर सहज हो गई,,, निष्कर्ष और उसके पापा के बीच जो दूरी वो महसूस कर रही थी वो भी उसके जहन में कहीं चल रही थी,,, निष्कर्ष का ख्याल मन में आते ही काश्वी उत्कर्ष से बात करने में कुछ असहज महसूस करती पर जब उत्कर्ष की बातों से उसे समझने की कोशिश करती तो कुछ और ही तस्वीर बनती नजर आती,,,,,,

निष्कर्ष की कहानी सुनकर उत्कर्ष के बारे में जो राय काश्वी ने बनाई थी,, वो उत्कर्ष से बात करने के बाद कुछ और टूटती बनती नजर आ रही थी,,,

कभी कभी हम किसी के बारे में कुछ सुनकर राय बना लेते हैं लेकिन जब उसे जानने का मौका मिलता है तो अपनी समझ से उसे परखने की कोशिश करते हैं,,, हम में से हर कोई,, हर बार ये करें जरूरी नहीं लेकिन ये बात हमेशा याद रखनी चाहिए हर इंसान न तो हर वक्त अच्छा रह सकता है और न ही हर वक्त बुरा हो सकता है वक्त और हालात इंसान को अच्छा या बुरा बनने पर मजबूर करते हैं,,,, कुछ लोग कमजोर होते हैं और हालात को बदल नहीं पाते लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो हालात को अपने हिसाब से ढाल कर खुश रहते हैं,,,,

उत्कर्ष के बारे में अब काश्वी अपने तरीके से सोच रही थी,,, निष्कर्ष की बातें याद थी उसे लेकिन उसे लगा कि अब जब मौका मिला है उत्कर्ष को जानने का तो उनसे और बात करके वो उनका एंगल भी समझ सकती है,,,, काश्वी ने उत्कर्ष से उनके अनुभवों के बारे में कई बार बात की,,, उत्कर्ष अपने करियर में आए उतार चढ़ाव के बारे में बड़े चाव से काश्वी को बताते रहते थे शायद उन्हें भी लगता था कि काश्वी को बहुत आगे जाना है लेकिन काफी कोशिश के बाद भी काश्वी उत्कर्ष से उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में बात नहीं कर पाई थी शायद उसे डर था कि कही उत्कर्ष को बुरा न लगे,,,,

काश्वी ने उत्कर्ष के बारे में निष्कर्ष को कुछ नहीं बताया,,, वो उससे वैसे ही बातें कर रही थी,,,,शायद काश्वी को डर था कि उत्कर्ष के बारे में सुनकर कहीं निष्कर्ष को बुरा न लगे,,, कहीं इससे उनकी दोस्ती में कोई फर्क न आये,,,, ये डर इसलिये अब और बढ़ रहा था क्योंकि उत्कर्ष से बात कर काश्वी को लगा कि वो एक अच्छे इंसान हैं और काफी इमोशनल भी हैं हां दोनों में एक बात कॉमन लगी काश्वी को कि दोनों ही अपने इमोशंस को जल्दी जाहिर नहीं करते शायद यही वजह थी कि दोनों में दूरी आ गई थी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,


तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 28

इधर दिल्ली में निष्कर्ष जल्दी जल्दी काम खत्म करके वापस लौटने की तैयारी कर रहा था,,,, निष्कर्ष ने सोचा कि वो काश्वी को सरप्राइज देगा और बिना बताएं उसके सामने जाकर खड़ा हो जाएगा,,,, पूरा प्लान हो गया था दो दिन से निष्कर्ष ने काश्वी से बात भी नहीं की उसका फोन उठाया नहीं,,, मैसेज के जवाब में भी लिखा कि वो बिजी है बाद में बात करेगा,,, काश्वी ने भी फिर उसे डिस्टर्ब नहीं किया,,,,,,

वापस लौटते हुए पूरे रास्ते निष्कर्ष काश्वी के बारे में सोचता रहा,,, एक प्यारा सा तोहफा भी उसने काश्वी के लिये था,,, निष्कर्ष यही सोच रहा था कैसे वो काश्वी को ये तोहफा देगा,,, और जब उसके सामने जाएगा तो वो कैसे रिएक्ट करेगी,,,,, कई घंटे का रास्ता आज निष्कर्ष को कई दिन जितना लंबा लग रहा था वो खुश था कि आज उस जगह उसकी मां के बाद उसका इंतजार करने वाला कोई है,,, जिसके लिये उसे जल्दी पहुंचना है

निष्कर्ष के लिये काश्वी कुछ स्पेशल हो रही थी उसके बारे में सोचते ही निष्कर्ष के चेहरे पर स्माइल आ जाती थी उसकी छोटी छोटी बातें भी उसे याद आ रही थी,,, निष्कर्ष बहुत दिनों के बाद किसी के लिये इतना सोच रहा था उससे मिलना का इंतजार कर रहा था,,, कई बार उसने सोचा काश्वी को बता दें पर फिर ये सोचकर रूक गया कि काश्वी उसे अचानक सामने देखकर ज्यादा खुश होगी,,,,,,

शाम के पांच बजे निष्कर्ष वहां पहुंच गया,,,, अपना बैग रखकर वो सबसे पहले काश्वी से मिलने गया,,,, काश्वी के रूम में जाकर देखा तो वो लॉक था वहां कोई नहीं था,,,, निष्कर्ष थोड़ा हैरान था सोचने लगा कि किस वक्त वो कहां हो सकती है,,,,, उसने अपने स्टॉफ से पूछा तो पता चला कि वो क्लास में है,,,,,

निष्कर्ष क्लास की तरफ बढ़ रहा था थोड़ी पास पहुंचने पर उसे किसी के हंसने की आवाज आ रही थी,,,, एक आवाज उसके पापा की थी और दूसरी काश्वी की,,,

दरवाजे से अंदर घुसते ही निष्कर्ष ने देखा कि उत्कर्ष और काश्वी बात कर रहे थे उनके अलावा वहां और कोई नहीं थे उत्कर्ष की नजर निष्कर्ष पर पड़ी तो उन्होंने पूछा,,, अरे निष्कर्ष तुम कब आये? इतना कहते ही काश्वी ने मुड़कर देखा तो सामने निष्कर्ष था,,, काश्वी उसे देखकर चौंक गई उसने सोचा भी नहीं था कि निष्कर्ष यूं अचानक वहां आ जाएगा,,,,,

पर उस वक्त उस कमरे में सबसे ज्यादा शॉक में कोई था तो वो निष्कर्ष था उसे कुछ समझ नहीं आया,,,, इस तरह काश्वी और उत्कर्ष को बिना किसी औपचारिकता के बात करते देखकर निष्कर्ष को बहुत अजीब लगा उसे समझ नहीं आया वो क्या कहें,,,, उसने बस इतना ही कहा कि हां बस अभी पहुंचा,,,, चलो आप लोग बिजी हो,,, बाद में मिलते हैं,,, ये कहकर वो वहां से चला गया,,,,,,,,

उत्कर्ष को कोई फर्क नहीं पड़ा लेकिन काश्वी को समझ आ गया था कि निष्कर्ष क्या सोच रहा है,,,अपने भाव को छुपाने की कोशिश कर रही थी काश्वी,,, लेकिन बहुत कोशिश के बाद भी उसका ध्यान निष्कर्ष से हट नहीं रहा था काश्वी को पता था कि निष्कर्ष पर इस वक्त क्या बीत रही हैं,,, काश्वी का डर अब उसके सामने खड़ा था
उत्कर्ष अपनी बात कह रहे थे काश्वी की फोटोग्राफ को देखकर उसे और बेहतर करने के लिये समझा रहे थे लेकिन काश्वी का ध्यान उनकी बातों पर नहीं था वो तो निष्कर्ष के बारे में सोच रही थी,,,,,कुछ देर बाद उत्कर्ष को भी लगा कि काश्वी उनकी बात पर ध्यान नहीं दे रही और कुछ परेशान सी लग रही है उत्कर्ष ने आखिर पूछ ही लिया

क्या हुआ काश्वी, तुम्हारी तबियत ठीक है न?

अपने ख्यालों से बाहर आई काश्वी ने उत्कर्ष की बात का जवाब दिया,,,, हां, ठीक है क्यों?

नहीं मुझे लगा,,, चलो ऐसा करते हैं बाकी कल करेंगे अभी जाओ आराम करो, उत्कर्ष ने कहा

ये कहकर उत्कर्ष वहां से चले गये,,,, पर काश्वी कुछ देर वही बैठी रही,,, सोच रही थी कि आखिर हुआ क्या,,,,,

उधर निष्कर्ष का सारा जोश अब ठंडा पड़ चुका था,,, वो काश्वी को सरप्राइज देने आया था पर अब खुद ही सरप्राइज हो गया था,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 29

काश्वी काफी देर सोचती रही,,, कई बार ये भी सोचा कि निष्कर्ष से जाकर बात करें पर फिर उसे डर था कि पता नहीं उसे ये सब देखकर अच्छा लगा या नहीं,,,, जहां तक काश्वी निष्कर्ष को समझ पाई थी उसे अच्छा लगना तो मुश्किल था,,, हिम्मत करके आखिर काश्वी निष्कर्ष से मिलने उसके कमरे में गई

निष्कर्ष काश्वी को देखकर कुछ नहीं बोला,,, उसे अंदर आने का इशारा किया,,,,, अंदर आते ही काश्वी ने पूछा, दो दिन से कहां गायब थे कितने फोन किए,,,, मैसेज किए,,,,,,

बस कुछ बिजी था,,, काम हो गया तो वापस आ गया,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया

आप ठीक हो?,,, क्या हुआ?,,, काश्वी ने पूछा

कुछ नहीं,,, क्या हुआ? ,, और तुम बताओ कैसे चल रही है वर्कशॉप? निष्कर्ष ने जवाब दिया

बस ठीक है सब,,, काश्वी ने कहा

बस ठीक,,,,,,थोड़ा रूककर निष्कर्ष ने फिर कहा,,, पापा तो बहुत खुश लग रहे थे तुम्हारे साथ,,,,,

काश्वी निष्कर्ष को देखती रही फिर कहा,,, आपको अच्छा नहीं लगा क्या?

निष्कर्ष ने मुस्कुराते हुए कहा,,, अच्छा,,, बुरा,,,, क्या फर्क पड़ता है,,, पर बहुत दिन बाद उन्हें हंसते हुए देखा,,,,,

हां उनका मूड थोड़ा अच्छा था,,, एक पुरानी बात बता रहे थे वो,,,, अपने एक असाइनमेंट की,,,, काश्वी ने कहा,

अच्छा है,,, तुम्हारे करियर के लिये ठीक होगा उनके एक्सपीयरेंस से बहुत कुछ सीखने को मिलेगा,,,,निष्कर्ष ने कहा

हां ये तो हैं,,, खैर ये सब छोड़ो आप बताओ काम हो गया सब ठीक से,,, काश्वी ने बात बदलने की कोशिश की

हां सब ठीक हो गया,,, काश्वी एक काम करते हैं डिनर के टाइम मिलते हैं अभी बहुत थक गया हूं थोड़ा आराम करना चाहता हूं,,, निष्कर्ष ने कहा

काश्वी समझ गई कि अभी निष्कर्ष बात करने के मूड में नहीं है,,,, तो वो वहां से चुपचाप चली गई

काश्वी को ऐसे भेजने पर निष्कर्ष को थोड़ी तकलीफ भी हुई वो सोच रहा था कि आखिर उसे हुआ क्या,,,, बहुत कुछ चल रहा था निष्कर्ष के दिल दिमाग में,,,, वो खुद से ही बातें कर रहा था कि काश्वी को यहां वो ही लेकर आया ताकि वो उत्कर्ष से सीख सके और अब जब उसके पापा काश्वी से अच्छी तरह पेश आ रहे हैं उसे सब सिखा रहे हैं वो उसे क्यों बुरा लगा,,,,, क्यों काश्वी को लेकर उसके मन में इतना कुछ चल रहा है,,,,, काफी देर तक सोचने के बाद निष्कर्ष की नजर उस गिफ्ट पर गई जो वो काश्वी के लिये लाया था,,,,अब उसे लगा कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था काश्वी को इतने दिनों बाद देखकर उसे यूं जाने के लिये नहीं कहना चाहिए था,,, पर अब पछताने के अलावा उसके पास कोई चारा नहीं था

तीन घंटे के बाद निष्कर्ष और काश्वी फिर आमने सामने थे,,, डिनर हॉल में सब जमा थे,,, काश्वी वहीं सबके बीच बातें करती दिखाई दी निष्कर्ष को,,,, निष्कर्ष उसे देखकर उसके सामने जाकर खड़ा हो गया,,, काश्वी अचानक उसे अपने सामने देखकर चौंक गई,,, फिर जैसा निष्कर्ष ने पहले सोचा था वैसा ही किया,,,, काश्वी के आगे वो तोहफा बढ़ा दिया जो वो दिल्ली से उसके लिये लाया था,,,,

काश्वी ने देखा कि निष्कर्ष उसे कुछ दे रहा हैं,,,, उसने चौंक कर पूछा,, ये क्या है,,?

निष्कर्ष ने कहा,,, तुम्हारे लिये है देखो?

उस छोटे से बॉक्स को काश्वी ने देखा तो वो एक इलेक्ट्रोनिक डिवाइस की तरह था,,,, काश्वी ने हैरानी से पूछा ये क्या है?

ये सोलर बैटरी है कभी भी किसी इलेक्ट्रोनिक गैजेट जैसे फोन या लैपटॉप की बैट्री खत्म हो तो इसे उसके उपर रख दो चार्ज हो जाएगा,,,, और अगर इसे चार्ज करना हो तो सूरज के आगे दो घंटे रख दो,,,, तुम्हारे काम आएगा,,,, अगली बार जंगल ट्रिप पर जाओ तो,,,, एटलीस्ट तुम कांटेक्ट में तो रहोगी,,,,,,ये कहकर निष्कर्ष मुस्कुराने लगा

वाह,, ये तो बड़े काम की चीज है,,,,, आपका इनवेंशन है?,,,,, काश्वी ने पूछा

हां तुम्हारे साथ उस दिन वहां जंगल में जाने के बाद आइडिया आया,,,, इसी को बनाने जाना पड़ा दिल्ली,,,, सबको बहुत पंसद आया,,, एक बड़ा प्रोजेक्ट मिला है इसके लिये,,, तुम्हारी वजह से ये बना तो पहला तुम्हारे लिये,,,,, निष्कर्ष ने खुश होकर कहा

काश्वी देख रही थी कि कुछ देर पहले जो निष्कर्ष उसके सामने था वो कोई और था और अब उसका दोस्त उसके सामने है,,,, काश्वी बहुत खुश थी,,,,दोनों ने साथ डिनर किया और फिर काश्वी को निष्कर्ष ने उस डिवाइस को बनाने का पूरा प्रोसेस भी समझाया,,,, हां ये अलग बात थी कि काश्वी की समझ में ज्यादा कुछ नहीं आया,,,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 30

दोस्ती ऐसी हो कि कोई दीवार बीच में न आ पाये,,,, दोस्ती ऐसी हो कि कोई बात मन में न रह जाये,,,,,, बात हो तो दिल खोल के और साथ रहे तो पूरी तरह,,,,, ये दोस्ती का अंदाज है अगर सच्ची दोस्ती करनी हो तो,,,,,

निष्कर्ष और काश्वी भी दोस्ती के सही मायने समझ रहे थे,,, कुछ चीजें सिखाती और जिंदगी में जो होता है उससे हम अपने आप सीख जाते हैं,,,, निष्कर्ष और काश्वी की दोस्ती अब अगले पड़ाव की तरफ बढ़ रही थी जहां से दोनों अपने रास्ते जोड़ रहे थे,,, इस तरह की फिर कभी कोई अलग न कर सके,,,,

निष्कर्ष को जो बुरा लगा उसे अपने और काश्वी के बीच में वो आने नहीं देना चाहता था और काश्वी भी यही सोच रही थी कि उससे कुछ ऐसा न हो जिससे निष्कर्ष को बुरा लगे,,,, जब खुद से ज्यादा दूसरे के बारे में सोचने लगे,,, उसकी पंसद नापंसद का ख्याल रखे और खुद को उसके हिसाब से ढालने लगे तो ये है दोस्ती का दूसरा पड़ाव,,,,,,,हां,,, यहां से आगे बहुत सारे रास्ते खुलते हैं पर उसके बारे में दोनों में कोई नहीं सोच रहा

खैर वर्कशॉप भी अपने आखिरी पड़ाव पर था,,,, एक महीने की वर्कशॉप का आखिरी हफ्ता बचा था,,, काश्वी अपने काम में लगी थी,,, और निष्कर्ष पूरे ग्रुप को संभालने में,,, बीच बीच में दोनों एक साथ घूमने भी निकल जाते थे,,,

उधर उत्कर्ष भी काश्वी की वजह से बाकी ग्रुप से घुलने मिलने लगे थे,,,, उनके लिये भी इस बार की ये वर्कशॉप कुछ पाजिटिव लेकर आई,,,,,अब वो हर सुबह ब्रेकफास्ट और डिनर में सबके साथ नजर आने लगे थे,,,, निष्कर्ष भी ये महसूस कर रहा था कि कुछ तो चेंज हो रहा है उसके आस पास,,,, जो तन्हाई और अकेलापन उसे इस जगह दिखता था वो अब नहीं था,,, हर साल यहां एक ग्रुप को वो लेकर आता था लेकिन खुद हमेशा अकेला ही रहा,,, पर अब उसकी खामोशी को आवाज मिल गई थी,,, उसकी मां के जाने के बाद जो घर काटने को दौड़ता था अब वही अच्छा लगने लगा था,,, काश्वी से ज्यादा अब निष्कर्ष को लग रहा था कि कहीं ये दिन जल्दी खत्म न हो जाएं,,,,,,,,,,,,,,,,,क्योंकि अब शायद इस वर्कशॉप से काश्वी ने जितना फोटोग्राफी के बारे में सीखा,,, उससे ज्यादा निष्कर्ष ने जिंदगी को जीने के बारे में सीख लिया था,,,,,,,,,,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 31
जब दर्द बांटने वाला कोई मिल जाता है तो दर्द का एहसास भी कम हो जाता है,,,,यही हो रहा था,,,,सब खुश थे मौज मस्ती के साथ दिन गुजर गये थे,,,, वर्कशॉप में भी अब सब खुश थे,,, अब सिर्फ तीन दिन बाकी थे लास्ट असाइनमेट के लिये उत्कर्ष ने सबको एक फोटो फीचर करने का असाइनमेंट दिया और दो दिन का वक्त,,,, इन दो दिनों में अपने पंसद का कोई भी विषय चुनकर उसे तस्वीरों के जरीये एक्सप्लेन करना था,,,, वो कुछ भी हो सकता था,,, इसका ऐलान होते ही काश्वी कुछ टेंशन में आ गई थी उसके दिमाग में कुछ नहीं था,,, क्या करना है ये सोच सोच कर वो परेशान हो रही थी,,, अब तक सबसे मुश्किल असाइनमेंट था ये उसके लिये क्योंकि अब तक जो मिला वो किसी खास चीज पर बनाने को कहा गया था पर अब सब उसे खुद करना था,,,, टॉपिक सोचना, जगह ढूंढनी और फिर थीम भी ऐसी हो जिसका कोई मतलब हो,,,,,


क्या हो सकता है,,, सोच ही रही थी काश्वी कि उसके पास आकर निष्कर्ष खड़ा हो गया,,, निष्कर्ष ने काश्वी से पूछा क्या हुआ क्यों परेशान हो?

कुछ समझ नहीं आ रहा,,, असाइनमेंट के लिये क्या करूं और कहां जाउं कुछ नहीं पता,,,,, काश्वी ने जवाब दिया

निष्कर्ष ने पूछा तो काश्वी ने असाइनमेंट के बारे में सब बताया,,,,

निष्कर्ष सुनकर सोचने लगा कि वो क्या हो सकता है,,, जिसे काश्वी अपनी थीम बनाये,,, पर उसकी समझ में भी कुछ नहीं आ रहा था

दोनों काफी देर तक सोचते रहे फिर निष्कर्ष ने काश्वी से बाहर चलने के लिये पूछा,,, शाम के समय दोनों बाहर निकल गये,,,, पहाड़ों के बीच लंबे से रास्ते पर चलते हुए दोनों अपने कदमों को गिन रहे थे फिर सामने उड़ते पंछियों को देखकर निष्कर्ष ने कहा चलो एक काम करते हैं इस रास्ते में जो भी दिखे उसके बारे में सोचते हैं क्या पता कुछ ऐसी थीम मिल जाये तुम्हारे असाइनमेंट के लिये,,,,,

काश्वी मुस्कुराई और कहा,, हां ये अच्छा आइडिया है चलो देखते हैं किस पर हो सकता है पहले आप बोलो,,,

सामने रास्ता है रास्ते पर,,,,,,,, निष्कर्ष ने कहा

हम्म,,, पर रास्ते तो यहां सब एक से ही लगते हैं,,,, नहीं कुछ और सोचो,, काश्वी ने जवाब दिया

अच्छा फिर ये पेड़ पौध्रे,,, कितने सारे फूल है यहां उन पर,,,, निष्कर्ष ने एक और आइडिया देते हुए कहा

नेचर पर तो बहुत लोगों ने काम किया और हमारे ज्यादातर असाइनमेंट इसी पर थे ये भी नहीं,,,, काश्वी ने कहा

चलते चलते वो पास के एक छोटे से बाजार में पहुंचे,,, रंगों से भरे इस बाजार में बहुत कुछ था जो देखने लायक था
तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 32

दुकानों के बाहर लटके रंग बिरंगे कपड़े, ठंड का एहसास कराते गर्म कपड़ों से सजे शेल्फ,, पेड़ों को काटकर छोटे छोटे आकार में ढलती खूबसूरत चीजें,, एक तरफ खाने की खुश्बू और दूसरी तरफ चहलकदमी करते लोग जिनके हाथों में ढेरों सामान और चेहरे पर हल्की मुस्कान थी,,,,,,,

निष्कर्ष और काश्वी एक एक कर हर चीज को एक फोटोग्राफर के नजरिये से देखते हुए उसमें अपनी कहानी ढूंढ रहे थे लेकिन अब तक कुछ ऐसा नहीं ढूंढ पाये जिस पर नजर जा टिके,,,,,

कुछ नया, कुछ अलग और कुछ ऐसा जिसका कुछ मतलब भी हो,,,,, काश्वी की आंखे इधर उधर भटकती रही थी और वो ये कहती जा रही थी जिससे निष्कर्ष समझ सके कि उसे क्या चाहिए,,,,,

काफी देर तक दोनों यही बातें करते करते मस्ती करते रहे,,,, निष्कर्ष की बातें सुनकर कभी काश्वी हंसती तो कभी गुस्सा होकर उससे बात करना बंद कर देती,,,,

ऐसे ही एक पल में काश्वी ने गुस्से में निष्कर्ष से कहा,,, आपको मजाक लग रहा है कल सुबह मुझे जाना है और अब तक कुछ तय नहीं हुआ है,,,,,,,,,,,,,,,

अरे मजाक नहीं,,,, बस कुछ आइडिया नहीं आ रहा तो ऐसे ही,,,,, चलो ठीक है अब कुछ नहीं सीरीयसली बात करेंगे,,,, चलो तुम्हें एक अच्छी जगह ले जाता हूं,,,,,निष्कर्ष काश्वी को एक छोटे से रेस्टोरेंट में ले गया,,,, खुले आसमान के नीचे बस कुछ बेंच लगे थे वहां,,,, उस छोटी सी जगह में ज्यादा कुछ नहीं था लेकिन वो जगह ऐसी थी कि वहां की शांति में बस डूब जाने को मन करें,,,,,,

काश्वी को जगह बहुत पंसद आई ये उसके कम होते गुस्से से जाहिर हो गया था,,,,निष्कर्ष ने वहां का मश्हूर खाना भी ऑर्डर कर दिया,,,, काश्वी को कुछ समझ नहीं आया कि निष्कर्ष ने क्या कहा,,,, तो उसने पूछा ये क्या है?

ये यहां का खाना है तुमने शायद कभी खाया न हो देखना बहुत टेस्टी है तुम्हें पंसद आएगा,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया,,,,

जब तक खाना आया तब तक निष्कर्ष ने काश्वी का मूड ठीक करने के लिये कुछ और बात शुरू कर दी,,,,,बातों बातों में उसने काश्वी को अपने पीछे देखने को कहा,,,, वहां एक छोटा सा बच्चा खेल रहा था,,, छोटी छोटी आंखे और खिलखिलाती हंसी लिये वो मासूम सा बच्चा अपने मां बाप के साथ वहां आया था लेकिन बार बार अपने पापा का हाथ छुड़ा कर भाग रहा था,,, काश्वी ने देखा तो उसे बहुत प्यारा लगा वो,,, उसने अपना कैमरा निकाला और उसकी बच्चे की सारी शैतानी कैमरे में कैद करने लगी,,,, कभी भागता, कभी गिरता,,,, पापा पकड़े तो रोकर छुड़ा लेता,,, बस बिंदास,,,अपनी मस्ती में चलना चाहता था वो पर पापा कैसे छोड़ देते यूंही उन्हें डर था कि कहीं वो गिरकर चोट न लगा ले इसलिये बार बार उसे पकड़ते,,,,,,,, उस नन्हें शौतान की मस्ती भरी हरकतों से काश्वी मुस्कुराने लगी और अपने कैमरे में ली फोटोग्राफ को निष्कर्ष को दिखाकर खूब खुश हुई,,,,, वो बच्चा वहां से गुजर गया लेकिन अपनी मासूमियत भरे लम्हों को याद बनाकर उन दोनों को दे गया था,,,,,

माहौल अब कुछ खुशनुमा हो गया,,, ठंडी हवाएं भी उन्हें सहलाकर जा रही थी,,,, और अब तो उनका खाना भी आ चुका था,,, प्लेट से आ रही खुश्बू काश्वी को खाने के लिये ललचा रही थी लेकिन अब भी उसे समझ नहीं आया कि वो है क्या,,,,, तो उसने निष्कर्ष से फिर पूछा,,, बहुत टेंपटिंग लग रहा है पर ये है क्या?

ये जो देख रही हो ये चावल के आटे से बना अरसा है और ये पिसी हुए उड़द से बनी पकोड़िया,,,और ये तिल और धनिये की चटनी,,,, खाकर देखो बहुत टेस्टी है,,,,,

अच्छा,, ये तो बहुत हैल्दी भी लग रहा है,,, काश्वी ने खाना शुरू किया तो उसे बहुत अच्छा लगा,,,, खाते खाते वो कहने लगी बहुत अच्छा है अब खिलाया आपने जब दो दिन में वापस जाना है अब तक क्यों नहीं ले कर यहां,,,,,,

हां ये तो कभी सोचा नहीं,,, हमारे यहां भी खाना वही बनता है जो सब खा लें,,,, वैसे इसका असली मजा लेना हो तो यहां की किसी शादी में जाना,,, असली टेस्ट वहीं हैं,,,,, गांव में जब कोई शादी होती है तो सब मिलकर खाना बनाते हैं,,, पूरे पांरपरिक तरीके से,,, उसमें कोई मिलावट नहीं होती इसलिये सब बहुत अच्छा लगता है,,,,,निष्कर्ष ने कहा,,,

ठीक है आप ले चलना जब किसी की शादी हो तो,,,, काश्वी ने कहा

अभी तो नहीं है लेकिन जब होगी तो तुम्हें बुला लूंगा,,,, आओगी वापस यहां? निष्कर्ष ने पूछा

काश्वी ने निष्कर्ष को देखा,,,,और सोचने लगी कि ये सवाल यूंही निष्कर्ष ने पूछ लिया या फिर कुछ और मतलब है इसका,,,,, जब तक वो ये सोच रही थी निष्कर्ष ने फिर पूछा,,, बोलो तुम्हें ये जगह पंसद है न,,,, फिर से आओगी न?

काश्वी मुस्कुराई और कहा,,, हां ऐसा खाना खाने तो दोबारा आना ही पड़ेगा,,,, काश्वी ने जवाब दिया

काश्वी का जवाब सुनकर निष्कर्ष खुश था जैसे उसके जवाब में उसने उसका जवाब भी सुन लिया जो सवाल वो असल में करना चाहता था,,,,, निष्कर्ष ने खुश होकर कहा,, ये तो बस ट्रेलर है पिक्चर तो बाकी है यहां और बहुत कुछ है जो तुम्हें पंसद आएगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,


तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 33

हां, सही कहा आपने ये जगह बहुत सुंदर है यहां वापस आना ही पड़ेगा,,,,, काश्वी ने भी निष्कर्ष की हां में हां मिलाते हुए कहा

डिनर करने के बाद दोनों वापस लौटने लगे,,, चलते चलते रास्ता छोटा लगने लगा,,,, निष्कर्ष ने एक लंबी सांस ली और आस पास की खामोशी को महसूस करने लगा,,, काश्वी भी उस खामोशी को महसूस कर रही थी इसलिये कुछ नहीं कहा,,,,,

दोनों चुपचाप चलते रहे,,,घर आ गया था,,,, गार्डन से होते हुए अंदर चलते चलते काश्वी अचानक रूक गई,,, निष्कर्ष ने देखा तो वो भी रूक गया,,,,और पूछा क्या हुआ काश्वी?

कुछ देर यहां रूके,,,अभी नींद नहीं आ रही,,,, काश्वी ने कहा

बहुत रात हो गई है काश्वी तुम थकी नहीं,,,, निष्कर्ष ने कहा

नहीं मैं ठीक हूं,,,, बस यहां अच्छा लग रहा है ऐसा मौसम दिल्ली में नहीं होता,,,, इतनी ताजी हवा वहां कहां मिलेगी,,,,, काश्वी ने कहा

क्या हुआ काश्वी? ये पूछते हुए निष्कर्ष को लगा कि काश्वी कुछ सीरियस हो गई है

वापस जाने का मन नहीं है यहां अच्छा लग रहा है,,,, काश्वी की आंख में एक आंसू भी था,,, अपनी आंखों की नमी छुपाते हुए काश्वी ने कहा

अरे ये क्या है,,,, इतना इमोशनल क्यों हो रही हो,,, तुम जब चाहे यहां आ सकती हो,,,, हमारा घर है यहां रूक सकती हो,,,, निष्कर्ष ने कहा

हां पर ये वक्त दोबारा नहीं आएगा इसलिये,,,, यहां इतनी फुर्सत में आपसे बात कर रही हूं अभी वर्कशॉप खत्म होगी तो सब बिजी हो जाएगा,,,, फिर पता नहीं कब हम ऐसे मिल पाएंगे,,, काश्वी ने कहा

अच्छा तो ये बात है तुम्हें मुझसे दूर जाने में तकलीफ हो रही है,,,,, निष्कर्ष ने काश्वी को हंसाने के लिये मजाक किया

हां ऐसा ही कुछ है,,,,,निष्कर्ष की आंखों में देखते हुए काश्वी ने कहा

कुछ पल दोनों खामोश रहे,,,, काश्वी जो सोच रही थी जिसकी वजह से उसे तकलीफ हो रही थी वो बात निष्कर्ष समझ गया था लेकिन शायद अभी ठीक समय नहीं था इन बातों के लिये इसलिये उसने बात को टालना ही बेहतर समझा और कहा,,,, काश्वी इसमें परेशान होने वाली कौन सी बात है,,, मैं भी तुम्हारे शहर में ही रहता हूं जब भी तुम बुलाओगी आ जाउंगा,,,

सच में आप मुझसे मिलोगे दिल्ली में,,,, काश्वी ने एक्साइटेड होकर कहा

हां,,,, हां,,,, क्यों नहीं काश्वी,,, हम दिल्ली में भी ऐसे ही दोस्त रहेंगे,,,, निष्कर्ष ने जवाब दिया


तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 34

काश्वी मुस्कुराई,,, शायद उसे यही सुनना था,,,,

निष्कर्ष ने काश्वी से पूछा एक बात बताओ,,, तुम तो दिल्ली में रही हो हमेशा फिर नेचर से कितनी करीबी कैसे हो गई,,, दिल्ली की लड़कियों को तो बड़े बड़े मॉल्स और फोरेन ट्रिप्स पर जाने का शौक होता है और तुम यहां इस छोटी सी जगह में खुश हो,, यहां से जाना नहीं चाहती है,,,, ऐसा क्या है काश्वी? तुम बाकी सबसे अलग कैसे हो?

हां ये सही कहा,, मैं भी जिन लड़कियों को जानती हूं वो कभी ऐसी जगह आने के बारे में कोई सपना तो नहीं देखेगी,,,पता है मेरी जितनी सारी फ्रेंडस है सब बोलती थी उन्हें यूएस जाना है या लंदन, सिंगापुर, स्वीट्जरलैंड जाना है कई तो गई भी लेकिन मुझे,,,,,,,,,, पता नहीं क्यों ऐसा कुछ सोचा नहीं कभी,,,,, मुझे लगता है आप जहां रहो उसकी खूबसूरती को समझो, उसे इंजॉय करों, जरूरी नहीं जो फेमस है वहीं सुंदर है ये जगह शायद दुनिया के टूरिस्ट डेस्टिनेशन की लिस्ट में न आये पर मेरी लिस्ट में अब ये सबसे उपर है,,,,

अच्छा ऐसी क्या खासियत है इस जगह में,,,,, निष्कर्ष ने पूछा

यहां आने से पहले आपने ही कहा कि जिंदगी की झलक नहीं दिखती मेरी फोटोग्राफी में,,,, अब एक महीना यहां रहने के बाद फोटोग्राफी तो पता नहीं पर अपनी जिंदगी में जिंदगी की झलक जरूर दिखी और वो सबसे प्यारा ख्याल है ऐसी याद लेकर यहां से जाउंगी जो हमेशा मेरे साथ रहेगी,, काश्वी ने जवाब दिया

ओ हो,,, लगता है तुम अच्छी फोटोग्राफर के साथ अच्छी राइटर भी बनोगी,,,, बातें बहुत अच्छी करती हो मन करता है बस सुनता रहूं,,,,, निष्कर्ष ने हंस कर कहा

मेरी बातें,,,,, हां,,,,,,, काश्वी भी हंस कर बोली,,,,, वैसे आप ऐसे पहले इंसान हो जिससे मैं इतनी बातें कर रही हूं,,,, काश्वी ने कहा

हां मुझे याद है जब तुम यहां आई थी तो किसी से बात नहीं कर रही थी अपनी दुनिया में मस्त थी वो तो शायद मेरी किस्मत अच्छी थी कि तुम्हें मुझसे काम पड़ा इसलिये शायद हम दोस्त बन गये नहीं तो मैं भी तुम्हारे लिये अजनबी ही रहता,,,, निष्कर्ष ने कहा

नहीं ऐसा नहीं होता आज नहीं तो कल मैं आपसे बात जरूर करती,,,, काश्वी ने मुस्कुरा कर कहा

अच्छा वो क्यों? निष्कर्ष ने पूछा
क्योंकि आप मेरे टाइप के हो,,, इसलिये,, काश्वी ने कहा

तुम्हारे टाइप का!!!!! मतलब??? निष्कर्ष ने हैरानी से पूछा

वो कल बताउंगी अभी थोड़ी ठंड लग रही है अंदर चले,,,, काश्वी ने कहा
तलाश में हूं खुद की पार्ट 35
काश्‍वी और निष्‍कर्ष दोनों अंदर चले गये,,,,,अगले दिन जब निष्‍कर्ष उठा तो उसके मोबाइल पर काश्‍वी का एक मैसेज था जिसमें लिखा था कि उसे आइडिया मिल गया और वो फोटो लेने बाहर जा रही है सुबह 6 बजे ही काश्‍वी अपने असाइनमेंट को पूरा करने निकल गई थी,,,,, निष्‍कर्ष खुश था कि काश्‍वी को उसका असाइनमेंट पूरा करने का आइडिया मिल गया तो उसने काश्‍वी को ऑल द बेस्‍ट लिखकर एक एसएमएस कर दिया,,,,,
निष्‍कर्ष ने पूरा दिन काश्‍वी को डिस्‍टर्ब नहीं किया,,,,,, वो अपने कमरे में ही अपना काम करता रहा,,,, शाम को खिडकी से बाहर देख रहे निष्‍कर्ष को सामने से काश्‍वी आती दिखाई दी,,,,,,काश्‍वी को आता देख निष्‍कर्ष उससे मिलने नीचे आ गया,,,,
काश्‍वी भी निष्‍कर्ष को सामने देखकर खुश थी,,,, निष्‍कर्ष ने पूछा, काम हो गया,,,,
हां हो गया,,,,, काश्‍वी ने कहा
तो अब,,,,, निष्‍कर्ष ने पूछा
अब इसका पूरा प्रेजेंटेशन तैयार करना है हम डिनर में मिलें,,, काम खत्‍म करना हैं काश्‍वी ने कहा,,,,
क्‍या मैं मदद करुं काश्‍वी,,, निष्‍कर्ष ने पूछा
नहीं,, मैं कर लूंगी,,,,काश्‍वी ने मुस्‍कुराकर कहा और फि‍र वहां से चली गई,,,,,,
निष्‍कर्ष जानता था कि काश्‍वी उसकी मदद नहीं लेगी इसलिए उसे फोर्स नहीं किया और जाने दिया,,,,,
पहले फोटो सिलेक्‍ट करने थे और फि‍र उनके जरीये एक कहानी कहनी थी काश्‍वी के पास काम ज्‍यादा था और वक्‍त कम,,,अपने कमरे में पहुंचकर वो काम में जुट गई,,, वो जानती थी कि ये उसका उत्‍कर्ष का दिया हुआ आखिरी असाइनमेंट था तो इसमें पूरी जी जान लगाकर वो जुटी रही,,,, वक्‍त का कुछ पता नहीं चला उसे देखते देखते चार पांच घंटे गुजर गये और काश्‍वी को पता ही नहीं चला,,,,,
जब बहुत देर हो गई तो निष्‍कर्ष ने काश्‍वी को फोन किया,,निष्‍कर्ष ने काश्‍वी को डिनर के लिये नीचे आने को कहा तो काश्‍वी ने मना कर दिया,,,काश्‍वी ने कहा कि उसका बहुत काम बाकी है और उसे खत्‍म करना है
काम तो हो जाएगा डिनर करने के लिये आओ,,,, निष्‍कर्ष ने फि‍र कहा तो काश्‍वी मना कर नहीं कर पाई,,,,,
नीचे आकर वो जल्‍दी जल्‍दी खाना खाने लगी तो निष्‍कर्ष उसे देखकर हंसने लगा,,, इतनी जल्‍दी क्‍या है काश्‍वी कल शाम में हैं प्रजेंटेशन तुम्‍हारे सुबह भी टाइम होगा,,,,,
हां पर मुझे नींद नहीं आएगी जब तक ये खत्‍म नहीं होगा,,,, काश्‍वी ने खाते खाते कहा,,, और अचानक उठ कर खडी हो गई,,,,
खा लिया अब जाउं,,,,,काश्‍वी ने पूछा
नहीं,,,,,अभी नहीं,,, निष्‍कर्ष ने शरारत भरे अंदाज में कहा

हां ना प्‍लीज मैं जाउं काश्‍वी ने मासूमियत से कहा,,,
अब निष्‍कर्ष जानता था कि काश्‍वी रुकने वाली नहीं तो उसने मुस्‍कुरा कर सर हां में हिला दिया पर साथ ही कहा,,, ठीक है जाओ पर सबसे पहले मुझे दिखाओगी अपना असाइनमेंट,,,,,,
हां पक्‍का आपको ही दिखाउंगी,,, अब जाउं,,, काश्‍वी ने कहा
हां ठीक है,,, निष्‍कर्ष का ये जवाब सुनते ही काश्‍वी वहां से चली गई
एक कहानी बुननी थी जिसमें तस्‍वीरों बातें करती,,,,तस्‍वीरों में ही हंसी, खुशी का दरिया लाना था और उन्‍हीं के जरीये आंसू की बूंदे भी बरसानी थी,, काश्‍वी के लिये ये असाइनमेंट बहुत खास हो गया था इसकी कई वजह थी लेकिन वो जो करने जा रही थी उसका असर क्‍या होगा इससे वो अनजान थी,,,, क्‍या निष्‍कर्ष और उत्‍कर्ष को ये पंसद आएगा ये सोचना भी वो नहीं चाहती थी उसे बस इतना पता था कि जो वो करने जा रही है उस पर उसे पूरा भरोसा है
सही है हमेशा कुछ भी करने से पहले उसके अंजाम के बारे में सोचकर परेशान नहीं होना चाहिए कभी कभी दिमाग की नहीं दिल की भी सुननी चाहिए जरूरी नहीं कि जो अंजाम आप सोचकर कोई काम करने या न करने का फैसला लें उसका अंजाम वही हो ,,, कुछ बातें हमारी समझ से परे होती है हम तो वही सोच पाते है जो हमें पता होती है लेकिन हमारी सोच के दायरे के बाहर एक पूरी दुनिया है जहां ऐसी चीजें भी होती है जिनके बारे में हमें पता ही नहीं होता इसलिए कभी कभी कुछ बिना किसी डर के करना चाहिए पर इसके लिये खुद पर भरोसा होना जरूरी है अगर आपको लगता है कि आप सही है तो फि‍र कुछ और सोचने की जरूरत नहीं होती,,,,
काश्‍वी के पास यही आत्‍मविश्‍वास था जिसको साथ लेकर वो आगे बढ रही थी,,,,,,
रात के ढाई बजे थे जब काश्‍वी ने राहत की सांस ली उसका पूरा प्रेजेंटेशन तैयार था,,, जैसा उसने सोचा था ठीक वैसा ही,,,,उसे पूरा करते करते वो बहुत थक गई थी लेकिन उसे देखने के बाद उसकी सारी थकान दूर हो गई,,,,,,अब काश्‍वी अपनी आंखे बंद कर उस लम्‍हें के बारे में सोचने लगी जब सब उसकी बनायी इस कहानी को देखेंगे,,,, अभी वो ये सोच ही रही कि उसे निष्‍कर्ष की कही बात याद आ गई,,,,उसने फौरन निष्‍कर्ष को फोन किया पर रात के ढाई बजे जाहिर है वो सो रहा था,,,,,काफी देर तक घंटी बजती रही पर शायद निष्‍कर्ष फोन साइलेंट करके सोया था तो बात नहीं हो पाई
काश्‍वी को थोडा गुस्‍सा भी आया पर फि‍र टाइम देखकर उसने सोचा इतनी रात को निष्‍कर्ष सोएगा नहीं तो और क्‍या करेगा,,,,
सुबह जब निष्‍कर्ष उठा तो उसने अपने फोन पर कई मिस कॉल देखी,,,,, रात के ढाई बजे काश्‍वी क्‍यों फोन कर रही थी ये सोचकर निष्‍कर्ष कुछ परेशान भी हुआ उसने तुंरत काश्‍वी को कॉल किया लेकिन फोन उठा नहीं,,,, शायद अब काश्‍वी फोन साइलेंट करके सो गई थी,,,, निष्‍कर्ष से रहा नहीं गया तो वो काश्‍वी के रूम में पहुंच गया,,, दो बार घंटी बजाने के बाद दरवाजा खुला,,,,,आंधी नींद में लग रही काश्‍वी ने दरवाजा खोला,,, सामने निष्‍कर्ष को देखकर पूछा,,,सुबह हो गई क्‍या,,,,
सुबह के आठ बजे है काश्‍वी तुम सो रही हो अब तक,,,, निष्‍कर्ष ने पूछा
काश्‍वी वापस अंदर आकर बैठ गई,,,, उसकी आंखे अभी भी पूरी तरह खुली नहीं थी

निष्‍कर्ष ने उसकी हालत देखकर पूछा,,, रात को ढाई बजे कॉल क्‍यों किया,, रात भर काम कर रही थी क्‍या,,,, सोई कब,,,,,
आपने कहा था जब काम पूरा हो तो आपको बताओ तो वही किया पर आपने फोन नहीं उठाया,,,,,
अच्‍छा काम हो गया दिखाओ क्‍या बनाया,,,, निष्‍कर्ष ने खुश होकर कहा
अब काश्‍वी की आंखे पूरी तरह खुल गई,,, अब क्‍या,,,, तभी दिखाना था,,,, अब तो आप भी सबके साथ देखना,,,, काश्‍वी ने थोडा गुस्‍सा दिखाते हुए कहा
अरे बाबा, सॉरी फोन का पता ही नहीं चला,,,,चलो माफ कर दो दिखाओ न,, निष्‍कर्ष ने कहा
पर काश्‍वी कहां मानने वाली थी उसने भी जिद पकड ली कि अब निष्‍कर्ष भी सबके साथ ही उसकी प्रेजेंटेशन देखेगा,,,,,इस बार निष्‍कर्ष को ही हार माननी पडी और वो वहां से चला गया
शाम होने तक दोनों साथ रहे पर काश्‍वी ने निष्‍कर्ष को कुछ नहीं बताया बस इतना कहा कि इंजतार करो,,,, इंतजार का फल मीठा होगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 36

वर्कशॉप का आखिरी दिन,,, सुबह से ही सब हॉल को सजाने में लगे थे,,, एक जबरदस्त माहौल तैयार था इस इवेंट को यादगार बनाने के लिये,,,, दस यंग डायनमिक फोटोग्राफर्स का आखिरी असाइनमेंट,,,, सब कुछ तैयार था,,,, स्टेज पर प्रोजेक्टर लगाया गया था ताकि हर कोई अच्छी तरह अपनी कहानी समझा सके,,,,, एक दूसरे से सीखने का ये अच्छा मौका था,,,,,

निष्कर्ष पूरे इंतजाम को मोनिटर कर रहा था और काश्वी एक कोने पर अपने लैपटॉप में अपनी प्रेजंटेशन चेक कर रही थी,,,निष्कर्ष ने आकर काश्वी से पूछा,,, ऑल सेट,,,तुम तैयार हो,,,,

काश्वी ने मुस्कुराकर कहा,,, हां पर आपको अब भी नहीं दिखाउंगी,,, जब चलेगा तभी देखना,,,,

प्रोग्राम शुरू हुआ,,, एक के बाद एक सबका नंबर आया,,, उत्कर्ष ने सबके काम पर बपने कमेंट भी दिए,,,कुछ देर बाद काश्वी का नंबर आया,,,, निष्कर्ष भी एक्साइटेड था और उत्कर्ष भी बेताब थे क्योंकि काश्वी उनकी फेवरिट स्टूडेंट तो थी,,,,

काश्वी स्टेज पर चढ़ी और प्रोजेक्टर से अपना लैपटॉप अटैच किया,,,,काश्वी ने सबको एडरेस किया और फिर कहा कि जो मैंने बनाया है उसे देखने से पहले कुछ लाइन्स आपसे शेयर करना चाहती हूं,,,,,

जिदंगी में कुछ रिश्ते हमेशा के लिये होते है शायद इसलिये हम सोचते हैं कि वो तो हमारे साथ ही रहेंगे वो कहां जाने वाले हैं,,,, पर उन रिश्तों की असली अहमियत तब समझ जाती है जब वो दूर हो जाते हैं,,,,,दूरियां हमेशा शहरों और देशों की नहीं होती,,, साथ रहते हुए भी दिलों में दूरियां आ जाये तो ये मीलों से भी ज्यादा हो जाती है और फिर अगर दोनों तरफ से पहल का इंतजार हो तो दूरी गहरी खाई में बदलती जाती है जो वक्त के साथ गहरी और गहरी होती है ऐसे ही जिंदगी के सबसे प्यारे रिश्ते में आई दरार की कहानी है ये,,,,,,,,

स्टेज की लाइट्स ऑफ हो गई,,,,,,और प्रोजेक्टर पर कुछ तस्वीरें चमकने लगी,,,,,, उन तस्वीरों के साथ साथ काश्वी उसकी कहानी कहने लगी,,,,,पहली तस्वीर पहाड़ों की ठंड में ठिठुरते एक शख्स ने अपने कुछ महीने के छोटे से बच्चे को सीने से लगा रखा है ताकि वो ठंड से ठिठुरे नहीं,,, खुद चाहे ठंड में रहे पर अपने बच्चे को थोड़ी सी हवा भी नहीं लगने देना चाहता ये पिता,,,,,,

दूसरी तस्वीर,,,,एक ऐसे पिता कि जो एक छोटी सी दुकान पर बैठा है और उसका बेटा उसे दुकान पर सामान बेचते हुए देख रहा है,,, पिता सूरत से मायुस है शायद आज बिक्री अच्छी नहीं हुई,,,, पर उसका बेटा फिर भी हसरत भरी निगाहों से उसे देख रहा है शायद जानता है कि कुछ भी हो उसकी पंसद का खिलौना शाम होते होते उसे मिल ही जाएगा,,,,,,,

तीसरी तस्वीर,, एक पांच साल के बच्चे की जो पिता के कंधे पर चढ़कर आधी नींद में कोहरे के बीच स्कूल जाने को निकला है,,,रास्ता लंबा पर पिता के चेहरे पर कोई शिकन नहीं,,, हां आखों में चमक है उम्मीद की,, कि एक दिन उनका बेटा वो बनेगा कि उसे इस तरह पैदल रास्ता पार नहीं करना पड़ेगा,,,,,,,

चौथी तस्वीर,,,,साइकिल चलाना सीखते एक 12 साल के बच्चे की जिसकी साइकिल को उसके पापा ने कस कर पकड़ा है ताकि वो गिरे नहीं,,, बच्चा के चेहरे पर डर है लेकिन पापा खुश है क्योंकि जानते हैं कि आज नहीं तो कल वो खुद साइकिल चलाना सीख ही लेगा,,,,,

पांचवी तस्वीर,,,,एक शादी की जहां बेटे को दुल्हा बना देख,,, पिता की आंखों से खुशी झलक रही थी और हाथ बेटे और बहु के सर पर थे ताकि आर्शीवाद का साया उन्हें हर मुसीबत से बचा सके,,,,,,,

छठी तस्वीर में अपने पिता को अपनी नई गाड़ी में बिठाता बेटा गर्व करता हुआ कि वो भी अपने पिता के लिये कुछ कर पाया है,,,

इसी तरह कई तस्वीरों की पूरी बानगी है जो इस रिश्ते के कई आयामों को दिखाती हैं,,,,

तस्वीरें अब भी चल रही थी एक के बाद एक कई तस्वीरें जिसमें बाप और बेटे के रिश्ते की गहराई को दिखाया गया,,,, और काश्वी उन तस्वीरों के साथ अपनी आवाज को ऐसे घोल रही थी कि सब बस उसकी आवाज के नशे में चूर थे,,,,

'जब गिरा तो थामने पहुंचे
जब थका तो पकड़ कर संभाला
एक उंगली के सहारे से चलना सीखा
एक आवाज को सुनकर बोलना जाना
हर कदम पर पीछे खड़े थे
हर मंजिल पर साथ
क्यों राहें हुई अलग फिर
क्यों आई दूरी इस बार
न डांटा, न मारा
बस ओढ़ ली खामोशी
कह दो एक बार
चल दो फिर साथ
गिरना है फिर मुझे
अगर संभालने तुम आओ,,,,,,

उन तस्वीरों में आखिरी तस्वीर निष्कर्ष और उत्कर्ष की थी,,,, छोटा सा निष्कर्ष अपने पापा की गोद में था और खुशी उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी,,,,,

अपना प्रजेंटेशन खत्म करते करते काश्वी ने कहा कि ये तस्वीर बहुत खास है ये मैंने नहीं ली पर सोचा इससे अच्छा उदाहरण इस रिश्ते को समझने का आज और क्या होगा जब एक फादर और सन यहां हमारे बीच है जिनकी वजह से आज हम सब यहां हैं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 37

कुछ देर तक सब शांत था,,,काश्वी की नजर पहले उत्कर्ष पर गई जो चुप थे शायद किसी सोच में पड़े थे,,,,, फिर उसने निष्कर्ष को देखा जो उसे ही देख रहा था,,,निष्कर्ष भी चुप था,,,, तभी चुप्पी तोड़ती हुई तालियां गूंजने लगी जिसकी शुरूआत उत्कर्ष ने की,,, उत्कर्ष के साथ साथ सब काश्वी के लिये तालियां बजाने लगे और फिर सब उसके पास जाकर उसे बधाई देने लगे,,,, काश्वी के आस पास भीड़ लग गई,,, उत्कर्ष ने भी आकर काश्वी की तारीफ की और ये भी कहा कि सुबह जाने से पहले वो उनसे आ कर मिले,,,,,,

सबकी बात सुनने के बाद काश्वी की नजर निष्कर्ष को ढूंढ रही थी जो उस भीड़ का हिस्सा नहीं था,,,, निष्कर्ष उस हाल में नहीं था,,, काश्वी ने सब जगह उसे ढू़ंढा पर वो वहां से निकल गया था,,,निष्कर्ष को ये कैसा लगा ये जानना काश्वी के लिये बेहद जरूरी था और वो ही वहां से गायब था,,, काश्वी ने उसे फोन भी ट्राई किया लेकिन बात नहीं हो पाई,,,,, काश्वी हॉल के बाहर निष्कर्ष को ढ़ंढ रही तभी पीछे से उसकी आवाज आई,,,,, यहां क्या कर रही हूं,,, तुम्हें तो अंदर होना चाहिए,,,,

आप कहां थे,,,, अचानक गायब हो गये,,,काश्वी ने पूछा

एक फोन आ गया था अंदर शोर था तो बाहर गया था,,,, तुम्हारा प्रजेंशटेशन कमाल था,, काश्वी बहुत अच्छा था,,, निष्कर्ष ने कहा

आपको पंसद आया,,,,काश्वी ने पूछा

हां वो तो सबको बहुत पंसद आया,,, चलो अंदर चले इसके बारे में और बात पार्टी के बाद करेंगे,,,,,निष्कर्ष ने मुस्कुराते हुए कहा

काश्वी ने राहत की सांस ली,,,,कि निष्कर्ष नॉर्मल था,,,, दोनों अंदर पहुंचे और सबके साथ जमकर मस्ती की,,,,
कई घंटे तक सब साथ रहे,,, एक महीने की वर्कशॉप का ये आखिरी दिन था फिर सब अपने अपने रास्ते पर निकलने वाले थे,,,

पार्टी खत्म होने के बाद निष्कर्ष पूरा इंतजाम देख रहा था,,,, धीरे धीरे सब चले गये पर काश्वी रुकी थी,,,, निष्कर्ष अपना काम खत्म कर काश्वी के पास आया,,,, चलो तुम्हें भी छोड़ दूं,,,, दोनों हॉल से निकले और बाहर जाने लगे,,,,,

चलते चलते काश्वी ने पूछा,,,, आपने झूठ बोला था ना,,,उस वक्त कोई फोन नहीं आया था ना,,,,,

निष्कर्ष ने मुस्कुराकर काश्वी को देखा,,,,,पर कुछ कहा नहीं

काश्वी ने फिर कहा,,, अभी बताओ कैसा लगा आपको?

तुम जानती हो काश्वी और मैं भी,,,,, ये रिश्ता बहुत कॉम्पलीकेटिड हो गया है,,,, न वो मुझसे बात करना चाहते है और न मैं,,,, सच कहूं इतने सालों हो गये इसी तरह पापा और मेरे बीच अब कहने को कुछ रहा नहीं,,,,साल में एक बार अगर ये वर्कशॉप न हो तो शायद मैं यहां आउ भी न,,,और ये वर्कशॉप भी मां की वजह से है,,, वो चाहती थी कि अगर किसी में टेलेंट है तो उसे वैसा संघर्ष न करना पड़े जैसा पापा ने किया,,,बस उन्हीं की वजह से हर साल हम दोनों इसे पूरी मेहनत से करते हैं,,,,, निष्कर्ष ने कहा,,,,

शायद आपकी मॉम को इसका अंदेशा था इसलिये उन्होंने एक कड़ी छोड़ी जिससे आप दोनों साथ रहो,,,, पर एक बात बताओ,,, डिफरेंसिस हो जाते हैं,,,,,आपके साथ वो ज्यादा समय नहीं रह पाये,,, ये भी समझ आता है पर इतनी दूरी क्यों हो गई,,,कि आप बात ही नहीं करना चाहते,,,, ऐसा क्या हुआ?

काश्वी कुछ बातें दिल पर लग जाती है और जख्म की तरह दर्द देती है उस पर कोई मरहम काम नहीं करता,,,, तुम मानोगी नहीं,,, इसलिये बता रहा हूं,,,, इससे पहले किसी को नहीं बताया,,,,,एक बार मॉम का एक्सीडेंट हुआ था पापा तब इंडिया से बाहर थे,,,,15 दिन वो आईसीयू में थी और मैं पापा को फोन करता रहा,,,, उनका कुछ पता नहीं था,,,,जो नंबर उन्होंने दिया था वो बंद था और हमारे पास इसके अलावा कोई कॉटेक्ट डिटेल नहीं था,,,,हर मिनट,, हर घंटे,,, पता नहीं कितने फोन,,, कितने मैसेज और ईमेल तक किए पर उनका कोई जवाब नहीं आया,,, मैं 18 साल का था तब,,,,कुछ समझ नहीं आ रहा था बिलकुल अकेला हो गया था,,, कुछ दोस्त थे साथ पर जिनको होना चाहिए था वो नहीं थे,,,, वो सात दिन मेरी जिंदगी के सबसे मुश्किल दिन थे,,,, मां की हालत खराब हो रही थी,,, डॉक्टर्स लगातार उन्हें मॉनीटर कर रहे थे तीन ऑपरेशन किए,,,, पर वो पता नहीं कहां अपना पैशन जी रहे थे उन्हें तो पता भी नहीं था कि किसी को उनकी जरूरत है,,,,, उनका एक परिवार भी है जिसका ख्याल भी उन्हें रखना है,,,,,,काश्वी उन सात दिनों में समझ आया कि उनके लिये उनका काम ही सबसे पहले है,,,, हम कुछ नहीं,,,कुछ दिन बाद उनका फोन आया तो उन्होंने कहा वो आ रहे हैं लेकिन उसके भी दो दिन बाद वो पहुंचे,,,,अब बताओ क्या सोचू,,, क्या समझू इसे,,,,

क्या आपने पूछा उनसे वो कहां थे,,, काश्वी ने पूछा

नहीं मुझे उसकी जरूरत नहीं थी,,,, वो आये न आये मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा,,, मेरे लिये मां ज्यादा इम्पोरटेंट थी और मैं उनकी देखभाल करता रहा,,,,,बस उस वक्त के बाद कभी ज्यादा बात नहीं की,,,, तभी से हमारे बीच एक दीवार है जिसे तोड़ने की न तो उन्होंने कोशिश की और न मैंने,,,,,,,,,

और मां,, उन्होंने क्या कहा,,,, काश्वी ने पूछा
जब हॉस्पिटल से वो डिस्चार्ज हुई तो डॅा ने कहा कि उन्हें ऐसी जगह ले जायें जहां ताजी हवा हो और उन्हें अच्छा लगे,,,मैं नहीं चाहता था कि वो दिल्ली से बाहर जाये पर वो भी यही चाहती थी तो वो यहां आ गई,,,उन्होंने पापा को माफ कर दिया था पर मैं इसे कैसे भूल जाता,,, काश्वी उन्होंने भी बहुत कोशिश की सब ठीक करने की पर कुछ नहीं हो पाया,,,, जब मुझसे रहा नहीं गया तो मैं इंजीनियरिंग के बहाने दिल्ली आ गया और तभी से दिल्ली में ही रहा,,,, पहले पढ़ाई और फिर नौकरी सब दिल्ली में है,,,,निष्कर्ष ने बताया पर ये सब बताते हुए वो बहुत भावुक हो रहा था,,, उनकी आंख में आंसू भी आ रहे थे पर वो उन्हें रोकने की कोशिश कर रहा था,,,

अब तो तुम्हें सब पता है प्लीज अब हम इस पर दोबारा बात नहीं करेंगे,,,,,वो और मैं दोनों अलग है और कभी एक नहीं हो सकते,,,, मुझे पता है तुम मुझे खुश देखना चाहती हो एक अच्छे दोस्त की तरह पर मैं ऐसे ही खुश हूं उन्हें देखकर मुझे वो सब याद आता है इसलिये उनसे दूर रहना चाहता हूं,,,,निष्कर्ष ने कहा,,,

ठीक है हम इस पर कभी फिर बात नहीं करेंगे पर एक शर्त पर आप हमेशा खुश रहोगे,,,, काश्वी ने मुस्कुराते हुए कहा,,,,

मैं खुश हूं काश्वी,,, इस जगह तुमसे ये जो दोस्ती मिली है उसे पाकर खुश हूं,,,, चलो अब बहुत देर हो रही है सुबह तुम्हें दिल्ली वापस जाना हैं,,, निष्कर्ष ने कहा

और आप क्या करोगे,,,, आप कब आओगे वापस दिल्ली? काश्वी ने पूछा
चलो अभी सो जाओ,,,निष्कर्ष ने काश्वी को उसके रूम के बाहर छोड़ते हुए कहा,,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 38

एक और पड़ाव पार कर लिया था निष्कर्ष और काश्वी ने अपनी दोस्ती का,,, एक महीने के अंदर ही दोनों इतने गहरे दोस्त बन गये कि अब एक दूसरे की जिंदगी से अच्छी तरह वाकिफ थे,,,,

रात तो गहरी हो रही थी लेकिन काश्वी को नींद नहीं आ रही थी,,, उसे वो हर पल याद आ रहा था जो उसने यहां निष्कर्ष के साथ गुजारा,,,,अजनबी से दोस्त और अब अच्छे दोस्त बनने का सफर तय किया,,,,
सब काम पूरा करने के बाद अब सुकून के पल बिताते हुए काश्वी अपने ख्यालों से हकीकत में आई तो उसे याद आया कि कल सुबह उसे जाना है और निष्कर्ष उसके साथ नहीं लौट रहा,,,अब काश्वी सोचने लगी कि पता नहीं कब फिर निष्कर्ष से मुलाकात होगी,,, तो उसने निष्कर्ष को एक एक एसएमएस किया जिसमें थैंक्स था,,,,

अगले ही पल जवाब भी आ गया,,, थैंक्स क्यूं,,, निष्कर्ष ने लिखा

काश्वी हैरान थी कि उसकी तरह निष्कर्ष भी जाग रहा है तो उसने पूछा,,, आप सोए नहीं?

नहीं, अभी नहीं,,, पर थैंक्स क्यूं? निष्कर्ष ने जवाब दिया,,,,,,

एक महीने मेरे साथ रहने के लिये,,,मुझसे बात करने के लिये और मुझे इतना कुछ सिखाने के लिये,,,,काश्वी ने जवाब दिया,,,,

कितनी बार थैंक्स कहोगी,,, ये तो हमेशा के लिये है,,, निष्कर्ष ने लिखा

हां, ये तो है,,, वैसे आप कब आओगे दिल्ली? काश्वी ने पूछा

तुम सो जाओ सुबह 11 बजे निकलना है,,,इतना लिख कर निष्कर्ष ने काश्वी को गुड नाइट कह दिया,,,,

नींद तो काश्वी को अब भी नहीं आ रही थी पर वो कोशिश कर रही थी सोने की,,,, जैसे तैसे रात गुजरी और एक नई सुबह हुई,,,, सुबह तैयार होते होते काश्वी को याद आया कि उसे जाने से पहले उत्कर्ष से भी मिलना है,,, अपना सामान पैक करने के बाद काश्वी उत्कर्ष से मिलने उनके ऑफिस पहुंची,,, दरवाजे पर नॉक किया तो अंदर से उत्कर्ष की आवाज आई,,,,

अंदर जाते ही उत्कर्ष काश्वी को देखकर बेहद खुश हो गये,,,, उन्होंने काश्वी को बैठने के लिये कहा और पूछा,, कैसा लगा यहां काश्वी यहां,,,
मुस्कुराते हुए काश्वी ने कहा,,, बहुत अच्छा काफी कुछ सीखा यहां आपसे,,,, काश एक महीने से ज्यादा होती ये वर्कशॉप तो और सीख पाती आपसे,,,,

अच्छा ऐसा है तो तुम्हारे लिये एक अच्छी खबर है,,, इसी के लिये बुलाया था मैंने तुम्हें,,,, उत्कर्ष ने कहा

हां,,, बताइये,,, काश्वी ने कहा

दरअसल एक यूनिवर्सिटी है कैलीफोर्निया में जहां मैं पढ़ाता हूं,,, वहां मैंने तुम्हारा नाम रिक्मेंड किया था तो वहां से कंफरमेशन कॉल आई है वो लोग तुम्हें स्कॉलरशिप देना चाहते है एक साल का एडवांस कोर्स है अगर तुम चाहो तो,,,, तुम्हारे करियर के लिये अच्छा होगा और कोई खर्चा भी नहीं वहां हॉस्टल वगैरह सब यूनिवसिर्टी में ही है,,,,ये उसके पेपर्स है तुम घर पर बात करके डिसाइड कर लो और मुझे बता देना मैं बता दूंगा क्या करना है ,,,,

काश्वी हैरान थी,,, इतना सब उत्कर्ष ने उसके लिये सोचा,,,

काश्वी ने उत्कर्ष से कहा,,, मुझे सच में विश्वास नहीं हो रहा कि ये सब आप मेरे लिये कर रहे हैं ये बहुत बड़ी बात है मेरे लिये,,, मैं जरूर बताउंगी आपको एक बार घर पर बात करनी पड़ेगी,,, पर कैसे बताउं ये सच में बहुत बड़ा फेवर किया है आपने,,,,

अरे फेवर कैसा तुम जैसे ही स्टूडेंटस की तलाश में रहते हैं हम,,, टेलेंट को हमेशा मौका मिलना चाहिए और ये एक छोटी सी कोशिश है मेरी तरफ से अगर तुम्हें ठीक लगे तो,, ये मेरा कार्ड भी रखो,,, डिसाइड कर लो तो फोन करना,,,,,ऑल द बेस्ट,,,,, उत्कर्ष ने कहा

काश्वी उत्कर्ष को थैंक्स और बाय बोलकर जाने लगी तो उत्कर्ष ने उसे रोका,,, फिर अपने कुर्सी से उठकर उसके पास आ गये,,, उनके हाथ में एक और लिफाफा था,,,, जो उन्होंने काश्वी की तरफ बढ़ा दिया,,,,

काश्वी ने उस लिफाफे को देखकर पूछा ये क्या हैं? सर,,,,

खोलकर देखो,,, उत्कर्ष ने कहा

उस लिफाफे में कुछ तस्वीरें थी,,, उनके पूरे ग्रुप की,,, काश्वी बहुत खुश थी उन्हें देखकर,,,अरे वाह ये तो बहुत अच्छी है आपने ली? काश्वी ने पूछा

हां मैंने ली,,, उत्कर्ष ने जवाब दिया

पर कब हमें तो पता ही नहीं चला,,, काश्वी ने पूछा
असली इमोशन कैप्चर करने हो तो ऐसे समय फोटो खींचो जब सामने वाले को पता न हो,,, कैमरे के आगे लोग अलर्ट मोड में आ जाते हैं और बनावटी हंसी हंसते हैं असली हंसी वो होती है जो बिंदास होती है,,, बस यूं ही,,,,, मैंने भी अपने कैमरे को इस्तेमाल ऐसे वक्त ही किया,,,,, उत्कर्ष ने कहा

उन तस्वीरों में कुछ तस्वीरें निष्कर्ष के साथ काश्वी की थी,,,, जिन्हें देखकर काश्वी थोड़ी हिचक रही थी,,,, उत्कर्ष काश्वी के चेहरे के बदलते रंग को पढ़ रहे थे और तभी कहा,,,, मैं जानता हूं निष्कर्ष और तुम अच्छे दोस्त बन गये हो,,,, बहुत अच्छा लगा उसे हंसते हुए देखकर इसलिये खुद को रोक नहीं पाया,,,,,,तुमसे बात करता है न वो?

ये तस्वीरें बहुत अच्छी है और निष्कर्ष को भी पंसद आएंगी,,,, हम अच्छे दोस्त है और मुझे अच्छा लगा आपने ये तस्वीरें ली,,,,ये बहुत सुंदर है,,,,सच में आपने सही वक्त पर सही इमोशन कैप्चर किए,,,, काश्वी ने कहा,,,,

सही वक्त क्या होता है काश्वी मुझे नहीं पता बस ये पता है कि हमेशा दिल की सुननी चाहिए वो कभी गलत इशारा नहीं देता,,,,उत्कर्ष ने कहा

हां आपने सही कहा,,, और मुझे भी लगता है कि वक्त के साथ हम दिल के इशारों को समझने लगते है,,,, और जितनी जल्दी उसके मुताबिक चलना शुरू कर दें उतना अच्छा होता है,,, थैंक्स इन सबके लिये,,, मैं चलती हूं आपको फोन जरूर करूंगी,,, दिल्ली पहुंचकर ये कहकर काश्वी जाने लगी,,,

उत्कर्ष ने भी मुस्कुराकर,,,,,सर हिलाकर उसे अलविदा कह दिया,,,,,

रिश्तों को तोड़ने में वक्त नहीं लगता,,,,टूटे रिश्तों पर वक्त की धूल भी आसानी से आ जाती है लेकिन इस धूल पर जब प्यार की ठंडी हवाएं पड़ती है तो धीरे धीरे तस्वीर साफ होने लगती है,,,, कभी कभी जो दूरी सदियों की लगती है वो एक हाथ बढ़ाने से पार हो जाती है,,,, उत्कर्ष और निष्कर्ष के बीच की खाई भले ही गहरी हो लेकिन इसे भरने में ज्यादा समय नहीं लगेगा ये अब काश्वी को पता चल गया था,,, निष्कर्ष जो उत्कर्ष के बारे में सोच रहा था उससे फिर अलग नजर आये उत्कर्ष काश्वी को,,, काश्वी को पता चला कि अब भी निष्कर्ष उत्कर्ष के लिये वही अहमियत रखता है जो एक बेटा बाप के लिये रखता है निष्कर्ष को खुश देखना चाहते हैं उससे पापा और इससे बड़ा सबूत और क्या होगा कि वो अब भी अपने बेटे से प्यार करते हैं,,,,,,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 39

काश्वी मुस्कुराते हुए उत्कर्ष के ऑफिस से बाहर निकली,,,, उसे खुशी थी कि जो निष्कर्ष अपने पापा के बारे में सोच रहा है वो गलत है और एक न एक दिन दोनों फिर साथ होंगे,,,, ये कैसे होगा ये काश्वी को नहीं पता था पर एक उम्मीद फिर जगी,,,,,,

काश्वी के जाने का टाइम हो रहा था,,,वो फटाफट अपने रूम से सामान लेकर नीचे गैलरी में आ गई जहां सब अपने अपने सामान को लेकर पहले से मौजूद थे,,, बाहर बस तैयार थी और सब जाने के लिये तैयार थे,,,,काश्वी को देखकर निष्कर्ष उसके पास आ गया और पूछा,,, कहां थी इतनी देर से सब ढूंढ रहे हैं,,,

मैं सर से मिलने गई थी उन्होंने बुलाया था,,, काश्वी ने कहा

निष्कर्ष चुप हो गया बस इतना कहा, ,,, ओह,,,,, ठीक है,,, चलो सब तैयार है,,,

निष्कर्ष सबका सामान बस में रखवा रहा था एक एक कर सब बस में सवार हो रहे थे इतने में उसके एक असिसटेंट ने आकर कहा,,, सर आपका सामान बस में ही रखना है ना,,,,,

काश्वी ने ये सुना तो वो निष्कर्ष के पीछे आकर खड़ी हो गई,,,, निष्कर्ष ने अपने असिसटेंट को बस में ही सामान रखने को कहा और जैसे ही पीछे मुड़ा वहां काश्वी खड़ी उसे देखकर मुस्कुरा रही थी,,

काश्वी को देखकर निष्कर्ष भी मुस्कुराने लगा और कहा,,, हां मैं भी वापस चल रहा हूं,,,,,

ये सुनकर काश्वी खुश हो गई और जोर से बोलने लगी,,, आप भी चल रहे हो,,, पहले क्यों नहीं बताया,,,,,,

मुंह पर उंगली रखकर निष्कर्ष ने उसे धीरे बोलने का इशारा किया,,, और कहां,,, चलो बस में बैठो मैं अभी आता हूं,,,,

काश्वी की सारी टेंशन अब जैसे खत्म हो गई थी निष्कर्ष को और उस जगह को छोड़ कर जाने की जो तकलीफ उसे हो रही थी वो एक पल में छू हो गई थी,,,अब वो आंख में नमी के साथ नहीं एक और नये सफर पर निकलने को बेताब थी,,,,,

सारे इंतजाम करके निष्कर्ष बस के अंदर आ गया और सबसे आगे बैठी काश्वी के साथ आकर बैठ गया,,,,

काश्वी की हंसी रुकने का नाम नहीं ले रही थी हालांकि उसकी आंखे ये सवाल कर रही थी कि आखिर ये हुआ कैसे,,,, बस चल पड़ी थी निष्कर्ष अब भी कुछ नहीं बोल रहा था तो काश्वी ने उससे पूछा,,,, मुझे क्यों नहीं बताया आप भी चल रहे हो,,,,,

निष्कर्ष ने काश्वी को देखा और कहा कल तक कोई प्लान नहीं था पर आज सुबह एक फोन आया तो वापस जा रहा हूं,,,,
ओह,,, फोन,,, हां ये फोन हमेशा राइट टाइम पर ही आता है,,, है ना? काश्वी ने शरारत के साथ कहा

अरे तुम्हें पता नहीं बहुत इंपोर्टेंट है ये कॉल,,,,,निष्कर्ष ने भी हंसते हुए जवाब दिया

कोई बात नहीं,,, मुझे अच्छा लगा,,, अब थोड़े घंटे और आपके साथ रहने का मौका मिला है,,,,और एक लंबी सांस लेते हुए काश्वी ने ये भी कहा कि ,, मुझे अब तकलीफ नहीं हो रही यहां से जाने में,,,,

निष्कर्ष काश्वी को देखता रहा,,,कुछ नहीं कहा,,,,,

दोनों की बातों का सिलसिला फिर शुरू हुआ,,, एक से दूसरी बात निकल रही थी रास्ते से लेकर पूरी वर्कशॉप के एक्सपीरींयस को दोनों शेयर कर रहे थे,,,

काश्वी ने कई बार सोचा कि वो उत्कर्ष से हुई बात निष्कर्ष को बता दें पर ये सोचकर चुप रही कि निष्कर्ष इस वक्त शायद ये सब सुनना न चाहें,,,,,

काश्वी ने ये सोचकर कुछ नहीं कहा कि इस वक्त निष्कर्ष शायद उत्कर्ष के इमोशन न समझ पाये और ये बात पता नहीं उसे अच्छी लगे या न लगे,,,, काश्वी निष्कर्ष के साथ खुश थी और उसे उत्कर्ष की बात भी याद आई कि निष्कर्ष बहुत दिन बाद इतना खुश लग रहा है तो वो उसकी खुशी को कम नहीं करना चाहती थी,,,,

काश्वी जानती थी कि पापा नहीं पर मम्मी के बारे में बात करना निष्कर्ष को सबसे ज्यादा पंसद है तो उसने बातों बातों में उसकी मां के बारे में बात की,,,,

निष्कर्ष ने भी काश्वी को उसकी मां के बारे में बहुत कुछ बताया,,,,

काश्वी ने पूछा,,, आपकी मॉम उदयपुर से थी न,,,,, वहां भी तो कितने पहाड़ है झील है,,,, उसे तो राजस्थान का हिल स्टेशन कहते हैं न,, मैंने बहुत सुना है वहां के बारे में

हां,,, काश्वी उदयपुर बहुत सुंदर है मॉम बताती थी वहां के महाराणा प्रताप की कहानी बचपन से यही सब सुनकर बड़ा हुआ,,,, पता है नानाजी अब भी उसी घर में रहते हैं,,जहां मॉम पैदा हुई,,,उनका पुश्तैनी घर भी किसी महल से कम नहीं था,,ज्यादा जाना तो नहीं हुआ वहां,,, पर जब भी गया एक नई याद लेकर लौटा,,,, पता है पूरे उदयपुर में हर जगह महाराणा प्रताप की छाप है और कई दिलच्स्प कहांनियां जुड़ी है उनसे,,, सबसे हैरान करने वाली उनकी चीजें है जनका वेट कई सौ किलो होता था महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो का था और उनके छाती का कवच 72 किलो का था। उनके भाला, कवच, ढाल और साथ में दो तलवारों का वजन मिलाकर 208 किलो था,,,

वाह बहुत बढ़ियां,,,, लगता है मुझे भी जाना पड़ेगा वहां,,,, काश्वी ने कहा

हां चलो न,,, मैं जल्दी ही जाउंगा,,,, कुछ दिन पहले नानाजी का फोन भी आया था मां की कुछ चीजें हैं वहां वो लेकर आनी है उनके कमरे का सामान खाली किया तो बहुत कुछ मिला था,,, तुम भी चलना मेरे साथ वहां तुम्हारी फोटोग्राफी की अच्छी प्रैक्टिस हो जाएगी,,,,

हां जरूर,,, पर देखो मैंने कहा था ना ये आपका फोन सही समय पर आता है,,,,, काश्वी फिर जोर से हंसने लगी
तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 40

सफर लंबा था और रास्ते भर काश्वी और निष्कर्ष की बातों का सिलसिला चलता रहा,,,, रात के 11 बजे उनकी बस दिल्ली पहुंची,, बस निष्कर्ष के ऑफिस पहुंची, जहां से निष्कर्ष ने काश्वी को अपनी कार से घर छोड़ा,,, घर पहुंचने पर काश्वी ने निष्कर्ष से कहा,, चलो अंदर पापा से मिलवाती हूं,,,,,

निष्कर्ष मुस्कुराकर बोला,, आज नहीं बहुत लेट हो गया है मैं आउंगा फिर,,,

पक्का,,, काश्वी ने पूछा

हां पक्का,, जाओ अभी बहुत लेट हो गया है तुम थक गई होगी इतना लंबा सफर था,,,, निष्कर्ष ने कहा

काश्वी अपने घर के अंदर चली गई और निष्कर्ष अपने घर के लिये निकल गया,,,,एक महीने साथ रहने के बाद अब दोनों अलग हो रहे थे पता नहीं था फिर कब मिलेंगे लेकिन उम्मीद थी कि जरूर मिलेंगे,,,,

काश्वी को देखकर घर में सब बहुत खुश हुए,,,,पूरी वर्कशॉप के बारे में एक एक डिटेल पूछते रहे,,,, जब सबकी बातें खत्म हुई तो काश्वी अपने कमरे में चली गई,,,पर उसे आज भी नींद नहीं आ रही थी,,,, कुछ देर बाद वो बाहर बालकनी में आकर बैठ गई,,,, काश्वी के पापा भी सोए नहीं थे,, उन्होंने काश्वी को देखा तो उसके पास आकर बैठ गये,,,

क्या हुआ इतने लंबे सफर के बाद भी नींद नहीं आ रही? पापा ने पूछा

हां बस ऐसे ही,,, काश्वी ने जवाब दिया

जगह बहुत अच्छी थी क्या वापस आने का मन नहीं था,,,पापा ने हंसकर पूछा

काश्वी मुस्कुराई और तभी उसके फोन पर एक एसएमएस आया,,, काश्वी और पापा दोनों हैरान थे इतनी रात को किसका मैसेज,,, काश्वी ने झट से फोन उठाया तो उसमें निष्कर्ष का नाम फ्लैश हो रहा था,,, काश्वी ने बिना मैसेज पढ़े फोन एक किनारे पर रख दिया और पापा से बात करने लगी,,,,

पर पापा समझ गये थे कुछ तो गड़बड़ है पापा ने काश्वी से कहा,,, लगता है इस बार सिर्फ जगह नहीं कोई और भी पंसद आ गया है,,,,

काश्वी शर्मा गई और हंसने लगी,,, नहीं ऐसा कुछ नहीं,,,,काश्वी ने कहा
काश्वी मैंने तुम्हें झूठ बोलना तो कभी नहीं सिखाया,,,, ठीक है तुम नहीं बताना चाहती तो मैं जाता हूं,, तुम आराम से अपना मैसेज पढ़ो,,, पापा ने कहा और उठ कर जाने लगे

काश्वी ने पापा का हाथ पकड़कर रोक लिया और कहा,,, बैठो ना बहुत दिन से आपसे बात नहीं की,,,

पापा वहीं काश्वी के पास बैठ गये,,, काश्वी ने पास पड़े उस एनवलप को खोला जो उत्कर्ष ने उसे दिया था जिसमें उसके पूरे ग्रुप और निष्कर्ष की फोटो थी,,,उन फोटोग्राफ को दिखाते दिखाते काश्वी ने निष्कर्ष और उत्कर्ष दोनों के बारे में पापा को सब बताया,,,,

पापा ने काश्वी की पूरी बात सुनी और थोड़ा टेंशन में भी आ गये उन्हें भी अजीब लगा कि कैसे एक दूसरे की इतनी परवाह करने वाले दो लोगों के बीच इतनी दूरी आ गई,,,,

काश्वी ने पापा को ये भी बताया कि उत्कर्ष ने उसे एक यूनिवसिर्टी में एडमिशन दिलाने का ऑफर दिया पर ये बात वो निष्कर्ष को नहीं बता पा रही और बिना उसे बताए जा भी नहीं सकती,,,,

इस पर पापा ने कहा कि अभी थोड़ा टाइम लो अच्छे से सोचो और उसके बाद फैसला करेंगे,,,, दो घंटे तक देानों की बातें चलती रही,,,पापा ने जाते जाते काश्वी को कहा,,, अब मैसेज पढ़ लेना वो इंतजार कर रहा होगा तुम्हारे जवाब का,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 41

पापा के जाने के बाद काश्वी ने अपना फोन चेक किया,,,, निष्कर्ष का मैसेज था,,उसे भी नींद नहीं आ रही थी इसलिये काश्वी को मैसेज किया,,, काश्वी ने टाइम देखा तो दो घंटे हो चुके थे उसने सोचा अब सुबह ही बात करेगी निष्कर्ष से,,,,मैसेज पढ़ते पढ़ते काश्वी पापा की बात सोचकर मुस्कुरा रही थी,,,, वो जानती थी और कोई महसूस करें या करें पर उसके पापा को जरूर पता चल जाता है कि काश्वी में कुछ बदलाव आ रहा है,,,,इसे खुद महसूस कर रही थी काश्वी,,,, इस नए बदलाव ने उसे पहले से ज्यादा बात करना सिखा दिया था, पहले से ज्यादा कान्फीडेंट बना दिया था और हां एक और बदलाव हुआ था उसकी नींद कहीं गायब हो गई थी अब रात को सोने से पहले जब तक वो निष्कर्ष से बात न कर लें उसका दिन खत्म नहीं होता था

रात ढली और सुबह की नई किरण कमरे में दाखिल हुई,,, काश्वी का फोन वाइब्रेशन पर था जो लगातार बज रहा था,,, उसने आधी खुली आंखों से फोन देखा तो फोन निष्कर्ष का था,,, निष्कर्ष का नाम देखकर काश्वी की आंखे खुल गई उसने फटाफट फोन उठाया,,,, सामने से आवाज आई,,,,कितनी सोती हो तुम,,,,,

काश्वी हंसने लगी,,, हां बहुत देर से सोई कल,,, इसलिये आंख नहीं खुली,,,,

देर से,, तो फिर मेरे मैसेज का जवाब क्यों नहीं दिया,, मुझे लगा तुम सो गई,,, निष्कर्ष ने कहा
हां वो कल पापा से बात कर रही थी,,,टाइम का पता नहीं चला,,, काफी देर तक बात करते रहे,,, काश्वी ने बताया

ओह पापा तो खुश होंगे तुम्हें देखकर,,,, निष्कर्ष

बहुत खुश थे,,,आप आओ न घर आपको मिलवाना है पापा से,,, काश्वी ने कहा

हां जरूर आउंगा,,, अच्छा ये बताओ आज क्या कर रही हो,,, निष्कर्ष ने पूछा

कुछ खास नहीं क्यों,,, काश्वी ने जवाब दिया

एक फोटो एग्जिबिशन है अगर तुम्हें देखनी हो तो,,, निष्कर्ष ने कहा

काश्वी समझ गई थी कि निष्कर्ष उससे मिलना चाहता है और एग्जिबिशन सिर्फ एक बहाना है,,, उसने हां कर दिया और दोनों का शाम को मिलने का प्रोग्राम फिक्स हो गया,,,,

फोन काटने के बाद काश्वी काफी देर तक सोचती रही कि उसकी ही तरह बदलाव निष्कर्ष की भी जिदंगी में हुआ है शायद,,,, उसे भी काश्वी का साथ पंसद है तभी तो वो भी उससे मिलने के,,,, साथ रहने के,,,, बहाने ढूंढता है,,, सही भी है दुनिया में हम कितने ही लोगों से मिले,,, चाहे बार बार क्यों न मिले पर फिर भी उनकी छाप हम पर पड़े ये जरूरी नहीं,,,, पर कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनसे बार बार मिलने का दिल करता है,,,, बात करना अच्छा लगता है,,, और जिसके बिना सब अधूरा लगता है,,,, ये दोस्ती का एक और पड़ाव है जिसे बार बार मिलकर,,, एक दूसरे के साथ रहकर पार कर रहे हैं निष्कर्ष और काश्वी,,,,

शाम को जब दोनों मिले तो माहौल अलग था,,, अब शाम वो पहाड़ों वाली ठंड की नहीं थी,,, दिल्ली के रूखे मौसम में भी हालांकि वहीं नरमी महसूस हो रही थी काश्वी और निष्कर्ष को,,,, ये असर शायद दोनों के साथ था जहां आस पास का माहौल कैसा भी हो अंदर से खुशी महसूस हो रही थी,,,, फोटो एग्जिबिशन देखने के बाद दोनों ने डिनर किया और फिर निष्कर्ष काश्वी को छोड़ने उसके घर आ गया,,,

इस बार आप अंदर आ रहे हो,,, चलो पापा से मिलवाती हूं,,, काश्वी ने कहा

निष्कर्ष जैसे ही कुछ कहने लगा,,, काश्वी ने फिर कहा,,, बस अब कुछ नहीं कोई लेट नहीं हो रहा,,, बस चलो,,,

निष्कर्ष ने लंबी सांस ली और कहा ठीक है चलो,,,, आज मिलते हैं तुम्हारे पापा से,,,

घर आने में पांच मिनट थे और निष्कर्ष एकदम चुप था,,,,शायद थोड़ा नर्वस था,,,, काश्वी को निष्कर्ष की हालत देखकर कुछ शरारत सूझी,,, उसने कहा,,, आप इतना नर्वस क्यों हो इससे पहले अपनी किसी गर्लफ्रेंड के पापा से नहीं मिले क्या?

गर्लफ्रेंड,???,,, और उसके पापा,???,,, तुम मुझे इसलिये मिलवाने ले जा रही हो,,,, निष्कर्ष ने भी शरारत भरे अंदाज में जवाब दिया,,,,

अब नर्वस होने की बारी काश्वी की थी वो चुपचाप खिड़की से बाहर देखने लगी जैसे कुछ हुआ ही नहीं,,,, पर निष्कर्ष ने उससे फिर पूछा,,, क्या तुम मेरी गर्लफ्रेंड हो?

बस यही साइड पर लगा दो,, आगे पार्किंग नहीं मिलेगी,,, यहां से पैदल जाना पड़ेगा,,, चलें,, काश्वी ने निष्कर्ष की बात अनसुनी करते हुए कहा,,,,

निष्कर्ष जानता था कि काश्वी अब अपने ही जाल में फंस गई है,,, उससे मजाक कर रही थी पर अब खुद नर्वस हो रही है,,,,

कार से उतरकर दोनों काश्वी के घर के गेट पर पहुंच गये थे अंदर गये तो पापा और सबसे काश्वी ने निष्कर्ष को मिलवाया,,, काश्वी की फैमिली बहुत फ्रेंक थी पापा, मम्मी के साथ उसकी दीदी और भइया सब निष्कर्ष से बात करते रहे,,, ऐसा लग ही नहीं आ रहा था कि वो सब पहली बार मिले हैं,,, कभी वर्कशॉप की बात होती तो कभी काश्वी के सीक्रेट सब निष्कर्ष को बताकर मजाक करते,,,,काश्वी बहुत खुश हो रही थी ये सब देखकर,,, उसके परिवार की ही तरह निष्कर्ष भी अब उसकी जिंदगी का हिस्सा बन गया था ये वो भी समझने लगी थी शायद इसलिये गर्लफ्रेड शब्द मजाक में ही सही उसकी जुबां पर आया,, शायद वो निष्कर्ष को अब दोस्त से ज्यादा कुछ मानने लगी थी,,,,,

तलाश में हूं खुद की,,,,, पार्ट 42

जाते जाते निष्कर्ष काश्वी को फिर गर्लफ्रेंड के नाम से छेड़ कर गया,,, दोनों ने हंसकर एक दूसरे को गुड नाइट कहा,,,,

कुछ दिन इसी तरह बातों और मुलाकातों का सिलसिला चलता रहा,,, काश्वी हर बात निष्कर्ष से शेयर कर रही थी लेकिन अब भी उसे बता नहीं पाई थी कि उत्कर्ष ने उसे यूएस में एडमिशन का ऑफर दिया है,,,,

काश्वी के पापा भी उससे कई बार पूछ चुके थे कि वो क्या करना चाहती है पर काश्वी कोई फैसला नहीं कर पा रही थी,,, एक रात फिर पापा ने काश्वी से इसी बारे में बात की लेकिन काश्वी ने फिर टाल दिया,,,, पापा समझ रहे थे कि काश्वी निष्कर्ष को छोड़ कर इतनी दूर जाना नहीं चाहती पर उन्होंने समझाया कि ऐसा होता है कभी कभी कुछ चीजें जरूरी होती हैं,,, जो करना पड़ती है,,,, काश्वी सब समझ रही थी पर ये फैसला करना उसके लिये आसान नहीं था,, वो निष्कर्ष को फिर से अकेला नहीं करना चाहती थी,,,, इसलिये बस यूंही सब टाल रही थी,,,

उत्कर्ष का भी कई बार फोन आया पर उसने कुछ दिन तक इस मैटर को टालना ही बेहतर समझा,,, निष्कर्ष के साथ मिलने और बात करने का कोई मौका वो नहीं छोड़ रही थी,,,, और अब तो अपने कैमरे से ज्यादा उसका ध्यान निष्कर्ष पर था,,,,

उस दिन रविवार था निष्कर्ष की छुट्टी थी तो वो काश्वी के घर आ गया,, पूरा दिन काश्वी और उसके परिवार के साथ गुजारा,,, निष्कर्ष ने काश्वी को बताया भी कि उसे काश्वी के पापा और बाकी सबसे मिलकर बहुत अच्छा लगता है लंबे समय से जो परिवार की कमी थी वो यहां आकर पूरी हो रही है,,,,

काश्वी निष्कर्ष की भावनाओं को समझ रही थी और शायद यही उसके डर को भी बढ़ा रहा था निष्कर्ष पास आ रहा था और काश्वी के लिये फैसला लेना मुश्किल हो रहा था,,,

दिनभर मस्ती करते करते निष्कर्ष को याद आया कि उसे एक जरूरी मेल करना है उसने काश्वी से पूछा तो काश्वी उसे अपने कमरे में ले गई जहां उसका लैपटॉप था,,,, तभी काश्वी को उसके मम्मी ने नीचे बुला लिया,,, अपना लैपटॉप निष्कर्ष को देकर काश्वी चली गई,,,,,

कुछ देर बाद जब वो वापस लौटी तो देखा कि निष्कर्ष खिड़की के पास खड़ा था चुपचाप बाहर देखता हुआ,,,, काश्वी को कुछ अजीब लगा कि अचानक निष्कर्ष को क्या हुआ,, उसे तो मेल करना था फिर यहां क्यूं,,,,
काश्वी निष्कर्ष के पास जाकर खड़ी हो गई,,, और पूछा क्या हुआ मेल कर दिया?

निष्कर्ष ने कुछ नहीं कहा वो बस काश्वी को देखता रहा,,,,

काश्वी को उसकी आंखों में कुछ नमी भी दिखाई दी,,,,उसे लगा कुछ जरूर हुआ है उसने फिर पूछा,, क्या हुआ निष्कर्ष, सब ठीक है न?

काश्वी की बात का फिर उसने कोई जवाब नहीं दिया और वहां से चलकर लैपटॉप के पास आ गया,,,, काश्वी भी निष्कर्ष के पास आ गई,,, निष्कर्ष ने लैपटॉप काश्वी की तरफ घूमा दिया और कहा,, ये क्या है काश्वी?

काश्वी ने देखा तो उसका ईमेल खुला हुआ था जो उत्कर्ष ने उसे किया था उस मेल में उत्कर्ष ने काश्वी को रिमांइड कराया था कि उसे जल्द एडमिशन के बारे में फैसला करना है,,,, काश्वी सब समझ गई,,, उसका डर अब उसके सामने खड़ा था,, निष्कर्ष को बिना उसके बताए ही सब पता चल गया था,,, काश्वी ने निष्कर्ष को सब बताया,,, वो तस्वीरें भी दिखाई जो उत्कर्ष ने उसे दी थी,,,, वो डर रही थी कि निष्कर्ष ये सुनकर क्या कहेगा,,, उसे कैसा लगेगा,,, लेकिन अब जब निष्कर्ष को सब पता था,,, निष्कर्ष ने बिलकुल वैसा रिएक्ट नहीं किया जैसा काश्वी को डर था,,,

निष्कर्ष ने आराम से काश्वी की पूरी बात सुनी और जब वो चुप हो गई तो कहा,,,काश्वी तुमने अब तक जवाब क्यों नहीं दिया तुम्हें जाना चाहिए वो सबसे बेस्ट रहेगा तुम्हारे करियर के लिये,,, पापा का रिश्ता मेरे साथ जो भी हो लेकिन तुम्हारे लिये वो हमेशा अच्छा ही सोचेंगे प्लीज तुम मेरी वजह से ये सब खोना नहीं,,,,,

काश्वी ने थोड़ी राहत की सांस ली,,,और कहा,,, मुझे डर था कि आपको शायद अच्छा नहीं लगेगा इसलिये पूछा भी नहीं,, बताया भी नहीं,,,

अच्छा मुझसे डर लगा,,,काश्वी तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो,, एक महीने में ही हम एक दूसरे के इतने करीब हो गये इसकी वजह यही थी कि तुम्हारी और मेरी सोच मिलती है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि मेरी वजह से तुम अपनी लाइफ के फैसले नहीं लोगी,,,, तुम मुझसे कभी भी कहीं भी कोई भी बात कर सकती हो प्लीज कुछ भी मत सोचना कुछ कहने के पहले,,, और पापा के बारे में मैंने तुम्हें इसलिये सब बताया क्योंकि तुम समझती हो लेकिन इसका मललब ये नहीं कि तुम मेरी वजह से वो गवां दो जो तुम्हारे लिये अच्छा है,,,,
निष्कर्ष ने काश्वी को बैठाया और उसका हाथ पकड़कर पूछा,,,हम दोस्त हैं न?

काश्वी ने सर हिलाकर हां कहा,, वो बहुत ध्यान से निष्कर्ष को देखकर रही थी,,, एक महीने में पहली बार निष्कर्ष का ये रूप देखा और आज वो उसे और करीब आता लग रहा था

निष्कर्ष ने फिर कहा,,, दोस्ती का मतलब भरोसा है क्या तुम्हें मुझपर भरोसा है?

काश्वी ने फिर हां में सर हिलाया,,,,

भरोसा है तो अभी पापा को रिप्लाई करो कि तुम ज्वाइन करोगी,,,,, निष्कर्ष ने कहा

काश्वी थोड़ा झिझक रही थी और कहा हां ठीक है पर,,, एक साल के लिये वहां जाना होगा,,,, इतना कह कर काश्वी चुप हो गई,,,, उसकी आंख में आंसू भी आ गये थे जिसे छुपाने की वो कोशिश कर रही थी

निष्कर्ष समझ रहा था कि काश्वी के मेल का जवाब न देने के पीछे उसके पापा और उसका रिश्ता ही एक वजह नहीं थी एक और वजह भी थी,,, उसका और निष्कर्ष का रिश्ता जो दोस्ती का एक और पड़ाव आज पार कर रहा था,,,,

निष्कर्ष की आंख में भी आंसू थे अब वो भी वही महसूस कर रहा था जो काश्वी ने किया था,,, उसे एहसास हुआ कि काश्वी उसे छोड़कर नहीं जाना चाहती,,,,यही दर्द महसूस किया था उसने जब काश्वी ने उससे पूछा था कि वो उसे दिल्ली में मिलेगा या नहीं,,,,,,, और अब तो वो उसे सात संमदर पार जाने को कह रहा है,,, ये फैसला कैसे आसान होगा काश्वी के लिये,,,,

निष्कर्ष ने पहले खुद को संभाला और फिर काश्वी से कहा,,, आज मुझे मां की बात याद आ रही है जो उन्होंने पापा को कही थी,,,,,प्यार बांधता नहीं है खुला छोड़ देता है अपने सपनों को पूरा करना चाहिए,,, तभी असली खुशी मिलती हैं,,,,,मैं जानता हूं फोटोग्राफी तुम्हारी जिंदगी है काश्वी और मैं तुम्हारे पहले प्यार को तुमसे अलग नहीं कर सकता,,, तुम्हें जाना होगा और ये मत सोचो कि हम दूर हुए तो बात करना बंद कर देंगे,,, हम दूर रहकर भी पास रहेंगे,,, तुम्हारे हर प्रोजेक्ट में मैं तुम्हारे साथ रहूंगा,,,जैसे वहां जंगल में था,,, खुद चाहे डरूंगा पर तुम्हें रूकने नहीं दूंगा,,,, और आजकल कम्यूनिकेशन मुश्किल कहां,,, फोन है,, इंटरनेट है सब है हम हमेशा कनेक्टेड रहेंगे,,,,,

काश्वी अब और ज्यादा इमोशनल हो रही थी,,, निष्कर्ष ने उसे देखकर कहा,,, और हां अगर तुम्हें ये डर है कि मुझे यहां कोई और गर्लफ्रेंड मिल जाएगी तो सुन लो,,, एक ही काफी है,,, और अब तो मैंने उसके पापा को भी पटा लिया है

रोते रोते काश्वी हंसने लगी,,,,,,

तुम ठीक हो अब,,, कंन्फ्यूजन दूर हुआ ,,, निष्कर्ष ने पूछा

हां,,,अपने आंसू पोछतें हुए काश्वी ने मुस्कुराते हुए कहा,,,

तो चलो रिप्लाई करो और कहो तुम तैयार हो जाने के लिये,,,, निष्कर्ष ने कहा

ठीक है पर एक शर्त है,,, काश्वी ने कहा

शर्त,,, कैसी शर्त,,, निष्कर्ष ने हैरानी से पूछा

मेरे जाने से पहले हम उदयपुर जांएगे,,,, काश्वी ने कहा

उदयपुर,, जाना है तुम्हें,,, निष्कर्ष ने पूछा

ठीक है मंजूर है मैं ले जाउंगा तुम्हें पर अभी रिप्लाई करो,,,, निष्कर्ष ने कहा

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