जब
आप किसी को ज्यादा याद करते
हो तो उसके दिल तक ये आवाज जरुर
पहुंचती है ठीक से पता नहीं
कि ऐसा होता है या नहीं पर अगर
विश्वास में दम हो तो ये भी
मुमकिन हो जाता है। क्या आपके
साथ ऐसा कभी हुआ है कि अचानक
मूड बहुत अच्छा हो गया हो,,,
ऐसा
तब होता है जब कहीं कोई आपको
दिल से याद कर रहा हो,
और
कभी जब बिना वजह मूड खराब हो
जाये तो जरुर कोई आपकी बुराई
कर रहा होगा। कनेक्शन सिर्फ
फोन से नहीं होता,
कनेक्शन
दिल से दिल का भी होता है,,जहां
कभी लाइन बिजी नहीं होती,,
इंतजार
नहीं करना पड़ता,,,
बस
अपनी बात कह दो सामने वाला भी
वही महसूस करता होगा तो बात
पूरी हो जाएगी।
कशिश
ने अंश को फोन नहीं किया,,
लेकिन
फिर भी उसने अपने दिल की हर
बात कह दी थी अपनी शादी के पहले
अपने दिल की हर उलझन को उसने
अंश को सौंप दिया था अब फैसला
अंश को करना था,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,कशिश
तैयार हो चुकी थी। लाल रंग उस
पर ऐसे खिल रहा था जैसे खिलता
गुलाब हो,,
अपनी
शादी के दिन सबसे सुंदर दिखना
हर लड़की का ख्वाब होता है
बस सबकी नजरें उसी पर टिक जाएं
ये तमन्ना होती है कशिश आज
उस रुप में थी जिसे पहले कभी
किसी ने नहीं देखा,
था
,,,,,,,,,
आज
से पहले वो इतनी सुंदर कभी
नहीं लगी।
बारात
दरवाजे पर थी,
नाच
गाने,
बैंड
बाजे का शोर उसे अपने कमरे तक
सुनाई दे रहा था,,
तभी
दरवाजा पर दस्तक हुई कशिश
ने जैसे ही दरवाजा खोला सामने
अंश खड़ा था,,,,,
अंश,,,,,,,,,,,,,वहीं
अंश जिसकी तलाश में वो भावनाओं
का पूरा संमदर पार कर चुकी
थी,,,,
वो
अंश,,,,
जिसकी
न आने की बात सोच कर भी उसने
मुस्कुराने का फैसला कर लिया
था,,,,
वो
अंश अब उसके सामने था,,,
कशिश
अंश के गले लग रो पड़ी,,,
उसकी
आंख से गिरते मोतियों को देखकर
अंश ने उसे संभाला,,,,और
कहा,
, कशिश
तुम्हारा मेकअप धुल जाएगा
इतने घंटे लगे है इसे लगाने
में दोबारा करना पड़ेगा,,,,,,,,,,,,,
रोते
रोते कशिश हंस पड़ी,,,,
कुछ
बोलने वाली कि अंश ने उसे रोक
दिया,,,
एक
मिनट कशिश,,,पहले
देखने तो दो मेरी शरारती सी
दोस्त आज दुल्हन बनी कैसी
लग रही है,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
तुम
कहां थे अंश,
इतनी
देर क्यों लगा दी,
मुझे
लगा तुम नहीं आओगे,,,,
कशिश
बोली
अंश
ने लंबी सांस ली और बोला कैसे
नहीं आता कशिश,,
मुझे
तो आना ही था नहीं तो तुम्हारी
शादी कैसे होती,,,,,
कशिश
जानना चाहती थी वो था कहां,,
पर
इससे पहले कि वो कुछ पूछती,,
अंश
ने ही उसे पूरी बात बताई,,,,
अंश
ने कहा,,,
कशिश
घर से फोन आया था पता चला कि
आकृति के पापा को कैंसर है
उनकी तबियत बहुत खराब थी इसलिये
जाना पड़ा,,,
जब
वहां पहुंचा तो डॉक्टर्स ने
कहा उन्हें किसी अच्छे
हॉस्पिटल में एडमिट कराना
पड़ेगा,,
कई
जगह उनकी रिपोर्ट दिखाई और
फिर किसी ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया
में इसका इलाज अच्छा होता
है तो काफी सोचा सबने क्या
करें,
कुछ
सूझ नहीं रहा था और आकृति का
कोई भाई भी नही है तो मैंने ही
तय किया कि आकृति और मैं उसके
पापा को ऑस्ट्रेलिया ले
जांएगे। अब तुम तो जानती हो
तो हमारे यहां बिना शादी के
साथ रह नहीं सकते तो फिर सब
सोच में पड़ गये उसके परिवार
और मेरे परिवार में किसी को
कुछ समझ नहीं आ रहा था,,
कशिश
उसके पापा की तबियत बिगड़ रही
थी और सिर्फ इस वजह से देरी हो
रही थी क्योंकि हमारी शादी
नहीं हुई,,
मुझसे
रहा नहीं गया और मैने सबसे कह
दिया कि हम मंदिर में शादी कर
ले,,
बस
एक दिन में सब कुछ हो गया,,,
मेरी
शादी आकृति से हो गयी दो दिन
पहले,,,,,,,,,,,,,,
कशिश
अब तक चुपचाप सब सुन रही थी पर
अब उसे समझ नहीं आया कि अगर
इतना सब हो गया तो अंश इस वक्त
उसके साथ कैसे है उसने अंश से
पूछा,,
तुम
यहां कैसे आये फिर,,,
आकृति
को तुम्हारी जरुरत है न ,,
तुम्हें
उसके पास रहना चाहिए था ,,यहां
आना इतना जरुरी नहीं था अंश,,,
अंश
मुस्कुराया जानता था कशिश
तुम यही कहोगी,,
नहीं
आता तो भी तुम शिकायत नहीं
करती पर नहीं आता तो खुद को
कभी माफ नहीं कर पाता,,,,
और
आकृति,,
उसके
पापा कहां है सब,,,,
कशिश
ने पूछा
कल
सुबह 11
बजे
की फ्लाइट है दिल्ली से ही,,,
वो
लोग यहीं के एक हॉस्पिटल में
है,,,
मैं
बस आठ घंटे उधार मांग कर आया
हूं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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