प्रोजेक्ट कम्पलीट होने के बाद ऑफिस में सब रुटीन जैसा चल
रहा था,,,, कुछ महीने ऐसे ही गुजर गये,,,,,अंश और कशिश अब तक अच्छे दोस्त बन
चुके थे। ऑफिस के काम के बीच एक दिन अंश के फोन की घंटी बजी,,, फोन पर बात करते ही
अंश कुछ परेशान दिखने लगा,,, कशिश ने उससे पूछा,, क्या हुआ कोई प्रोबलम है क्या,,,
अंश बताना तो चाहता था पर कुछ सोच कर रुक गया,,,,,,,,,,,,,,,,,,
कशिश ने भी ज्यादा फोर्स नहीं किया वो जानती थी कि थोड़ी
देर में अंश चाहेगा तो उसे बता ही देगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
थोड़ी देर बाद कशिश ने अंश की आवाज सुनी,,, वो किसी को डांट
रहा था,,, कशिश काफी हैरान थी क्योंकि उसने अंश को इस तरह किसी से बात करते नहीं
सुना था,,,,,,,,,,, उस वक्त तो कशिश ने कुछ नहीं कहा लेकिन घर लौटते वक्त कैब
में अंश से बात की।
अंश आज कुछ ज्यादा थका हुआ लग रहा था,,, कैब में सीट पर
टेक लगाकर आंखे बंद कर ली थी उसने,,,, अब तो कशिश से रहा नहीं गया उसने पूछ ही
लिया,,,, अंश तुम्हें क्या हुआ है,, आज दिनभर तुम परेशान रहे हो और अब
ऐसे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मुझे दोस्त समझते हो तो बता क्यों नहीं
रहे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
कशिश,,, क्या बताउं तुम्हें,, अंश ने बस इतना कहा और फिर
आंखे बंद कर ली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
बोलो भी,, कोई परेशानी है तो बात करो,, शायद मैं कुछ मदद कर
पाउं,,कशिश बोली
अंश को समझ नहीं आ रहा था कि अब जो वो कहने जा रहा है उस पर कशिश कैसे
रिएक्ट करेगी। उसने हिम्मत करके कह डाला,,, कशिश,, मेरी शादी तय हो गई है,,,,
कशिश को समझ नहीं आया,,, एक मिनट तक वो चुप रही,,, फिर बोला, ये तो अच्छी खबर है
ना,, तुम क्यों परेशान हो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
रोते रोते जैसे कभी हंसी आ जाती है वैसा ही अंश को लगा उस
वक्त,,,,,,,,,,,,उसने कशिश को बोला,, अरे यार,, मुझे अभी शादी नहीं करनी,,, कशिश
ने पूछा, क्यों, क्यों नहीं करनी,,,,,,,,,,,
अभी टाइम नहीं हुआ,, अंश ने
कहा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अब तो माहौल थोड़ा हल्का हो गया था,, दोनों ने बात करनी
शुरु कर दी थी लेकिन अब भी कशिश समझ नहीं पा रही थी कि आखिर प्रोबलम है
कहां,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
अंश पूरी बात बताओ नहीं तो मैं जा रही हूं,,,,,,,,,,,,,कशिश
ने गुस्से से बोला,,,,,
अब अंश को मस्ती सूझ रही थी,, उसने कहा हम सब इस कैब से जा
ही रहे है तुम अकेले कहां जाओगी,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
कशिश को गुस्से में देखकर अंश ने सोचा अब तो बताना ही
पड़ेगा नहीं तो कशिश सच में उससे बात नहीं करेगी।
अंश ने बोलना शुरु किया,,, कशिश तुम्हें याद है मैंने एक
फोटो तुम्हें दिखाई थी,, आकृति की ,,,, कशिश ने सर हिलाते हुए कहा, हां मुझे याद
है तुम्हारे मेल पर थी,,, तो,,,,,
वही है जिससे घरवाले चाहते है मैं शादी कर लू,,, अंश ने
बताया
तो प्रोबलम क्या है अंश,, कशिश ने फिर पूछा
कोई प्रोबलम नहीं है बस कुछ अच्छा नहीं लग रहा ,,,,,अंश ने
कहा,,,,
क्या अच्छा नहीं लग रहा,,,,, कशिश ने पूछा
तुम बताओ मुझे क्या करना चाहिए,,,,,अंश ने कशिश से कहा
देखो अंश बहुत सिम्पल सा फंडा है शादी उससे करनी चाहिए जो
तुमसे प्यार करें,,,, तुम्हारी हर कमी को अपनाए,,, हर अच्छाई को समझे,,, हर बात
को बिना कहे जो समझे,, और तुम्हे वैसे ही स्वीकार करें जैसे तुम हो,,,जरुरत पड़े
तो तुम्हारी दोस्त बन जाए,,, तुम्हारी प्रोबलम्स को सुलझाए,,, कुछ गलत करो तो
मां की तरह डांटे,,, तुम्हारी आंख में आंसू हो तो प्यार से पोंछ दें और गुस्सा
आये तो छोटे बच्चे की तरह शरारत करके हसां दे,,, और सबसे बड़ी बात वो तुम्हारी
ऐसी दोस्त होनी चाहिए जिससे कोई बात करने से पहले कुछ सोचना न पड़े,,,जो दिल में
आये वो बोल सको,,, ऐसा कोई मिले तो जाने मत
देना,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
कशिश तो ये बोल कर चुप हो गई,,,,, और अंश ने मुस्कुराते
हुए कहा,, कशिश,,, ऐसी तो तुम हो,,,,,,,,,,,,तो फिर मुझे तुमसे शादी करनी
चाहिए,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें