गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 11


दोस्‍ती का खासियत यही होती है ना,,,दोस्‍त कितनी भी बड़ी गलती करें,,, माफी मांगने की जरुरत नहीं होती,, दोस्‍त हमेशा दोस्‍त ही रहता है
अंश जानता था कि कशिश नादान है,, लेकिन उसे डांट कर उस दिन की मस्‍ती को खराब नहीं करना चाहता था,,,,,,,,
अब तो अंधेरा हो चला था तो घर जाने का समय हो गया,,,,,
वैसे पूरा दिन साथ रहने के बाद अब जाने का मन तो शायद दोनों का नहीं कर रहा था,, पर जाना जरुरी तो था,,,,,,,,,,,,,,,
अंश ने कशिश से कहा,, चलो डिनर करें,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
एक जगह जानती हूं मैं चलो वहीं चलते है,,,कशिश ने जवाब दिया,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
ऐसी जगह जहां शांति है,,, खुले आसमान के नीचे टेरिस गार्डन रेस्‍टोरेंट,,,,,चांदनी रात,,, और सूफी म्‍यूजिक का एंबियंस,,,,,
बर्थडे सेलेब्रेट करने की इससे परफेक्‍ट जगह कोई हो सकती है,,, बोलो अंश यहां ठीक है,,,,,,
अंश क्‍या कहता,,,कशिश को देखकर शायद ही कोई जान पाये कि उसके अंदर एक गंभीर, भावुक और चीजों को समझ पाने वाली लड़की भी बसती है क्‍योंकि वो हर वक्‍त शरारतें करती फिरती है लेकिन अंश की पर्सनेल्‍टी तो ऐसी ही है,,, उसे ये जगह कैसे पंसद नहीं आती,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
दोनों सुकून के पल बिता रहे थे और शायद चाहते थे कि दिन कभी खत्‍म न हो,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
पर समय को कोई कैसे रोक सकता है उसे तो चलना ही है,,,,,,,,,
जाने का समय हो गया,,,अब तो रुकने की कोई वजह भी नहीं,,,,,
अंश ने कशिश से कहा,,चलें,, चलो तुम्‍हें घर छोड़ दूं,,,कल ऑफिस में मिलेंगे,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, 
                   
 

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