शुक्रवार, 20 सितंबर 2013

वो पनाह दोस्ती है पार्ट 35

अंश आज दिल खोल कर बोल रहा था कशिश के चेहरे से फिक्र की लकीरें हटाना चाहता था,, उस दिल में जो बात आ गई थी जिससे वो परेशान हो रही थी उसे साफ करना चाहता था,,, अंश की बात कशिश ने बहुत ध्‍यान से सुनी,,

ऐसा कम ही होता है जब लगे कि वक्‍त यही थम जायें,, समय को रोक लें ताकि जाना न पड़े,, पर वक्‍त अपनी रफ्तार से दौड़ रहा था उसे क्‍या पता यहां दो दोस्‍त बस कुछ ही मिनट और साथ होंगे,,, उसे क्‍या पता कि फिर इस तरह बिना रुकावट कभी बात कर सकेंगे या नहीं,,

वक्‍त तो नादान होता है उसे किसी के बारे में सोचने की फुर्सत कहां वो तो बस गुजरता रहता है कभी हम उसे अच्‍छा बनाकर जिंदगी भर उसे याद कर खुश होते रहते है तो कभी बुरा मानकर अपनी सब परेशानियों, सारी दिक्‍कतों की वजह बना देते है

आज इस वक्‍त की यादें लेकर कशिश को भी जाना था पर अब इस वक्‍त में इन सात दिनों में जो सबकुछ बदल गया था उसे साथ ले कर कशिश कैसा महसूस कर रही थी,,, ये जानना चाहता था अंश,,, अब इसके बाद वो क्‍या करेगी,, अंश के साथ बिताए इन सात दिनों के बाद अपनी जिंदगी में लौटकर कशिश क्‍या वही कशिश होगी या फिर कुछ बदल जाएगा।

अंश की पूछने की हिम्‍मत नहीं थी पर कशिश कुछ बोल नहीं रही थी,, वो बस खामोश सामने नजर आ रहे उस रास्‍ते को देख रही थी जहां से उसे वापस लौटना था,,,,,,,,

जाते जाते कशिश ने अंश ने कहा,, जब मैं चली जाउं तो मेरा नंबर डीलीट कर देना,,,,,,

अंश ये सुनकर हैरान था,, उसने पूछा, क्‍यों ?

कशिश ने अंश को देखा और बस कर देना,,,,,,,,,,,,,

अंश ने फिर पूछा,, क्‍यों कशिश,, तुम नहीं चाहती हम फिर बात करें?

चाहने से क्‍या होता है अंश,,,, कशिश ने जवाब दिया,,,

अंश इसके लिये तैयार नहीं था और वो बस जानना चाहता था कि कशिश की इस बात की असली वजह क्‍या है

कशिश ने अंश को बताया,, कि यहां आकर उसकी जिंदगी फि‍र बदल गई है,,

कशिश ने कहा,, अंश मैं इस सिलसिले को यही ख्‍त्‍म करना चाहती हूं,, जानती हूं हम एक शहर में कभी एक साथ नहीं रह सकते और अलग अलग शहरों में रह कर सिर्फ फोन या मेल से कांटेक्‍ट रखना मुश्किल होगा,, कभी मैं जवाब देने में टाइम लगाउंगी तो तुम इंतजार करते रहोगे, कभी तुम बिजी होगे तो मैं सोचूगी पता नहीं कहां हो तुम,, हम दोनों की लाइफ की पायरोरिटिस अलग है अपने बिजी शेड्यूल से टाइम निकाल भी ले तो भी जितना वक्‍त हमें चाहिए कभी मिल नहीं पाएगा,, बस इन सात दिनों की यादों के साथ जीना आसान है इंतजार के साथ नहीं,, इसलिये कह रही हूं बस जाने दो,, और हां ये मत सोचना कि मैं परेशान या दुखी हो कर जा रही हूं,, नहीं अंश मैं यहां से एक ऐसी चीज ले कर जा रही हूं जो हर वक्‍त मेरे साथ रहेगी,, तुम्‍हारी नन्‍हीं सी एंजेल ने वो समझा दिया जो पिछले कई साल से समझ नहीं आया था,,, जिंदगी जीने की नई उम्‍मीद मिली है आज,,,, समझ आ गया कि जिंदगी रुकने का नहीं चलने का नाम है,, पता है जब तुम गये थे तो लगा था कि मैंने एक अच्‍छा दोस्‍त खो दिया और दोबारा खोने के डर से कभी किसी को दोस्‍त ही नहीं बनाया,, पर यहां आकर लगा कि जहां रुक गई थी वहां से आगे बढ़ने का वक्‍त हो गया है अब बस कोई प्रोब्‍लम नहीं है मन एकदम शांत है कोई बैचेनी नहीं,, जैसे कोहरा हटने के बाद सब साफ दिखता है वैसे ही,,, अब पता है कि खुश रहने के लिये खुद अपने अंदर से खुशी की वजह ढूंढनी पड़ती है आज,, वजह भी मिल गई है और खुशी भी,,,,,,,

बस अब जाने दो,,, और रुकी तो तुम्‍हारी आंख से आंसू आ जाएंगे और वो नहीं देख पाउंगी।
अंश ने कुछ नहीं कहा,, वो बस कशिश को जाते हुए देखता रहा,,,,

अगली सुबह कशिश की फ्लाइट थी प्‍लेन में बैठी कशिश के चेहरे पर हल्‍की सी मुस्‍कान थी उसके ऑफि‍स के एक कुलिग ने उससे कहा मुस्‍कुराते हुए बहुत अच्‍छी लगती है आप,, पर ज्‍यादा हंसते हुए कभी देखा नहीं आपको,,,आज कुछ स्‍पेशल है

कशिश और जोर से मुस्‍कुराई और कहा,, मेरी मुस्‍कान कोई चुराकर ले गया था अब वापस मिल गई है अब ऐसे ही रहेगा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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