अपनी
तलाश की है कभी,,
कभी
खुद को ढूंढने निकले हैं,,,
फुर्सत
के लम्हों में कभी खुद से बात
की है,,,
कभी
जाना क्या चाहता है दिल,,,
हालातों
में गुम होने पर तन्हाई की रात
में खुद से टकराएं हैं कभी,,,
कभी
चलते चलते यूंही रुक कर पीछे
मुड़कर देखा है,,,
सोचा
कहां छोड़ आये खुद को,,,किस
मोड़ पर खुद को खो दिया,,
किस
मोड़ पर खुद से फिर मिले,,
हां,
पता
है ये सब सोचने का टाइम किसके
पास है टाइम हो न हो,,
सवाल
तो है,,
सोच
का दायरा छोटा हो,,
पर
जवाब बड़ा है,,,
यूं
ही चलते चलते कोई बता जाता
है,,
यूं
ही चलते चलते कोई समझा जाता
है,,
यूं
ही चलते चलते कोई खुद को खुद
से मिलवा जाता है,,,
गीता शर्मा एक स्वतंत्र पत्रकार है, पिछले 20 साल से वो पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं, उन्होंने दिल्ली, हरियाणा के प्रसिद्ध चैनल टोटल टीवी, नेशनल न्यूज चैनल जैन टीवी और सीएनबीसी में बतौर एंकर, पत्रकार काम किया है। खबरों की भाग दौड़ के बीच सूकून के कुछ पल कहानियां लिखकर गुजारे जो धीरे-धीरे सोशल मीडिया के जरीये सब तक पहुंच रहे हैं।
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