कल मैंने गौतम बुद्ध की ज़िन्दगी पर बनी एक documentary देखी जिसमे उनकी लाइफ का एक इंसिडेंट काफी प्रभावित कर गया एक बार बुध जब असली ज्ञान की तलाश में तपस्या कर रहे थे तोह उन्होंने सात दिन तक कुछ नहीं खाया जिसकी वजह से वोः इतने कमजोर हो गए की कुछ कर नहीं प् रहे थे तब एक छूती बछि ने उन्हें खीर खिला कर उनकी जान बचायी. बुध को फिर भी समझ नहीं आया की फास्टिंग में इतनी ताक़त होने के बावजूद उनके साथ ऐसा क्यूँ हुआ वोः ज्ञान उन्हें क्यूँ नहीं मिला जिसकी तलाश वोः कर रहे है इसी सोच विचार के साथ वोः निकल पड़े अपनी आगे की यात्रा पर रस्ते में उन्हें एक कारीगर दिखा जो "एक तारा" के तार को कस रहा था उन्होंने देखा की जब तार ज्यादा कासी गयी तोह सुर सहीं नहीं लगा और जब ज्यादा ढीली की गयी तोह भी सुर सहीं नहीं था उन्होंने देखा की जब दोनों के बीच का रास्ता अपनाया गया तोह ही असली मकसद हासिल हुआ. अब बुध को समझ आया की ज़िन्दगी में असली ज्ञान की प्राप्ति तभी हो सकती है जब बीच का रास्ता बनाया जाए यानी ज्यादा कट्टरता या ज्यादा ढील दोनों ही बातें गलत है. बुध को हज़र्रों साल पहले ये बात समझ आ गयी थी लेकिन आज भी इस बात के मायने बदले नहीं है आज भी हमें ज़रुरत इस्सी बात की है की हम अपनी सोच के दायरे को बढ़ाये और दुनिया में क्या कब और क्यूँ हो रहा है उसे समझे और बैलेंस कर ज़िन्दगी को जिए. हर दिन एक सा नहीं होता तोह फिर हर दिन एक ही उसूल या एक ही सोच कैसे काम कर सकती है हर दिन अलग परेशानी अलग ख़ुशी है उसे उसी हिसाब से जिए जब जिस चीज़ की ज़रुरत है उसे इस्तेमाल करे बैलेंस बेहद ज़रूरी है. ये बात उन माँ बाप के लिए भी है जो अपने ही बच्चों को अपने हाथ से इसलिए मार देते है क्यूंकि वोः उनकी मर्ज़ी के खिलाफ जा कर शादी कर लेते है ऐसे माँ बाप से सिर्फ इतना ही कहना है की क्या आपकी झूटी शान या परिवार की समाज की इज्ज़त आपके बच्चों की जान से ज्यादा है? अगर हाँ तोह अगर आपके बच्चे रहेंगे ही नहीं तोह ऐसी इज्ज़त चाहिए किसके लिए अपने बच्चों को मारकर जो बेईज्ज़ती आपकी आने वाली पीढ़ियों को सहनी होगी उसका जिम्मेदार कौन है आपने कौनसा नाम कमा लिया जो उनके लिए छोड़ कर जायेंगे.
बच्चे गलती करें तोह उन्हें समझाना माँ बाप का फ़र्ज़ है लेकिन वोः न माने तोह भी उनकी भलाई के बारे में सोचना माँ बाप का फ़र्ज़ है और अगर वोः अपनी गलती की वजह से कही गिरे तोह उन्हें संभालना चाहिए न की उनकी ज़िन्दगी उनसे छीन लेनी चाहिए
ज़रा सोचिये आप क्या चुनेगे ज़िन्दगी या मौत.............
गीता शर्मा एक स्वतंत्र पत्रकार है, पिछले 20 साल से वो पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं, उन्होंने दिल्ली, हरियाणा के प्रसिद्ध चैनल टोटल टीवी, नेशनल न्यूज चैनल जैन टीवी और सीएनबीसी में बतौर एंकर, पत्रकार काम किया है। खबरों की भाग दौड़ के बीच सूकून के कुछ पल कहानियां लिखकर गुजारे जो धीरे-धीरे सोशल मीडिया के जरीये सब तक पहुंच रहे हैं।
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