सिद्धार्थ के जाने की बात सुनकर जिया बहुत दुखी हुई पर इस
दुख के अंधेरे में न जाने कहीं एक खुशी की किरण भी थी,,,,, अब तक जिया ये सोचकर
तस्सली कर रही थी कि जो कुछ उसने महसूस किया वो सिर्फ उसी का एहसास था लेकिन अब
उसे इस बात का यकीन हो रहा था कि जो वो समझ रही थी वहीं सही था,, सिद्धार्थ के दिल
में भी जिया के लिए वही एहसास थे। पर अब भी एक सच नहीं बदला था कि वो दोनों अब
शायद कभी न मिले,,,,,,
गीता शर्मा एक स्वतंत्र पत्रकार है, पिछले 20 साल से वो पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं, उन्होंने दिल्ली, हरियाणा के प्रसिद्ध चैनल टोटल टीवी, नेशनल न्यूज चैनल जैन टीवी और सीएनबीसी में बतौर एंकर, पत्रकार काम किया है। खबरों की भाग दौड़ के बीच सूकून के कुछ पल कहानियां लिखकर गुजारे जो धीरे-धीरे सोशल मीडिया के जरीये सब तक पहुंच रहे हैं।
बुधवार, 26 सितंबर 2012
न तुम जानो, न हम पार्ट 7
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